हिन्दू नववर्ष भारतीय संस्कृति में नए सृजन और समृद्धि का प्रतीक है
शिवपुरी। हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत 2083 (रौद्र संवत्सर) की पावन बेला पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शहर के पोलो ग्राउंड में नववर्ष प्रतिपदा एवं प्रकट उत्सव पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि हिन्दू नववर्ष सनातन संस्कृति, राष्ट्रबोध और आध्यात्मिकता की पुनर्स्थापना करते हुए जीवन में सकारात्मकता, सुख, समृद्धि और नई ऊर्जा का संचार करना है।
इस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी और भगवान राम जी का राज्याभिषेक भी हुआ था।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक मनु जैन ने सम्बोधित करते हुए कहा कि विजयदशमी को संघ की स्थापना हुई और संघ के शताब्दी 100 पूर्ण वर्ष होने जा रहे जब से संघ अपनी रीति नीति और व्यवहारिकता के कारण संघ प्रतिदिन राष्ट्र सेवा में समर्पित हैं।
2083 विक्रम संवत रौद्र नववर्ष कहने को यह एकमात्र खगोलीय घटना हों सकतीं हैं 22 मार्च 1957 (1 चैत्र 1879 शक) को हमारा कैलेंडर का गजट नोटिफिकेशन आया था,हमारा नववर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण है।
यदि हम अपने पिछले संक्रमण काल 800 वर्ष पूर्व की बात की जाए तो उतना नुकसान जब नहीं हुआ जो कि 200 वर्ष पहले हुआ है,यह हमारा दुर्भाग्य है जब आक्रांता रहें हमने अपनी रीति नीति और मौसम वैज्ञानिक से लेकर जो भी रचनाएं थी उनको शिथिल करके उनकी बातों को मानी और उस कैलेंडर को स्वीकार्य किया जिस कैलेंडर का कोई औचित्य नहीं जिसकी वैज्ञानिक और आध्यात्मिक को परिभाषा नहीं।
संघ के विभाग प्रचारक मनु जैन ने बताया कि हमारा हिन्दू पंचांग वैज्ञानिक,आध्यात्मिक और सृजनात्मक दृष्टि कोण से पूर्ण था। किसान जब अनाज को उगाया करता तो दो तीन वर्ष पूर्व की वर्षा ऋतु का अनुमान लगा लिया जाता था उसी आधार पर किसान बीज बोया करते थे। हमें चिंतन करना होगा हमारी सभ्यता और उनकी सभ्यता में कितना अंतर है। आज शक्ति का पहला दिवस है हम और संघ का एक स्वयंसेवक मां शक्ति को प्रणाम करता हैं। हमारे नववर्ष में सब लोग अपनी दिनचर्या शुरू करने से पहले शक्ति की पूजा अर्चना करते हैं और हिन्दू नववर्ष प्रारंभ होता यह हमारी धरोहर है। जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उसकी रक्षा करता है।








