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अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन में मां का सशक्त होना सबसे अधिक आवश्यक : पवन कुमार शर्मा

▶ चेन्नई में प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन का तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

▶ देशभर से 200 से अधिक स्कूल प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

▶ पवन कुमार शर्मा को बेस्ट क्रिएटिव लीडरशिप, राजकुमार शर्मा को ऑर्गेनाइजेशन लीडरशिप अवार्ड


चेन्नई। प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन का तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन चेन्नई के एक सेवन स्टार होटल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में देशभर से आए 200 से अधिक निजी स्कूल प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रारंभिक शिक्षा में नवाचार, रिसर्च को बढ़ावा देना तथा बच्चों में बढ़ती एंग्जायटी, तनाव और मानसिक चुनौतियों पर गंभीर विमर्श करना रहा।

सम्मेलन में एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शर्माइल अहमद, मुख्य अतिथि अभिनेता राहुल रॉय, विशिष्ट अतिथि फरजाना शकील और डॉ. धीरज मल्होत्रा उपस्थित रहे।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश स्टेट प्रेसिडेंट पवन कुमार शर्मा को बेस्ट क्रिएटिव लीडरशिप अवार्ड तथा मध्यप्रदेश स्टेट सेक्रेटरी राजकुमार शर्मा को ऑर्गेनाइजेशन लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित किया गया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए पवन कुमार शर्मा ने अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन पर हो रही रिसर्च के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों का ब्रेन डेवलपमेंट जन्म से 6–7 वर्ष की आयु तक सबसे तेजी से होता है। वर्तमान सरकारी नीतियों और नई शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुसार 3 वर्ष की आयु के बाद शिक्षा को औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाता है, जबकि बच्चे के जीवन के पहले तीन वर्ष सबसे निर्णायक होते हैं।

उन्होंने कहा कि इस अवधि में बच्चे सीमित संसाधनों के साथ घर की चारदीवारी में रहते हैं। यदि समाज को श्रेष्ठ व्यक्तित्व चाहिए, तो यह आवश्यक है कि बच्चे की पहली गुरु मानी जाने वाली मां को भी शिक्षित और प्रशिक्षित किया जाए। इसी विचार के तहत उन्होंने “मोमी माय मेंटर” की अवधारणा प्रस्तुत की।


पवन कुमार शर्मा ने बताया कि इस मॉडल के तहत 1 से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार किया जाता है, जहां वे अपनी मां के साथ प्रतिदिन 1 से 2 घंटे बिताएं। इस दौरान विभिन्न प्रकार की एक्टिविटीज, खिलौने, म्यूजिक थेरेपी, फ्रेगरेंस थेरेपी और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से बच्चों का सर्वांगीण विकास किया जाता है। उन्होंने वर्तमान समय में बच्चों में बढ़ती एंग्जायटी, गलत दिशा में जाने की प्रवृत्ति, कम उम्र में अपराध और माता-पिता से संवाद की कमी जैसे मुद्दों पर चिंता जताई। समाधान के रूप में उन्होंने स्ट्रेस हैंडलिंग ट्रेनिंग और क्वेश्चन आस्किंग ट्रेनिंग को अत्यंत प्रभावी बताया। सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए नवाचार—मोमी माय मेंटर, स्ट्रेस हैंडलिंग ट्रेनिंग और क्वेश्चन आस्किंग ट्रेनिंग—जो उनके बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) के अंतर्गत हैं, को राष्ट्रीय मंच पर सराहा गया। विशेषज्ञों ने इन्हें बच्चों की रचनात्मकता, बौद्धिक क्षमता और मानसिक संतुलन को मजबूत करने वाला बताया।

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