-मप्र शिक्षक संघ ने ज्ञापन सौंपकर टीईटी मामले में उठाई आवाज
शिवपुरी। करीब 25 से 30 साल स्कूलों में शिक्षक के रूप में सेवाएं देने के बाद अचानक सामने आए एक आदेश ने शिक्षकों की नींद उड़ा रखी है। शिक्षकों को नौकरीे में बने रहने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानि टीईटी पास करना अनिवार्य किया गया है।जिसे शिक्षक संघ अव्यावहारिक बता रहे हैं।इसी महत्वपूर्ण मामले को लेकर मप्र शिक्षक संघ लगातार आवाज उठा रहा है। संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. छत्रवीर सिंह राठौड़ के निर्देश पर शिवपुरी जिला इकाई ने गुरूवार की शाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय शिक्षामंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री के नाम शिवपुरी एडीएम दिनेशचंद्र शुक्ला को ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष वत्सराज सिंह राठौड़ व जिला सचिव अनिल गुप्ता के नेतृत्व में कार्यकारिणी सदस्यों सहित अन्य शिक्षक नेता भी ज्ञापन देने पहुंचे। संघ के मीडिया प्रभारी नीरज सरैया ने बताया कि ज्ञापन के माध्यम से जो प्रमुख मांग रखी गई हैं उनमें 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थाई रूप से मुक्त किया जाए, साथ ही ऐसे शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य सेवालाभों का पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए। आवश्यकता होने पर संसद में उपयुक्त विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाकर इस वर्ग को स्थाई राहत प्रदान की जाए। ज्ञापन में यह भी मांग रखी गई है कि सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस एवं असुरक्षा की स्थिति का तत्काल निराकरण किया जाए। संघ ने विश्वास जताया है कि राष्ट्रनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस वर्ग के साथ न्याय सुनिश्चित करने हेतु भारत सरकार संवेदनशीलता, दूरदर्शिता एवं न्यायपूर्ण दृष्टिकोण का परिचय देगी। ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से सुशील अग्रवाल, बलवीर तोमर, प्रदीप नरवरिया, नरेश भार्गव, कृष्णराम बंसल, जितेन्द्र पाठक, राजाराम राठौर, मुकेश शर्मा, राजेन्द्र पिपलौदा, महेन्द्र नायक आदि मौजूद रहे।







