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मनमाने नियमों की बाध्यता से डीपीसी ने करवा डाली काउंसलिंग, आपत्तियां उठीं तो करनी पड़ी स्थगित

-उच्च पद प्रभार व कार्यकाल पूरा होने वाले शिक्षकों को बिना आरएसके से मार्गदर्शन लिए कर दिया अपात्र

केदार सिंह गोलिया शिवपुरी। जिले के शिक्षा विभाग में इन दिनों खाता न बही, अधिकारी कर दे वो ही सही की तर्ज पर काम चल रहा है। अजीबोगरीब आदेश और अटैचमेंट एक के बाद एक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं, लेकिन बेलगाम अधिकारी थमने का नाम नहीं ले रहे। इसी क्रम में हाल ही शिवपुरी पदस्थ हुए डीपीसी दफेदार सिंह सिकरवार ने बुधवार को राज्य शिक्षा केन्द्र के निर्देशों से परे खुद और सलाहकारों की सोच से मनमाने नियम बनाकर सीएसी और बीएसी के रिक्त पदों पर काउंसलिंग आयोजित कर डाली। कलेक्टर प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद एडीएम दिनेशचंद्र शुक्ला के साथ काउंसलिंग टीम में शामिल डीईओ, डीपीसी व डाइट प्राचार्य ने भी इन नियमों के साथ ही काउंसलिंग शुरू भी कर दी, लेकिन कुछ देर बाद ही नियमों के चलते काउंसलिंग से बाहर होने वाले शिक्षकों ने विरोध और आपत्ति जताना शुरू किया और  मीडिया को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। मीडिया ने जब इन नियमों को लेकर सवाल किए तो कुछ नियमों पर अधिकारी ही उलझे नजर आए और बाद में इस काउंसलिंग को स्थगित कर दिया गया। अब आगे यह काउंसलिंग कब होगी इसे लेकर फिलहाल कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है। कुल मिलाकर जल्दबाजी और नियमों का परीक्षण किए बगैर डीपीसी और उनकी टीम ने काउंसलिंग आयोजित कर और बाद में उसे बैकफुट पर जाकर निरस्त करने का घटनाक्रम में पूरी कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है। 

सिर्फ सहमति देने पर उच्च पद वाले शिक्षक बाहर

बुधवार को काउंसलिंग के दौरान उच्च पद प्रभार की प्रक्रिया में सिर्फ सहमति देने वाले सैंकड़ों शिक्षकों को भी काउंसलिंग में न शामिल न करने का आदेश सवालों के घेरे में है। क्योंकि जिन शिक्षकों को महीनों बाद भी उच्च पद का प्रभार नहीं मिला है और डीएलएड व बीएड की मान्यता को लेकर भी पेच उच्च स्तर पर उलझा हुआ है। ऐसे में कई शिक्षकों का कहना था कि सिर्फ सहमति देने के आधार पर उन्हें काउंसलिंग से बाहर करना नियम विरूद्ध है और यह उनका स्वैच्छिक निर्णय है कि वे वहां ज्वाइन करेंगे या नहीं। किसी तरह मई 2024 में जिन सीएसी बीएसी का कार्यकाल पूरा हो चुका है उन्हें भी काउंसलिंग में शामिल करने से मना कर दिया गया जबकि इसी तरह के मामले में अन्य जिलो में पुन: काउंसलिंग में शामिल किया गया था। हैरानी की बात यह है कि इन प्रकरणों के संबंध में आरएसके से कोई मार्गदर्शक नहीं लिया गया और जल्दबाजी में काउंसलिंग आयोजित कर दी। जब अधिकारियों को लगा कि इन नियमों से वे न्यायालीय रट्टे में फंस सकते हैं हाल फिलहाल काउंसलिंग निरस्त कर दी।


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