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वेतन वृद्धि की मांग को लेकर पम्प अटेंडरों ने शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल

पानी सप्लाई पर पड़ेगा असर, बिगडेगी व्यवस्था 
शिवपुरी। नगर पालिका क्षेत्र में पानी की सप्लाई करने वाले 250 के लगभग संविदाकर्मी आज से वेतन वृद्धि की मांग को लेकर अनिश्चिकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। हड़ताल पर जाने से पूर्व कल शुक्रवार को संविदाकर्मियों ने एसडीएम  को ज्ञापन देकर हड़ताल पर जाने के निर्णय से अवगत करा दिया था और नपा प्रशासन को चेताया था कि उनके हड़ताल पर जाने से शहर मेें पानी सप्लाई की व्यवस्था गड़बड़ा सकती है। वहीं नगर पालिका सीएमओ सीपी राय ने हड़ताल पर जाने वाले पम्प अटेंडरों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कहीं है। 
जानकारी के अनुसार नगर पालिका मेें संविदा पर काम कर रहे 250 के लगभग पम्प अटेंडर पिछले लम्बे समय से कलेक्टर दर पर वेतन वृद्धि किए जाने की मांग को लेकर संघर्षरत है। विधानसभा चुनाव से पूर्व नगर पालिका प्रशासन ने उनकी समस्या को सुलझाने का आश्वासन दिया था। लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद भी उनकी मांग पर नपा ने कोई ध्यान नहीं दिया तो इससे नाराज होकर संविदाकर्मियों ने अनिश्चिकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया और कल एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर पम्प अटेंडरों ने हड़ताल पर जाने की सूचना दे दी और आज सुबह 11 बजे से सभी पम्प अटेंडर अनिश्चिकालीन हड़ताल पर चले गए। पम्प अटेंडरों के हड़ताल पर जाने से शहर की पेयजल सप्लाई व्यव्था ठप हो गई है। हड़ताल की अगुवाई कर रहे संतोश कुशवाह ने कहा है कि नगर पालिका उनपर कार्रवाई करने की बात कहकर उन्हें अपनी जायज मांगों को रखने के लिए धमका रही है। जबकि वह किसी भी धमकी से नहीं डरेंगे और वह कार्रवाई के भय के बिना अनिश्चिकालीन हड़ताल पर डटे रहेंगे। 

नगर पालिका वर्कस ऑग्र्रेनाईजेशन ने पम्प अटेंडरों को समर्थन देने से किया इंकार
भारतीय मजदूर संघ के अंतर्गत नगर पालिका में कार्यरत संगठन नगर पालिका वर्कस ऑग्रेनाईजेशन ने पम्प अटेंडरों के अनिश्चिकालीन हड़ताल पर जाने के फैसले को गलत बताते हुए अपना समर्थन देने से इंकार कर दिया है। संगठन से जुडे नपा कर्मचारी यशपाल सिंह जाट ने कहा है कि पम्प अटेंडरों की यह मांग तर्क संगत नहीं है। पूर्व में पम्प अटेंडर 1 हजार रूपए में काम करते थे जो उनके भरण पोषण के लिए बहुत ही कम राशि थी और उसके संगठन के उनकी इस पीड़ा को समझा और उनके समर्थन में आंदोलन किया और उनके 1000 रूपए का वेतन 7 हजार रूपए तक करवाया। लेकिन अब वह अपनी नाजायज मांग मनवाने के लिए हड़ताल का सहारा ले रहे हैं जो गलत है। पम्प अटेंडरों ने उनसे समर्थन के लिए सम्पर्क किया था। लेकिन उनके गलत फैसले को लेकर उन्होंने समर्थन न देने का निर्णय लिया है। 


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