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दलित परिवार पर दबंग धाकड़ों ने बोला ईंट, पत्थर और लाठियों से जानलेवा हमला, एक की मौत

डेढ़ दर्जन आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज
शिवपुरी। पोहरी थाना के ग्राम भानगढ़ में दबंग धाकड़ परिवार के लोगों ने एकराय होकर शनिवार को मामूली विवाद के चलते दलित परिवार के घर पर ईंट और पत्थरों से जानलेवा हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से जख्मी हुए बनवारी जाटव की मौत हो गई जबकि आधा दर्जन के करीब लोग घायल हो गए। पुलिस ने 15 नामजद व तीन या चार अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धारा 302, 323, 294,341, 147, 148, 149, 188 ताहि एवं 3(1)द,3(1)ध, 3(2)(व्हीए), 3(2)(व्ही) एससीएसटी एक्ट के मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में ले लिया है। हालांकि बचाव में कुछ धाकड़ पक्ष के लोग भी घायल हुए हैं।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार विनोद जाटव पुत्र भगवानलाल जाटव शनिवार की शाम करीब 6 बजे परचूने की दुकान से बिंडल लेने गया था तभी वहां पर मजाक में नंदकिशोर बराई ने विनोद की जेब से पैसे निकाल लिए। जब पैसे वापस मांगे तो नंदकिशोर विनोद को लेकर रोड पर आ गया। इसी समय शुभम धाकड़ मौके पर आ गया और जातिसूचक गालियां देते हुए बोला कि तू पैसे मांगेगा और दोनों को शंकर जी के मंदिर के पीछे ले गया, जहां राहुल धाकड़ आ गया। शुभम ने रामहेत धाकड़ के घर से लाठी उठाकर विकास के सिर में मार दी इस दौरान राहुल ने मुंह दबाकर बंद कर दिया। जानकारी लगने पर विकास के पिता बनवारी जाटव मौके पर आ गए और विकास को छुड़ाकर घर ले गए। इसके बाद फिर से रामेश्वर धाकड, धनीराम धाकड, दयानंद धाकड, विमलेश धाकड़, देवेन्द्र धाकड, कल्लू धाकड, बंटी धाकड, सुशील धाकड, प्रकाश धाकड, दीपक धाकड़, नरेन्द्र धाकड, रामनिवास धाकड़, कुलदीप धाकड़  लाठी, पत्थरों से लैस होकर शंकर जी के मंदिर पर एकत्रित हो गए। यहां से सभी ने विकास और उसके पिता बनवारी से मां-बहन सहित जाति सूचक गालियां देना शुभ कर दिया। तभी विकास, बनवारी, अनिल, सुरेन्द्र, चंदन उन्हें समझाने देने के लिए घर से बाहर आ तो आरोपियों ने ने ईंट, पत्थर और लाठियों से मारपीट करना शुरू कर दिया। इसी दौरान राहुल ने जान से मारने की नीयत से एक पत्थर फेंककर बनवारी को मारा जो सिर में जाकर लगा। इस दौरान पत्थर गांव के ही इंग्लिश जाटव के सिर और माथे में लगा। हमले में आधा दर्जन लोग घायल हो गए। गंभीर चोट लगने के कारण बनवारी जाटव की मौत हो गई।

बनवारी को अस्पताल ले जाते समय रास्ता रोककर फिर से किया हमला
घायल बनवारी को उसका बेटा विकास, संजय, कल्याण, रिंकू, रामदयालबाई, शीला जाटव, हाकिम मिलकर कमरलाल जाटव की ऑटो से पोहरी अस्पताल के लिए ले जा रहे थे। ऑटो के आगे मोटरसाइकिल से चंदन व अरविंद जाटव चले रहे थे। तभी भोजपुर रपटे के ऊपर हमलावर कन्हैया धाकड़ के ट्रेक्टर-ट्रॉली में लाठी, पत्थरों से लैस होकर आए और रास्ता रोककर लाठी, पत्थरों से हमला कर दिया। इस दौरान ऑटो को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद सभी हमलावर मौके से भाग खड़े हुए। घटना के बाद दहशत में आए सभी लोग घर वापस लौट आए और डायल 100 को मदद के लिए कॉल किया। डायल 100 की मदद से बनवारी सहित सभी घायलों को पोहरी अस्पताल में लाया गया, जहां डॉक्टरों ने बनवारी जाटव को मृत घोषित कर दिया। रविवार को पुलिस ने मृतक के शव का पीएम कराकर परिजनों को सुपुर्द कर दिया।

वारदात को अंजाम देने वाले इन लोगों पर दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने फरियादी की रिपोर्ट के आधार पर दीपक धाकड़, शुभम धाकड़, राहुल धाकड़, रामेश्वर धाकड़, विमलेश धाकड़, देवेन्द्र धाकड़, नरेन्द्र धाकड़, सुरेन्द्र धाकड़, कल्लू धाकड़, धनीराम धाकड़, रामनिवास धाकड़, कुलदीप धाकड़, बंटी धाकड़, प्रकाश धाकड़ निवासीगण भानगढ़ सहित तीन या चार अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर किया गया है।

पोहरी सहित अन्य थानों का पुलिस फोर्स पहुंचा मौके पर
गांव में किसी भी प्रकार से माहौल न बिगड़े इसलिए पोहरी थाना सहित आसपास के थानों का पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा। सुबह घटना स्थल पर एफएसएल प्रभारी डॉ. एचएस बरहदिया भी मौके पर पहुंचे और बारीकी से परीक्षण कर साक्ष्यों को जुटाया गया। मौके पर पड़े पत्थरों को भी पुलिस ने जब्त किया गया।

थाने के सामने मृतकों के परिजनों ने दिया धरना, समझाइश के बाद माने
मृतक बनवारी जाटव के परिजनों ने सुबह थाने के सामने धरना दिया गया। मृतकों की मांग थी कि सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए, मृतक के एक परिजन को सरकारी नौकरी, 50 लाख की आर्थिक सहायता, बंदूक लायसेंस और पुलिस सुरक्षा दी जाए। एसडीएम पल्लवी वैद्य सहित पुलिस अधिकारियों की समझाइश के बाद परिजन मान गए और मृतक के शव को घर लेकर जाकर अंतिम संस्कार किया।


दलित संगठनों ने नहीं दिखाई रुचि
अक्सर देखा जाता है कि जब भी कोई दलित के साथ कहीं कोई घटना घटित होती है तो इसके बाद दलित संगठन सक्रिय हो जाते हैं, लेकिन यहां पर बीएसपी के कुछ लोगों ने सिर्फ ज्ञापन सौंपा बाकी दलित संगठनों के कार्यकर्ता दिखाई नहीं दिए। यही कारण रहा कि पीडि़त परिवार अपनी मांगों को प्रमुखता से नहीं रख पाया और सोशल मीडिया पर सक्रियता दिखाने वाले दलित संगठनों की पोल खुल गई।

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