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कलेक्टर के औचक निरीक्षण में खुली शिक्षा व्यवस्था की पोल, डीईओ श्रीवास्तव पर नाराजगी, थमाया नोटिस

कलेक्टर पहुंचे तो खोरघार स्कूल पर मिला ताला, सिंहनिवास में 5 शिक्षक नदारद, जिलेभर में एसडीएम व तहसीलदार को दिए स्कूलों पर निगरानी के निर्देश

केदार सिंह गोलिया


शिवपुरी। शिवपुरी में हाल ही में पदस्थ हुए कलेक्टर अर्पित वर्मा ने चर्चित शैली में कार्य का आगाज कर दिया है। तेज गर्मी के चलते मंगलवार से ही स्कूलों का समय सुबह 7.30 का किया गया था और कलेक्टर पहले दिन स्कूलों की हकीकत जानने शिवपुरी विकासखण्ड के खोरघार और जिला मुख्यालय से सटे सिंहनिवास जा पहुंचे। यहां खोरघार स्कूल में सुबह 8 बजे तक ताला जड़ा हुआ था और सिंहनिवास में भी 5 शिक्षक गैरहाजिर मिले। जिले में ध्वस्त पड़ी शिक्षा की यह तस्वीर देखकर कलेक्टर ने सबसे पहले विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी को आड़े हाथों लिया और नाराजगी जताते हुए उन्हें ही नोटिस थमा डाला। प्रशासनिक माहौल बदलते ही कल तक मीडिया में अपनी वाहवाही छपवाने के आदी डीईओ श्रीवास्तव को नए साहब से आते ही नाराजगी मिली जो जिले में शिक्षा की सच्चाई की पोल खोलती है। कलेक्टर की कार्यवाही यहीं नहीं रुकी उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर शिक्षा विभाग के अन्य निरीक्षण करने वाले अधिकारियों पर भरोसा करने की बजाय स्कूलों पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देशित कर दे डाली। कलेक्टर के आदेश के बाद जहां शिवपुरी एसडीएम शहर के छावनी स्कूल में निरीक्षण करने पहुंचे तो तहसीलदार ने भी माधवचौक सहित कुछ अन्य स्कूलों का निरीक्षण किया जबकि अन्य विकासखण्डों में भी एसडीएम व तहसीलदार ने प्राथमिक विद्यालय सेसई सड़क, हरिजन बस्ती, दर्रोनी, निवोदा, करैरा के प्राथमिक विद्यालय बम्हारी, मावि भौराना, उमावि करैरा, प्रावि सोनीपुरा, मावि पिछोर, प्रा.वि. सोनीपुरा, मा.वि. पिछोर में प्रा.वि.श्योपुरा (करैरा), मा.वि.सेमरी (पिछोर) का निरीक्षण किया।

दोहरी जिम्मेदारी पर उठे सवाल




गौरतलब है कि जिला शिक्षा अधिकारी विवेक श्रीवास्तव वर्तमान में शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य पद की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। जिले के इस प्रमुख विद्यालय में हजारों छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, ऐसे में एक ही व्यक्ति के पास दो महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी होना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

एक ओर जहां जिले की शिक्षा व्यवस्था पहले से ही अव्यवस्थित नजर आ रही है, वहीं यह स्थिति प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है कि क्या एक अधिकारी दोनों पदों का दायित्व प्रभावी रूप से निभा सकता है, या फिर यह व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है।

सख्ती के संकेत, अब सुधार की उम्मीद

कलेक्टर की इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में सुधार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और जमीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था में कितना सुधार आता है।


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