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कार्ययोजना कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उस पर कारगर कार्य हो: डीईओ



-ग्रामीण में 40 तो शहरी क्षेत्र में 60 फीसदी से कम रिजल्ट वाले स्कूलों के प्राचार्यों की कार्यशाला में अधिकारियों ने दिए टिप्स, की समीक्षा
शिवपुरी। पिछले शैक्षणिक सत्र में जिले के ग्रामीण क्षेत्र में 40 फीसदी व शहरी क्षेत्र में 60 फीसदी से कम रिजल्ट वाले स्कूलों पर फोकस कर शिक्षा विभाग मिशन संभव के तहत लगातार इस बार परिणाम बेहतर लाने की कवायद में जुटा है। इसी क्रम में ऐसे चिन्हित स्कूलों के प्राचार्यों की एकदिवसीय कार्यशाला विकासखण्डवार गुरूवार से शुरू हुई। सुबह की पाली में शहर के फिजीकल कॉलेज में शिवपुरी व पोहरी विकासखण्ड के 44 स्कूलों व दोपहर 2 बजे से कोलारस के मॉडल स्कूल में कोलारस व बदरवास विकासखण्ड के 24 स्कूलों के प्राचार्यों की कार्यशाला आयोजित की गई। खुद जिला शिक्षा अधिकारी समर सिंह राठौड़ ने प्राचार्यों से वन-टू-वन चर्चा की और पूछा कि जून माह में सत्र शुरू होने के बाद अब तक तीन महीनों में परिणाम सुधार के लिए उनके द्वारा क्या प्रयास किए गए..? जबाव में कुछ प्राचार्यों ने कार्ययोजना बनाकर प्रयास की बात कही तो डीईओ ने दो टूक शब्दों में हिदायत दी कि कार्ययोजना सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उस पर कारगर कार्य भी हो जो आगामी हाईस्कूल परीक्षा के बाद बेहतर परिणाम के रूप में सामने आए। इस दौरान डीईओ के अलावा शिवपुरी बीईओ मनोज निगम, आरएमएसए के एडीपीसी राजाबाबू आर्य, एपीसी सुनील चौरसिया, सहायक सांख्यिकी अधिकारी वत्सराज सिंह राठौड़, प्राचार्य एनके जैन, अर्चना शर्मा, सुदर्शन गुप्ता, अनूप सिंह परिहार भी मौजूद रहे । 
कमजोर छात्रों की लगाएं निदानात्मक कक्षाएं
परीक्षा परिणाम को लेकर विभाग ने 10 बिंदुओं पर आधारित टिप्स भी खराब परिणाम वाले प्राचार्यों को दी। डीईओ ने कहा कि 10 वी कक्षा के विद्यार्थियों के मासिक टेस्ट के परिणाम के आधार पर कमजोर छात्रों को चिन्हित कर विषयवार रजिस्टर विषय शिक्षक बनाएं एवं उनके लिए उस विषय की तैयारी हेतु निदानात्मक कक्षाएं लगाई जाएं। नियमित व शत् प्रतिशत उपस्थिति के लिए संपूर्ण स्टाफ को विद्यार्थियों की अलग-अलग व्यक्तिगत जिम्मेदारी सौंपकर मॉनीटरिंग की जाए और अभिभावकों से भी दूरभाष पर संपर्क कर पूरे प्रयासों को रजिस्टर में अंकित किया जाए। प्राचार्य का दायित्व होगा कि वे प्रतिदिन की शिक्षक डायरी का अवलोकन कर हस्ताक्षर करें और यह भी देखें कि उसके अनुसार अध्यापन कराया जा रहा है या नहीं।
अवकाश पर शिक्षक तो करें वैकल्पिक व्यवस्था
कार्यशाला में यह भी निर्देश दिए गए कि समय सारणी अनुसार विषय शिक्षक कक्षा में पहुंचे। यदि किसी दिन कोई शिक्षक अवकाश पर हो किसी वरिष्ठ शिक्षक को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर उस शिक्षक की कक्षा में भेजें। विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से विषय सामग्री ब्लैकबोर्ड पर समझाकर नोट करवाई जाए और प्राचार्य मॉनीटरिंग करें कि विद्यार्थियों को दिए गए गृहकार्य शिक्षक चैक कर रहे हैं या नहीं। 
कुर्सी पर बैठकर न पढ़ाएं शिक्षक
डीईओ ने प्राचार्यों से इस बात को लेकर विशेष ध्यान रखने की हिदायत दी है कि शिक्षक कक्षा में अध्यापन कार्य कुर्सी पर बैठकर न कराएं इसकी मॉनीटरिंग करें। अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों को विषय की कठिन अवधारणाओं को समझाने में आने वाले कठिनाईयों को दूर करने के लिए रोचकर प्रस्तुतिकरण से संबंधित कार्ययोजना बनाई जाए, साथ ही सर्वाधिक उपस्थिति वाले व नियमित गृहकार्य करने वाले तथा मासिक टेस्ट में प्रथम आने वाले विद्यार्थियों को प्रार्थना सभा के दौरान पुरुस्कृत किया जाए। भोपाल स्तर से उपलब्ध कराए गए मासिक विषयवार अभ्यास प्रश्रों को ब्लैक बोर्ड पर हल कराया जाए।

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