लॉकडाउन में हर रोज तैयार होकर स्कूल बस आने का करता है इंतजार
शिवपुरी। कोरोना संक्रमण के चलते देशभर में स्कूल सहित विभिन्न संस्थाएं बंद हैं। शुरूआत में तो स्कूलों की छुट्टियां होने के चलते बच्चे खुशियां मना रहे थे, लेकिन अब लंबी अवधि गुजरने के बाद यही बच्चे घर पर बोर होने लगे हैं और अपने स्कूल को मिस कर रहे हैं। दरअसल, पीजी कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ. यूसी गुप्ता का बेटा अपने परिवार के साथ बैंगलोर में निवासरत हैं, वहीं पर उनका पुत्र रियांस गुप्ता एक प्ले स्कूल में पढ़ता है। कुछ माह पहले रियांश अपने दादू प्रो. यूपी गुप्ता के यहां शिवपुरी आया था इसी दौरान दून पब्लिक स्कूल के शुभारंभ समारोह में रियांस अपने दादू के साथ गया हुआ था इस दौरान दून पब्लिक स्कूल को देखकर रियांश लालायित हो गया और कहने लगा है मुझे दादू के साथ रहना है और यहीं पर पढऩा है। इसके बाद डॉ. गुप्ता ने अपने पोते को यहीं पर पढ़ाने का निर्णय लिया और उन्होंने बैंगलोर के स्कूल से उसका नाम कटवा लिया। अब रियांश अपने दादू के साथ रहता है, लेकिन लॉकडाउन के चलते स्कूल बंद होने से उसका एडमिशन भी नहीं हो पाया है। अब रियांश हर रोज अपने दादू से कहता है कि मेरी बस कब आएगी, मुझे स्कूल जाना है, साथ ही मासूम कहता है कि कोरोना तुम कब जाओगे...? और हर रोज अपने पुराने स्कूल की डे्रस पहनकर तैयार भी होता है। इस प्रकार अब बढ़ते लॉकडाउन से नौनिहाल भी घर पर बोर होने लगे हैं और स्कूल के मस्ती भरे दिनों को काफी मिस कर रहे हैं।
शिवपुरी। कोरोना संक्रमण के चलते देशभर में स्कूल सहित विभिन्न संस्थाएं बंद हैं। शुरूआत में तो स्कूलों की छुट्टियां होने के चलते बच्चे खुशियां मना रहे थे, लेकिन अब लंबी अवधि गुजरने के बाद यही बच्चे घर पर बोर होने लगे हैं और अपने स्कूल को मिस कर रहे हैं। दरअसल, पीजी कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ. यूसी गुप्ता का बेटा अपने परिवार के साथ बैंगलोर में निवासरत हैं, वहीं पर उनका पुत्र रियांस गुप्ता एक प्ले स्कूल में पढ़ता है। कुछ माह पहले रियांश अपने दादू प्रो. यूपी गुप्ता के यहां शिवपुरी आया था इसी दौरान दून पब्लिक स्कूल के शुभारंभ समारोह में रियांस अपने दादू के साथ गया हुआ था इस दौरान दून पब्लिक स्कूल को देखकर रियांश लालायित हो गया और कहने लगा है मुझे दादू के साथ रहना है और यहीं पर पढऩा है। इसके बाद डॉ. गुप्ता ने अपने पोते को यहीं पर पढ़ाने का निर्णय लिया और उन्होंने बैंगलोर के स्कूल से उसका नाम कटवा लिया। अब रियांश अपने दादू के साथ रहता है, लेकिन लॉकडाउन के चलते स्कूल बंद होने से उसका एडमिशन भी नहीं हो पाया है। अब रियांश हर रोज अपने दादू से कहता है कि मेरी बस कब आएगी, मुझे स्कूल जाना है, साथ ही मासूम कहता है कि कोरोना तुम कब जाओगे...? और हर रोज अपने पुराने स्कूल की डे्रस पहनकर तैयार भी होता है। इस प्रकार अब बढ़ते लॉकडाउन से नौनिहाल भी घर पर बोर होने लगे हैं और स्कूल के मस्ती भरे दिनों को काफी मिस कर रहे हैं।







