शिवपुरी। देश और प्रदेश के विभिन्न भागों की तरह शिवपुरी में भी समय समय पर अतिक्रमण विरोधी अभियान संचालित होता रहा है। अतिक्रमण हटाना एक सहज प्रक्रिया है। शहर के सौंदर्यीकरण और विकास की गति को आगे बढ़ाने के लिए अतिक्रमण हटाए जाते हैं। इसे किसी भी कोण से अनुचित नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन जहां तक शिवपुरी का सवाल है यहां यह अभियान समस्या बढ़ाने वाला ही साबित हुआ है। शिवपुरी में अतिक्रमण बदले की भावना से हटाए गए। इसके जरिए प्रशासनिक और राजनैतिक ताकत का दुरूपयोग किया गया। गरीबों को निर्वासित किया गया और लोकतंत्र का मजाक उड़ाया गया। जो भी अतिक्रमण हटाए गए उनका अभी तक कोई उपयोग नजर नहीं आया। अतिक्रमण हटाने से शहर की सुंदरता बढ़ी नहीं बल्कि इससे कुरूपता ही बढ़ी। आज भी शहर के कई साफ किए गए अतिक्रमण मुंंह चिढ़ाते हुए नजर आते हें। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार का अतिक्रमण विरोधी अभियान वहीं पुरानी तर्ज पर होगा अथवा इस बार इस अभियान के साथ रचनात्मक और सकारात्मक दृष्टि भी होगी।
याद करें तो लगभग 18 साल पहले माधव चौक से अतिक्रमण हटाया गया। यह तर्क दिया गया कि शिवपुरी सिनेमा से लगी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर दुकानें बनाई गई हैं। तत्कालीन कलेक्टर बीएल कांताराव के कार्यकाल में वर्ष 2001 में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाकर उन दुकानों को तोड़ दिया गया, लेकिन आज 18 साल बाद उस जगह सुंदरता निखरने के बजाय बदसूरती और बढ़ गई है। शहर के हदय स्थल की उस जगह पर लोग खुलेआम लघुशंका आदि कर गंदगी को बढ़ावा दे रहे हैं। उस दौरान कोर्र्ट रोड़, सदर बाजार आदि क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाए गए और खूब वाहवाही लूटी गई, लेकिन आज स्थिति उससे भी बदतर हो गई है। तीन साल पहले तत्कालीन एसडीएम रूपेश उपाध्याय के निर्देशन में हनुमान चौराहे से भाजपा नेता राजेंद्र गोयल के आवास को अतिक्रमण में बताकर तुड़वा दिया गया, लेकिन आज भी उस स्थान का कोई उपयोग नहीं किया गया और उस स्थल की बदसूरती और बढ़ गई है। सवाल उठने लगे हैं कि ऐसे अतिक्रमण विरोधी अभियान का क्या अर्थ। उस दौरान नाले के किनारे बने कई मकानों को तोड़ दिया गया और लोगों को लाखों रूपए की क्षति का सामना करना पड़ा, परंतु उपयोग क्या हुआ कोई नहीं जानता। सिर्फप्रशासनिक ताकत का एक नग्न प्रदर्शन ही देखने को मिला। उस दौरान कोर्ट रोड़ पर हनुमान मंदिर से लगी दुकानों को अतिक्रमण में बताकर कई फुट ढहा दी गईं। कोर्ट रोड़ पर भी अतिक्रमण साफ किए गए, लेकिन आज स्थिति उससे भी बदतर है और हटाए गए अतिक्रमण का कोई उपयोग नहीं। शिवपुरी के इतिहास में अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत कोई भी एक भी उदाहरण ऐसा नहीं बताया जा सकता जिससे कहा जा सके कि अतिक्रमण साफ कर एक बड़ा काम किया गया है। इस संदर्भ में सवाल यह है कि क्या प्रशासन द्वारा यातायात व्यवस्था सुधारने के नाम पर शुरू किया गया अतिक्रमण विरोधी अभियान सार्थक साबित होगा। अभी तो अस्पताल के सामने खाली जमीन पर किसी तरह स्टाल या ठेले लगाकर जीवन यापन करने वाले गरीब लोग ही बेदखल हुए हैं।






