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एक और किशोरी का भविष्य अंधकारमय होने से बचाया, 22 वर्षीय युवक के साथ होने वाले ब्याह को रुकवाकर

टीम के समझाने से परिजनों ने त्यागा बाल विवाह का विचार
शिवपुरी। कुंवरपुर गांव के आदिवासी समाज में 15 वर्षीय बालिका के बाल विवाह की सूचना पर पहुंचे बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा ने बालिका के परिजनों को बाल विवाह के दुष्प्रभावों से परिचित कराते हुए बताया कि बाल विवाह एक सामूहिक अपराध है,इसके लिये कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि परिवार,समाज और रिस्तेदार सब दोषी होते है। कम उम्र में विवाह का मतलब है बच्चे के भविष्य को चौपट कर देना। बाल विवाह एक बच्चे से उसकी खुशियां, शिक्षा और स्वास्थ्य सब कुछ छीन लेता है। यह एक अच्छे माता-पिता या अच्छे परिजनों का कर्तब्य नहीं हो सकता। यह तो बचपन के साथ कू्ररता है।  टीम को परिजनों ने बताया कि बालिका के पिता बीमार रहते है। इसलिए कम उम्र में बेटी का विवाह करना चाह  रहे थे। टीम ने पूछा कि जिस लड़के के साथ विवाह होना है उसकी उम्र क्या है तो लड़की की मां ने बताया कि बताया कि उसकी उम्र 21 वर्ष से अधिक है। उसने चिकित्सा प्रमाण पत्र भी दिखाया जिसमें लड़के की उम्र 21 वर्ष से अधिक होना दर्शाया गया था।

कम उम्र में विवाह बचपन के साथ क्रूरता है
बाल विवाह बच्चों के पर अत्याचार है, बाल विवाह करने वाले वर-वधु के माता-पिता, सगे संबंधी, बाराती यहां तक की विवाह कराने वाले पंडित पर भी कानूनी कार्रवाई होती है। बाल विवाह एक अपराध है। जिसके लिये 3 साल की जेल और एक लाख रुपए तक का जुर्माना विवाह में शामिल हर व्यक्ति पर हो सकता है। बाल विवाह के कारण बच्चों मेें कुपोषण, शिशु-मृत्यु दर एवं मातृ-मृत्यु दर के साथ घरेलू हिंसा में भी वृद्धि होती है। कार्रवाई के दौरान सेक्टर पर्यवेक्षक तृप्ति श्रीवास्तव, बाल संरक्षण इकाई के सामाजिक कार्यकर्ता जीतेश जैन एवं स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनीता जाटव भी उपस्थित थी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को स्कूल खुलने के बाद स्कूल में फिर से प्रवेश दिलाने के लिये निर्देशित किया गया।

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