अतिरिक्त कमाई का साधन बना कोचिंग व्यवसाय
केदार "करामाती " 7999366077
शिवपुरी। जिला मुख्यालय पर भले ही कलेक्टर से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी और तमाम शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी बैठते हों, लेकिन इनका होना और न होना एक बराबर है। यह कहना इसलिए अतिश्योक्ति नहीं होगा क्योंकि जिला मुख्यालय पर ही शासकीय शिक्षकों द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार सबकुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं। शासकीय स्कूलों में नौकरी करने वाले कई शिक्षक धड़ल्ले से कोचिंग सेंटरों का संचालन कर अतिरिक्त आर्थिक लाभ उठा रहे हैं। अनियमितता में लिप्त शिक्षकों को किसी कार्रवाई का भय भी नहीं है, क्योंकि कोचिंग सेंटरों से संबंधित किसी तरह की अधिकृत जानकारी प्रशासन के पास नहीं है। शहर में ही दर्जनोंभर छोटे-बड़े कोचिंग सेंटरों का संचालन बखूबी हो रहा है। सूत्रों एवं चर्चाओं की मानें तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ से ही इस पूरे खेल को खेला जा रहा है।
क्या है नियम
नियम यह है कि सरकारी नौकरी करने वाला कोई भी व्यक्ति न तो घर पर ट्यूशन दे सकता है, न ही कोचिंग सेंटर का संचालन कर सकता है, लेकिन कोचिंग चलाने वाले शिक्षक इस मामले में बेफिक्र हैं। अधिकांश कोचिंग सेंटर रजिस्टर्ड नहीं हैं। किस कोचिंग का संचालन, कौन कर रहा है इस बात का लेखा-जोखा भी सरकारी स्तर पर व शिक्षा विभाग को भी नहीं है। प्रशासनिक स्तर पर कभी कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण भी नहीं किया गया इसलिए सरकारी नौकरी के साथ कोचिंग सेंटर चलाने वाले लोग बेफिक्र नजर आते हैं।
सैकड़ों की संख्या में है छात्र
सरकारी नौकरी के साथ कोचिंग सेंटर चलाना अब मोटी कमाई का जरिया भी बना है, क्योंकि अच्छी शिक्षा और पर्याप्त ज्ञान को तलाशते ऐसे छात्र-छात्राओं की संख्या सैंकड़ों में है जो सुबह-शाम कोचिंग सेन्टरों पर विभिन्न बैचों में पढऩे आते हैं। सरकारी स्कूलों में पदस्थ कुछ शिक्षक जहां अपनी नौकरी के साथ ही कोचिंग सेन्टरों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। वहीं अतिरिक्त लाभ कमाने के उद्देश्य से स्कूलों के ही विद्यार्थियों को कोचिंग में विषय विशेष की सुविधाओं का हवाला देकर बच्चों को ट्यूशन के लिए आकर्षित करते हैं।
सांठगांठ के दम नहीं जाते नियमिति स्कूल
सूत्रों की मानें तो स्कूलों में नियमित उपस्थिति न देनी पड़े इसके लिए शिक्षकों ने सरकारी स्तर पर ही साठगांठ कर रखी है। यही वजह है कि कुछ शिक्षक स्कूल के समय पर भी अपने अन्य काम व कोचिंग सेंटरों में बच्चों को पढ़ाते नजर आते हैं। यदि विभागीय स्तर पर निगरानी की जाए तो इस अनियमितता का खुलासा हो सकता है।
केदार "करामाती " 7999366077
शिवपुरी। जिला मुख्यालय पर भले ही कलेक्टर से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी और तमाम शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी बैठते हों, लेकिन इनका होना और न होना एक बराबर है। यह कहना इसलिए अतिश्योक्ति नहीं होगा क्योंकि जिला मुख्यालय पर ही शासकीय शिक्षकों द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार सबकुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं। शासकीय स्कूलों में नौकरी करने वाले कई शिक्षक धड़ल्ले से कोचिंग सेंटरों का संचालन कर अतिरिक्त आर्थिक लाभ उठा रहे हैं। अनियमितता में लिप्त शिक्षकों को किसी कार्रवाई का भय भी नहीं है, क्योंकि कोचिंग सेंटरों से संबंधित किसी तरह की अधिकृत जानकारी प्रशासन के पास नहीं है। शहर में ही दर्जनोंभर छोटे-बड़े कोचिंग सेंटरों का संचालन बखूबी हो रहा है। सूत्रों एवं चर्चाओं की मानें तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ से ही इस पूरे खेल को खेला जा रहा है।
क्या है नियम
नियम यह है कि सरकारी नौकरी करने वाला कोई भी व्यक्ति न तो घर पर ट्यूशन दे सकता है, न ही कोचिंग सेंटर का संचालन कर सकता है, लेकिन कोचिंग चलाने वाले शिक्षक इस मामले में बेफिक्र हैं। अधिकांश कोचिंग सेंटर रजिस्टर्ड नहीं हैं। किस कोचिंग का संचालन, कौन कर रहा है इस बात का लेखा-जोखा भी सरकारी स्तर पर व शिक्षा विभाग को भी नहीं है। प्रशासनिक स्तर पर कभी कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण भी नहीं किया गया इसलिए सरकारी नौकरी के साथ कोचिंग सेंटर चलाने वाले लोग बेफिक्र नजर आते हैं।
सैकड़ों की संख्या में है छात्र
सरकारी नौकरी के साथ कोचिंग सेंटर चलाना अब मोटी कमाई का जरिया भी बना है, क्योंकि अच्छी शिक्षा और पर्याप्त ज्ञान को तलाशते ऐसे छात्र-छात्राओं की संख्या सैंकड़ों में है जो सुबह-शाम कोचिंग सेन्टरों पर विभिन्न बैचों में पढऩे आते हैं। सरकारी स्कूलों में पदस्थ कुछ शिक्षक जहां अपनी नौकरी के साथ ही कोचिंग सेन्टरों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। वहीं अतिरिक्त लाभ कमाने के उद्देश्य से स्कूलों के ही विद्यार्थियों को कोचिंग में विषय विशेष की सुविधाओं का हवाला देकर बच्चों को ट्यूशन के लिए आकर्षित करते हैं।
सांठगांठ के दम नहीं जाते नियमिति स्कूल
सूत्रों की मानें तो स्कूलों में नियमित उपस्थिति न देनी पड़े इसके लिए शिक्षकों ने सरकारी स्तर पर ही साठगांठ कर रखी है। यही वजह है कि कुछ शिक्षक स्कूल के समय पर भी अपने अन्य काम व कोचिंग सेंटरों में बच्चों को पढ़ाते नजर आते हैं। यदि विभागीय स्तर पर निगरानी की जाए तो इस अनियमितता का खुलासा हो सकता है।







