पूर्व विरोधियों के कंधों पर होगी पोहरी से सुरेश राठखेड़ा तो करैरा से जसमंत जाटव को जिताने की जिम्मेदारी
केदार सिंह गोलिया
भोपाल/शिवपुरी। देशभर में भले ही कोरोना संकट से अफरा-तफरी मची हो, लेकिन मध्यप्रदेश में भाजपा के आला नेता उपचुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं। भाजपा आलाकमान को सबसे अधिक माथापच्ची 22 सीटों के टिकिट पर करनी पड़ रही है क्योंकि यह सीटों ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों की हैं। भाजपा का इन सीटों पर संकट बढ़ सकता है क्योंकि इन सीटों से आने वाले पुराने नेताओं को अपने भविष्य की भी चिंता है इसलिए कई बागी रुख अख्तियार कर सकते हैं (प्रत्यक्ष या फिर अप्रत्यक्ष)। सूत्रों की मानें तो वरिष्ठ नेतृत्व विरोध के इन स्वरों को दबाने की कोशिश में जुटा हुआ है। लगातार प्रदेशाध्यक्ष और संगठन महामंत्री द्वारा जिलाध्यक्षों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बात की जा रही है। बताया तो यहां तक जा रहा है कि स्थानीय नेताओं में यह स्पष्ट कर दिया है कि उपचुनाव में सिंधिया के लोग ही उम्मीदवार होंगे और उनको जिताने की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। क्योंकि उन्हीं की वजह से प्रदेश में सरकार बनी है।
ऐसे में पोहरी विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के रूप में सिंधिया समर्थक सुरेश राठखेड़ा और करैरा विधानसभा से जसमंत जाटव का चुनाव लडऩा तय है। खासबात यह है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में जिन नेताओं ने दोनों के विरूद्ध प्रचार-प्रसार किया था और उन्हें हराने के लिए पूरा दम खम लगाया था आज इसके उलट यही सब इन्हें जिताने के लिए लगाना होगा।
बीजेपी वरिष्ठ नेतृत्व की सभी क्षेत्रों में पैनी नजर
बीजेपी प्रदेश नेतृत्व को भी पता है कि पार्टी के इस निर्णय से स्थानीय स्तर पर विरोध में आवाजें उठेंगे। ऐसे में सभी क्षेत्रों में पैनी नजर रखी है। हाटपिपल्या से विधायक रहे दीपक जोशी की नाराजगी की खबरों के बाद शुक्रवार को उन्हें प्रदेश मुख्यालय में तलब किया गया।
केदार सिंह गोलिया
भोपाल/शिवपुरी। देशभर में भले ही कोरोना संकट से अफरा-तफरी मची हो, लेकिन मध्यप्रदेश में भाजपा के आला नेता उपचुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं। भाजपा आलाकमान को सबसे अधिक माथापच्ची 22 सीटों के टिकिट पर करनी पड़ रही है क्योंकि यह सीटों ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों की हैं। भाजपा का इन सीटों पर संकट बढ़ सकता है क्योंकि इन सीटों से आने वाले पुराने नेताओं को अपने भविष्य की भी चिंता है इसलिए कई बागी रुख अख्तियार कर सकते हैं (प्रत्यक्ष या फिर अप्रत्यक्ष)। सूत्रों की मानें तो वरिष्ठ नेतृत्व विरोध के इन स्वरों को दबाने की कोशिश में जुटा हुआ है। लगातार प्रदेशाध्यक्ष और संगठन महामंत्री द्वारा जिलाध्यक्षों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बात की जा रही है। बताया तो यहां तक जा रहा है कि स्थानीय नेताओं में यह स्पष्ट कर दिया है कि उपचुनाव में सिंधिया के लोग ही उम्मीदवार होंगे और उनको जिताने की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। क्योंकि उन्हीं की वजह से प्रदेश में सरकार बनी है।
ऐसे में पोहरी विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के रूप में सिंधिया समर्थक सुरेश राठखेड़ा और करैरा विधानसभा से जसमंत जाटव का चुनाव लडऩा तय है। खासबात यह है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में जिन नेताओं ने दोनों के विरूद्ध प्रचार-प्रसार किया था और उन्हें हराने के लिए पूरा दम खम लगाया था आज इसके उलट यही सब इन्हें जिताने के लिए लगाना होगा।
बीजेपी वरिष्ठ नेतृत्व की सभी क्षेत्रों में पैनी नजर
बीजेपी प्रदेश नेतृत्व को भी पता है कि पार्टी के इस निर्णय से स्थानीय स्तर पर विरोध में आवाजें उठेंगे। ऐसे में सभी क्षेत्रों में पैनी नजर रखी है। हाटपिपल्या से विधायक रहे दीपक जोशी की नाराजगी की खबरों के बाद शुक्रवार को उन्हें प्रदेश मुख्यालय में तलब किया गया।







