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अनदेखी: बाल संरक्षण कर्मियों का 8 सालों से न वेतन बढ़ा और न राज्य की संविदा नीति का लाभ मिला


विभागीय उपेक्षा से नाराज प्रदेश का अमला सामूहिक अवकाश पर, बच्चों की आवश्यक सेवाएं होंगी प्रभावित

शिवपुरी। विभागीय उपेक्षा से नाराज प्रदेश के बाल संरक्षण अमले द्वारा 2 दिन के सामूहिक अवकाश के ज्ञापन सभी जिला मुख्यालयों पर दिया है। जिला एवं राज्य स्तर कार्यरत अधिकारी- कर्मचारी सोमवार एवं मंगलवार को समूहिक अवकाश पर रहेंगे। बाल संरक्षण कर्मचारी संघ के आव्हान पर आयोजित इस प्रदेश व्यापक सामूहिक अवकाश से अनाथ, बेसहारा एवं जरूरतमंद बच्चों को मिलने वाली सेवाएं प्रभावित होंगी। 

अनाथ, बेसहारा तथा उपेक्षित सामाजिक व्यवहार पीडि़त बच्चों को सुरक्षा और संरक्षण देने समेकित बाल संरक्षण योजना (अब मिशन वात्सल्य) में कार्यरत अधिकारी- कर्मचारी अपने ही विभाग की उपेक्षा का शिकार हो रहे है।योजना के क्रियान्वयन के लिए कार्यरत इन संविदा कर्मचारियों के वेतन में पिछले 8 सालों से कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। हद तो इस बात की है कि पिछले 8 सालों से केंद्र सरकार से वेतन न बढऩे का बहाना करने वाले विभाग प्रमुख केंद्र से बढ़ी हुई सैलरी भी नहीं दे रहे है। मिशन वात्सल्य मूल रूप से बच्चों के अधिकारों का संरक्षण करने के लिए बनाई गई व्यवस्था है, जिसकी निगरानी केंद्र और राज्य सरकार के अलावा उच्च न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा की जाती है। केंद्रीय और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी सुनिश्चित करते है, किंतु इतने लंबे समय में किसी संस्था ने इन कर्मचारियों के अधिकारों को सुरक्षित करने की पैरवी नहीं की।

केंद्र से बढ़ा वेतन राज्य में अटका

समेकित बाल संरक्षण योजना को पुनरीक्षित कर मिशन वात्सल्य किया गया है। इस बदलाव में कर्मचारियों के बेतन में आंशिक बढ़ोतरी हुई है। केंद्र सरकार मिशन कर्मचारियों को अप्रेल 22 से बढ़ी हुई सैलरी देने का प्रावधान किया है,किंतु राज्य द्वारा अब तक पुरानी सैलरी ही दी जा रही है। बाल संरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विभागीय उदाशीन रवैया से उपजे असंतोष को लेकर कर्मचारियों ने प्रदेश भर में 20 एवं 21 मार्च को समूहिक अवकाश का ज्ञापन दिया है। जिसमें लिखा है मांगे पूरी नहीं हुई तो अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले जायेंगे।

असंतोष के कारण

संघ के प्रदेशाध्यक्ष कुश मिश्रा ने बताया कि 2014 से न तो वेतन बढ़ाया है न जून 2018 में बनी संविदा नीति के मुताविक समकक्ष नियमित पदों के वेतन का 90 प्रतिशत वेतन का लाभ मिला है। शासन से अगस्त 22 में आदेश होने के बाद भी एनपीएस का लाभ नहीं दिया जा रहा। जहां सरकार अनाथ- बेसहारा बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद, मुख्यमंत्री कोविड बाल सेवा, स्पॉन्सरशिप जैसी योजनाएं एवं चाइल्ड बजट जैसे नवाचारी प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी सच्चाई यह है कि इन योजनाओं को क्रियान्वित करने वाले कर्मचारियों के वेतन में 8 साल से से कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। जिससे नाराज अधिकारी-  कर्मचारियों ने मांगे पूरी नहीं होने तक जरूरतमंद बच्चों को मिलने वाली सेवाएं ठप करने का निर्णय लिया है। 

- यह सेवाएं होंगी प्रभावित

मिशन कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश से विधि विवादित, निराश्रित, बेसहारा, गुमशुदा, भीख मांगने वाले, सड़क पर निवास करने वाले, सड़क पर कचरा बीनने वाले तथा देखरेख एवं संरक्षण के जरूरतमंद बच्चों को मिलने वाली सुविधाएं, फोस्टर केयर, स्पॉन्सरशिप, मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना, मुख्यमंत्री कोविड बाल सेवा, दत्तक ग्रहण, बाल विवाह रोकथाम जैसी अनेक योजनाएं प्रभावित होंगी। 

बाल संरक्षण अधिकारी- कर्मचारी कल्याण संघ के प्रदेश सचिव दिनेश लोहिया ने बताया कि वीते 8 सालों में महंगाई तो बढ़ी, किंतु कर्मचारियों के वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। आज भी जिला स्तर पर कार्यरत बाल संरक्षण के कर्मचारी 8 हजार और 14 हजार रुपये की सैलरी पर काम करने को मजबूर है। जरूरतमंद बच्चों को विकास के अवसर मुहैया कराने वाले मिशन के कर्मिक अपने बच्चों को विकास की मुख्यधारा में नहीं जोड़ पा रहे है। बेसहारा बच्चों की सेवाएं प्रभावित न हों इसलिए प्रदेश में 2 दिन के सामुहिक अवकाश का निर्णय लिया है अगर मांगो का निराकरण नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जायेंगे।


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