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भाजपा को बड़ा झटका: सिंधिया की सभा में कद्दावर नेता राकेश सिंह ने थामा कांग्रेस का दामन

  • कहा- श्री सिंधिया लगाएंगे मेरी नैया पार

शिवपुरी। भिण्ड जिले के कद्दावर भाजपा नेता चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने शनिवार को शिवपुरी में  गांधी पार्क में आयोजित पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं सासंद ज्योतिरादित्य सिंधिया की सभा में कांग्रेस में शामिल होकर घर वापसी कर ली है। श्री सिंधिया ने मंच पर चौधरी राकेश सिंह को कांग्रेस की तौलिया डालकर स्वागत किया। इस मौके श्री चौधरी ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया जी ने एक बार पुन: मुझे अपनी नाव पर बिठा लिया है और वह मुझे नैया पार लगवाएंगे। इस मौके पर श्री सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनीय राजे, जिले के स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट, महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी, प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, पिछोर विधायक केपी सिंह कक्काजू, श्रम मंत्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया, सांसद प्रतिनिधि रामकिशन सोलंकी सहित कांग्रेस के नेतागण उपस्थित रहे।
यहां बता दें कि लगभग 6 साल पूर्व 2013 में मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहते हुए वे अचानक कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। वे पिछले पांच सालों से घर बैठे थे तथा भाजपा में हाशिए पर रख दिए गए थे। उन्होंने भाजपा के टिकट पर 2018 का विधानसभा चुनाव लड़ा था पर इसमें उनकी हार हो गई थी। पिछले कुछ दिनों से उनके कांग्रेस में जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं।
58 वर्षीय चौधरी राकेश सिंह 1990 से चार बार भिंड से कांग्रेस के विधायक रहे व विपक्ष के उप नेता के रूप में कार्य किया। इससे पहले वह 1998 से 2003 के बीच दिग्विजय सिंह की कैबिनेट में मंत्री थे। चौधरी ने जुलाई 2013 में कांग्रेस छोडकऱ तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के समक्ष भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली थी। चौधरी ने 1979 में भिण्ड से अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरूआत की। अपने विधायक पिता चौधरी दिलीपसिंह के निधन के बाद 1990 में वह पहली बार भिण्ड से विधायक बने। 1996 का उपचुनाव व 1998 का चुनाव जीतने के बाद वह 2001-02 में मप्र के शहरी विकास, आवास और पर्यावरण विभाग के कैबिनेट मंत्री रहे। अगस्त 2003 में वाक्पटुता और संसदीय नियमों-विनियमों के व्यापक ज्ञान के लिए उन्हें प्रदेश सरकार ने पं.कुंजीलाल दूबे उत्कृष्ट विधायक का पुरस्कार दिया। चौधरी ने भिंड सीट पर कांग्रेस का गढ़ बनाए रखा और 2008 के चुनावों के बाद 13वीं मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए अपनी चौथी जीत दर्ज की। 2008 और 2013 के बीच मध्य प्रदेश विधानसभा में उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस समिति और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस विधायकों के प्रवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया था। तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष जमुना देवी ने उनकी संसदीय क्षमता को स्वीकार करते हुए उन्हें विपक्ष का उप नेता नियुक्त किया था। उनके निधन के बाद चौधरी ने मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के कार्यवाहक नेता के रूप में कार्य किया। चौधरी 2013 में अप्रत्याशित रूप से भाजपा में चले गए थे। भाजपा ने 2013 में उनके छोटे भाई चौधरी मुकेश सिंह को मेहगांव से टिकट देकर विधायक बनाया। चौधरी राकेशसिंह को भी पार्टी द्वारा राज्यसभा में भेजे जाने का भरोसा दिया गया था, पर ऐसा नहीं हो पाया। वे पार्टी में लंबे समय से अपनी उपेक्षा से आहत थे।


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