| टीम के पहुंचने पर बिना मास्क के घर से निकलता लापरवाह कोरोना पॉजीटिव दीपक शर्मा, मास्क देता स्वास्थ्य टीम का सदस्य |
मीडिया, कॉलोनीवासी चीखते रहे पर विभाग ने हल्के में लिया मामला, घूमता रहा कोरोना पीडि़त गली-गली
केदार सिंह गोलिया
शिवपुरी। कोरोना जिसके नाम से इस समय देश का कोना-कोना दहल रहा ह ैऔर तमाम तरह की एडवाइजरी जारी की जा रही हैं, लेकिन इन सबके बीच शिवपुरी के स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही और कथित अति आत्मविश्वास ने पूरे शहर को कोरोना के कहर के संक्रमण पर ला खड़ा कर दिया है। आज जिस दीपक शर्मा का कोरोना रिपोर्ट पॉजीटिव आने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पसीना छोड़ रहा है, दरअसल पाँच दिन पहले स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सजगता दिखाता तो शहरवासियों को कोरोना की दहशत से इस तरह नहीं गुजरना होता। इस पूरे मामले को समझने के लिए हम घटनाक्रम के फीडबैक में जाएं तो शहर के ग्वालियर बायपास रोड के किनारे पीएस होटल के पीछे रहने वाले सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी का बेटा दीपक शर्मा जो दुबई के आबूधाबी में निजी कंपनी में काम करता था 18 मार्च को घर लौटा, लेकिन न तो उसकी स्क्रीनिंग देश में लौटते समय हुई न ही शिवपुरी के रहनुमाओं ने इस बात की जरूरत समझी, भला हो कॉलोनी के जागरुक नागरिकों का जिन्होंने मीडिया के माध्यम से इत्तला दी तो स्वास्थ्य विभाग को हरकत में आना पड़ा। दीपक को अस्पताल लाया गया, जहां उसका परीक्षण किया तो प्रारंभिक पड़ताल में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार ये कहने से नहीं चूके कि फिलहाल प्राथमिक तौर पर दीपक में कोरोना के कोई लक्षण नजर नहीं आ रहे। बस यही लापरवाही शिवपुरी के लिए कोरोना का संकट बन गई। बाद में दीपक का ब्लड सेम्पल लेकर पुणे भेज दिया गया और उसे एक सामान्य मरीज मानकर घर में ही आइसोलेट रहने की सलाह देकर शहर के लाखों लोगों की जान की कीमत पर भगवान भरोसा छोड़ दिया गया। इस दौरान उसके घर पर निगरानी रखने के लिए
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने किसी को तैनात और मॉनीटरिंग करने तक के लिए जरूरी नहीं समझा। नतीजे में दीपक और उसका परिवार लगातार बिना मापदण्डों का पालन करे स्वछंद विचरण करता रहा। हैरानी की बात यह है कि कॉलोनी वालों की मानें तो इस दौरान कॉलोनी के सार्वजनिक नलकूप से लेकर अन्य स्थानों पर इस परिवार की आवाजाही को लेकर जब कॉलोनी वासियों ने स्वास्थ्य कारणों को लेकर आपत्ति जताई भी तो परिवार के लोग कथित तौर पर विवाद पर उतर आए। फिर क्या था सबकुछ पिछले तीन दिनों से चलता रहा। लोगों की मानें तो दीपक ने इस दौरान कॉलोनी के बच्चों के साथ क्रिकेट भी खेला, पानी भी भरा और आसपास की दुकानों से लेकर शहर के तमाम दुकानों से सामान भी खरीदा यानि कोरोना का बटोना शहरभर में हुआ बस बेखर था तो शिवपुरी का प्रशासन और कोरोना से बचाने के लिए तैनात स्वास्थ्य अमला। आज रिपोर्ट आई तो सबसे ज्यादा दहशत में उस कॉलोनी के लोग ही हैं, जहां पिछले तीन दिनों से कोरोनटाइन होने की बजाय दीपक उन सबके बीच था और उसका परिवार भी। हैरानी की बात यह है कि आज जब रिपोर्ट पॉजीटिव होने के बाद दीपक को लेने स्वास्थ्य टीम पहुंची तो दीपक के माता-पिता, बहन से लेकर खुद दीपक भी मुंह पर कोई मास्क नहीं लगाया था और उसे अस्पताल लाया गया तो सूत्र बताते हैं कि दीपक ने प्रारंभिक पूछताछ में खुलकर अपनी आवाजाही स्वीकार की है और शहर के एक प्रमुख गला एवं नाक कान विशेषज्ञ डॉक्टर के क्लीनिक पर जाकर 17 मार्च को स्वास्थ्य परीक्षण कराने की बात भी स्वीकारी है। ऐसे में उस डॉक्टर ने यदि सावधानी नहीं बरती होगी तो दीपक के माध्यम से संक्रमण उस डॉक्टर तक और उसके बाद वहां प्रतिदिन पहुंचने वाले सैंकड़ों मरीजों तक पहुंचा होगा। कुल मिलाकर लापरवाही के इन सिलसिलों ने पिछले हफ्तेभर से अनुशासनवृत्त रही शिवपुरी की आवाम को कोरोना के घातक संकट और संक्रमण के बीच ला खड़ा किया है। देखना होगा कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकार 17 लाख की आबादी वाले इस जिले की आवाम की जान से खिलवाड़ करने वाले स्वास्थ्य और प्रशासनिक अधिकारियों पर क्या कुछ कार्यवाही अंजाम देती है।
