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राठखेड़ा की जीत की राह के 'भागीरथ' बने प्रहलाद

भारती ने अपने कार्यकालीन उपलब्धियों से राठखेड़ा की जीत को दिया फायनल टच


शिवपुरी। उपचुनाव के नतीजे आ चुके हैं और इसी के साथ हार-जीत पर विश्लेषण का दौर अब शुरू हो चुका है। ऐसे में जिले ही नहीं, बल्कि प्रदेश में भितरघात की आशंकाओं को लेकर सबसे ज्यादा चर्चाओं में रहने वाली पोहरी विधानसभा सीट के नतीजों की समीक्षा हर स्तर पर और हर पक्ष पर होने लगी है। यहां सुरेश राठखेड़ा के सिर जीत का सहरा बंधा है, लेकिन इस सहरे को सिर तक पहुंचाने के पीछे अंचल के कई धुरंधरों की साख और रणनीति को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और यशोधरा राजे सिंधिया ऐसे चेहरे हैं जो यहां स्टार प्रचारक के साथ-साथ सुरेश की जीत इनकी साख से भी जोड़कर देखी जा रही थी।

जहां जीत का श्रेय यकीनन इन बड़े चेहरों को जाता है, लेकिन इन चेहरों के बीच दो बार पोहरी से भाजपा विधायक रहे प्रहलाद भारती के नाम को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। अपनी परंपरागत सीट पर राठखेड़ा का अचानक उन्हीं की पार्टी से मैदान में उतरने के साथ ही प्रहलाद की भूमिका पर तमाम संदेह जताए गए, लेकिन प्रहलाद ने जिस तरह राठखेड़ा की जीत की राह को भागीरथ बनकर आसान किया उससे न केवल पार्टी, बल्कि पोहरी की आवाम में भी उनकी एक अलग तरह की छवि निखरकर सामने आई है। 

अंदरूनी कलह पर आदर्श चेहरा बनकर उभरे प्रहलाद

प्रदेश की राजनीति में अचानक सिंधियानिष्ठ विधायकों के इस्तीफे और बाद में उनके भाजपा में शामिल होने से यकीनन इन सीटों पर इससे पूर्व तक भाजपा की ओर से उनके राजनैतिक विरोधी रहे पूर्व विधायकों, मंडल पदाधिकारियों, यहां तक कि कार्यकर्ताओं के लिए स्काईलैब की तरह उनकी सीट पर आ गिरे नए नवेले भाजपा प्रत्याशियों को स्वीकारना आसान नहीं था। चुनावी दुदुम्भी के साथ ही पोहरी सीट पर भी अंदरूनी कलह दिखाई देने लगी थी। ऐसे में सुरेश की राह आसान नहीं लग रही थी। भाजपा कार्यकर्ता खुलकर सामने आने से परहेज कर रहे थे और सबकी निगाहें प्रहलाद भारती पर टिकीं हुईं थीं कि वे पार्टी के फैसले पर क्या रुख लेते हैं। खुलकर विरोध करेंगे या पर्दे के पीछे रहकर खामोशी धारण कर लेंगे, लेकिन इन सबसे परे यहां पूर्व भाजपा विधायक प्रहलाद भारती कैडरवेश भाजपा के लिए आदर्श चेहरा बनकर उभरे। उन्होंने न केवल जातिगत समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमने वाली पोहरी सीट पर सुरेश के विरोध में खड़े हुए स्वरों को थामा, बल्कि सजातीय से लेकर सभी वर्गों की नाराजगी को दूर करने और भाजपा के लिए एक ईमानदार सिपाही के रूप में काम भी किया। नतीजे में आशंकाओं से घिरी सुरेश की जीत न केवल मुकम्मल हुई, बल्कि जीत का आंकड़ा 15 महीने पहले हुए आमचुनाव से करीब तिगुना कर दिया जो यह बताने के लिए काफी था कि यहां भाजपा में भितरघात की आशंकाएं सिरे से खारिज हो गईं। 

फिर यशोधरा के निष्ठ सिपेहसलार साबित हुए भारती


प्रहलाद भारती के लिए यह सीट राजनैतिक तौर पर उनकी आका यशोधरा राजे सिंधिया की साख से भी जुड़ी थी, क्योंकि पार्टी ने यहां यशोधरा राजे को स्टार प्रचारक के अलावा पूरी जिम्मेदारी सौंपी थी और यशोधरा व संगठन ने भारती को उपचुनाव प्रबंध समिति के संचालक का दायित्व दे दिया था। ऐसे में प्रहलाद के लिए तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच न केवल खुद को पार्टी का एक ईमानदार कार्यकर्ता सिद्ध करना चुनौती था, बल्कि अपनी राजनैतिक आका यशोधर राजे के लिए निष्ठ सिपेहसलार के रूप में भी पेश करने की जिम्मेदारी थी और वे इसमें शत् प्रतिशत सफल भी रहे। 

सोशल साइट पर खुद की कीमत पर मांगे वोट

वोटिंग के एक दिन पहले पूर्व विधायक भारती ने भाजपा और सुरेश राठखेड़ा के समर्थन में अधिक से अधिक संख्या में वोट करने के लिए लोगों से अपील करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाला जिसका व्यापक असर हुआ और लगभग साढ़े हजार लोगों द्वारा वीडियो को देखा, साथ ही 53 लोगों द्वारा इसे शेयर किया। वोटरों के मन में जो आशंकाएं थी वह खत्म हो गई। जिन लोगों तक वह नहीं पहुंच पाए, सोशल साइड के माध्यम से उन तक भी संदेश पहुंचा दिया।

ईमानदारी के बदले भारती को निगम, मंडल या आयोग में मिल सकता है पद

पोहरी उपचुनाव में मेकर की भूमिका में उभरे प्रहलाद भारती को उनकी ईमानदार और वफादारी का शासन में कोई पद मिलने के आसार हैं। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो शासन के अंतर्गत आने वाले निगम, मंडल या फिर आयोग में श्री भारती को पद मिलने के प्रबल आसार बने हुए हैं, फिलहाल यह फैसला वक्त के आघोष में ढका हुआ है आने वाला समय सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा।


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