केदार सिंह गोलिया, शिवपुरी। भारत के संविधान निर्माता, चिंतक, समाज सुधारक डॉ. भीमराव अंबेडकर के जन्मदिन के मौके पर उनके अनुयायियों ने ठकुरपुरा में अम्बेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में प्रो. गोपाल सिंह गिल प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय पोहरी, डॉ. हरीश अम्ब प्राध्यापक पीजी कॉलेज शिवपुरी, डॉ. एमएस हिंडोलिया प्राध्यापक विभागाध्यक्ष अंग्रेजी पीजी कॉलेज, अरुण कुमार जाटव जिपं शिवपुरी सहायक ग्रेड 2, अशोक कौशल हेड मास्टर कटीला सेसईपुरा श्योपुर, एड. भीमप्रकाश दोहरे, श्रीमती स्वाती गिल, श्रीमती किरण हिंडोलिया, श्रीमती रामा कौशल, सूरज भोज आरटीआई कार्यालय शिवपुरी, श्रीमती किरण भोज, केदार सिंह गोलिया पत्रकार आदि उपस्थित रहे ।
इसके बाद अनुयायियों ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा साहेब के नाम से मशहूर डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपना पूरा जीवन सामाजिक बुराइयों जैसे छुआछूत और जातिवाद के खिलाफ संघर्ष में लगा दिया। इस दौरान बाबा साहेब गरीब, दलितों और शोषितों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे। बचपन से ही आर्थिक और सामाजिक भेदभाव देखने वाले अंबेडकर ने विषम परिस्थितियों में पढ़ाई शुरू की। स्कूल में उन्हें काफी भेदभाव झेलना पड़ा। उन्हें और अन्य अस्पृश्य बच्चों को स्कूल में अलग बैठाया जाता था। वह खुद पानी भी नहीं पी सकते थे। ऊंच जाति के बच्चे ऊंचाई से उनके हाथों पर पानी डालते थे। ऐसी विकट परिस्थितियां भी बाबा साहेब के दृढ़ संकल्प को हिला नहीं सकीं इसका जीता जागता उदाहरण आज हम सबके सामने हैं। बाबा साहेब का कहना था कि संगठित रहो, संघर्ष करो, शिक्षित बनो। इस मूलमंत्र को हमें अपने जीवन में उतारकर आगे बढऩे का आज हमें संकल्प लेना चाहिए।