केदार सिंह गोलिया
शिवपुरी। कोरोना जिसके नाम से इस समय देश का कोना-कोना दहल रहा ह ैऔर तमाम तरह की एडवाइजरी जारी की जा रही हैं, लेकिन इन सबके बीच शिवपुरी के स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही और कथित अति आत्मविश्वास ने पूरे शहर को कोरोना के कहर के संक्रमण पर ला खड़ा कर दिया है। आज जिस दीपक शर्मा का कोरोना रिपोर्ट पॉजीटिव आने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पसीना छोड़ रहा है, दरअसल पाँच दिन पहले स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सजगता दिखाता तो शहरवासियों को कोरोना की दहशत से इस तरह नहीं गुजरना होता। इस पूरे मामले को समझने के लिए हम घटनाक्रम के फीडबैक में जाएं तो शहर के ग्वालियर बायपास रोड के किनारे पीएस होटल के पीछे रहने वाले सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी का बेटा दीपक शर्मा जो दुबई के आबूधाबी में निजी कंपनी में काम करता था 18 मार्च को घर लौटा, लेकिन न तो उसकी स्क्रीनिंग देश में लौटते समय हुई न ही शिवपुरी के रहनुमाओं ने इस बात की जरूरत समझी, भला हो कॉलोनी के जागरुक नागरिकों का जिन्होंने मीडिया के माध्यम से इत्तला दी तो स्वास्थ्य विभाग को हरकत में आना पड़ा। दीपक को अस्पताल लाया गया, जहां उसका परीक्षण किया तो प्रारंभिक पड़ताल में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार ये कहने से नहीं चूके कि फिलहाल प्राथमिक तौर पर दीपक में कोरोना के कोई लक्षण नजर नहीं आ रहे। बस यही लापरवाही शिवपुरी के लिए कोरोना का संकट बन गई। बाद में दीपक का ब्लड सेम्पल लेकर पुणे भेज दिया गया और उसे एक सामान्य मरीज मानकर घर में ही आइसोलेट रहने की सलाह देकर शहर के लाखों लोगों की जान की कीमत पर भगवान भरोसा छोड़ दिया गया। इस दौरान उसके घर पर निगरानी रखने के लिए
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने किसी को तैनात और मॉनीटरिंग करने तक के लिए जरूरी नहीं समझा। नतीजे में दीपक और उसका परिवार लगातार बिना मापदण्डों का पालन करे स्वछंद विचरण करता रहा। हैरानी की बात यह है कि कॉलोनी वालों की मानें तो इस दौरान कॉलोनी के सार्वजनिक नलकूप से लेकर अन्य स्थानों पर इस परिवार की आवाजाही को लेकर जब कॉलोनी वासियों ने स्वास्थ्य कारणों को लेकर आपत्ति जताई भी तो परिवार के लोग कथित तौर पर विवाद पर उतर आए। फिर क्या था सबकुछ पिछले तीन दिनों से चलता रहा। लोगों की मानें तो दीपक ने इस दौरान कॉलोनी के बच्चों के साथ क्रिकेट भी खेला, पानी भी भरा और आसपास की दुकानों से लेकर शहर के तमाम दुकानों से सामान भी खरीदा यानि कोरोना का बटोना शहरभर में हुआ बस बेखर था तो शिवपुरी का प्रशासन और कोरोना से बचाने के लिए तैनात स्वास्थ्य अमला। आज रिपोर्ट आई तो सबसे ज्यादा दहशत में उस कॉलोनी के लोग ही हैं, जहां पिछले तीन दिनों से कोरोनटाइन होने की बजाय दीपक उन सबके बीच था और उसका परिवार भी। हैरानी की बात यह है कि आज जब रिपोर्ट पॉजीटिव होने के बाद दीपक को लेने स्वास्थ्य टीम पहुंची तो दीपक के माता-पिता, बहन से लेकर खुद दीपक भी मुंह पर कोई मास्क नहीं लगाया था और उसे अस्पताल लाया गया तो सूत्र बताते हैं कि दीपक ने प्रारंभिक पूछताछ में खुलकर अपनी आवाजाही स्वीकार की है और शहर के एक प्रमुख गला एवं नाक कान विशेषज्ञ डॉक्टर के क्लीनिक पर जाकर 17 मार्च को स्वास्थ्य परीक्षण कराने की बात भी स्वीकारी है। ऐसे में उस डॉक्टर ने यदि सावधानी नहीं बरती होगी तो दीपक के माध्यम से संक्रमण उस डॉक्टर तक और उसके बाद वहां प्रतिदिन पहुंचने वाले सैंकड़ों मरीजों तक पहुंचा होगा। कुल मिलाकर लापरवाही के इन सिलसिलों ने पिछले हफ्तेभर से अनुशासनवृत्त रही शिवपुरी की आवाम को कोरोना के घातक संकट और संक्रमण के बीच ला खड़ा किया है। देखना होगा कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकार 17 लाख की आबादी वाले इस जिले की आवाम की जान से खिलवाड़ करने वाले स्वास्थ्य और प्रशासनिक अधिकारियों पर क्या कुछ कार्यवाही अंजाम देती है।






