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आखिर किसके इशारे पर खोड़ के रोज गार्डन और कैलाश गिरि स्कूलों के परीक्षा केन्द्र फिर बना दिए खोड़ में...?

-बोर्ड परीक्षा में डीईओ और परीक्षा प्रभारी की भूमिका पर सवाल, प्रशासनिक अधिकारियों को भी रखा अंधेरे में, जनप्रतिनिधियों से लेकर भोपाल तक पहुंची शिकायत


केदार करामाती शिवपुरी। शिवपुरी जिले में बोर्ड परीक्षाओं को लेकर कई खुलासे सामने आ रहे हैं और इन परीक्षाओं के लिए केन्द्र गठन से लेकर केन्द्राध्यक्ष व सहायक केन्द्राध्यक्ष बनाने वाले शिक्षा विभाग के डीईओ तथा परीक्षा प्रभारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामान्यजन से लेकर शिक्षा विभाग के जानकार इस बार की बोर्ड परीक्षा में मंडल के नियमों की अव्हेलना करने और सांठगांठ से केन्द्र व सीएस बनाने की चर्चाएं आरोपों के साथ कह रहे हैं। सबसे बड़ा मामला जिले में नकल माफिया  का किला माना जाने वाला खोड़ को लेकर है। बताया जाता है कि पिछोर के पूर्व एसडीएम समाधिया व एसडीओपी ने यहां के संत कैलाशगिरि व रोज गार्डन स्कूल के खोड़ में ही केन्द्र बनाने और नकल को लेकर बड़ी कार्यवाही करने सहित रिपोर्ट भेजी थी जिस पर पिछले साल इन दोनों स्कूलों के केन्द्र खोड़ से हटाकर पिछोर में बनाए गए थे लेकिन इस बार फिर से इन स्कूलों का केन्द्र खोड़ में ही बना दिया गया है जो शिक्षा अधिकारी और परीक्षा प्रभारी पर सवाल खड़े कर रहा है। सूत्रों का यह भी कहना है कि इन दोनों स्कूलों के केन्द्र कलेक्टर की सिफारिश पर हटाए गए थे फिर भी इन्हें पुन: खोड़ में ही बना देना अपने आप में सांठगांठ को दर्शा रहा है। 

ब्लैक लिस्टेड फिर बना दिए केन्द्राध्यक्ष

पिछली परीक्षाओं के दौरान कुछ केन्द्राध्यक्षों को केन्द्रों पर गड़बड़ी के कारण परीक्षा के दौरान ही हटाया गया था और बोर्ड नियमों के अनुसार ऐसे केन्द्राध्यक्ष ब्लैक लिस्टेड हो जाते हैं, लेकिन फिर भी इस बार ऐसे ही कई ब्लैक लिस्टेड केन्द्राध्यक्षों को फिर से महत्वपूर्ण केन्द्रों की जिम्मेदारी सौंप दी गई। शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विभाग के कई सीनियर प्राचार्य व लेक्चरर को इस बार केन्द्राध्यक्ष बनाया ही नहीं गया जो ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं। उन्हें परीक्षा से दूर रखना भी विभाग के इन अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। कई महिला शिक्षिकाओं को दूर-दराज के केन्द्रों पर भेजा गया है। जबकि कई उन अधिकारियों के नजदीकियों को केन्द्राध्यक्ष बनाए जाने की बजाय परीक्षा से जुड़े अन्य कार्यों में लगा दिया गया है। 

10 साल से उत्कृष्ट विद्यालय का केन्द्र No-2 स्कूल क्यों...?
शिक्षा अधिकारी और उनके अधीनस्थों का परीक्षा में बोर्ड के नियमों को अनदेखा कर मनमानी का एक और खेल भी सामने आया है। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी पिछले 10 साल से उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य हैं और बताया जाता है कि शिक्षा मंडल की निर्धारित प्रक्रिया के विरूद्ध उनके स्कूल का परीक्षा केन्द्र उसी के नजदीक स्थित नंबर 2 स्कूल को बनाया जाता है। इस बार भी इस स्कूल का केन्द्र वहीं है जिस पर न तो बोर्ड और न ही जिले के अधिकारी ध्यान दे रहे हैं। चर्चा है कि नंबर 2 को केन्द्र बनाने के पीछे उत्कृष्ट विद्यालय का रिजल्ट किसी भी हाल में अच्छा बनाने का है। खबर यह आ रही है कि शिक्षा विभाग में बोर्ड परीक्षा में हुई इन धांधलियों को लेकर कुछ जागरुक लोगों ने शिकायत क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों सहित भोपाल तक कर दी है।  

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