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उत्साहवर्धन का माध्यम है घोष वादन की विधा - माहेश्वरी


शिवपुरी - घोष वादन की विधा उत्साहवर्धन का माध्यम है जिससे न केवल सैनिकों का अपितु जनसामान्य में भी उत्साह का संचार होता है यह सैनिक शिक्षा का एक भाग है जो संघ में घोष के नाम से एवं सेना में बैंड के नाम जानी जाती है इस विधा के विद्यार्थी अन्य से अलग होते हैं इससे अनुशासन भी विकसित होता है जो जीवन का अतिआवश्यक अंग है।

हमारी संस्कृति में हमारे देवताओं के हाथों में भी वाद्ययंत्र रहते हैं जो संगीत कला प्रेम को दर्शाते हैं यह बात श्री निखिलेश माहेश्वरी संगठन मंत्री विद्याभारती मध्यभारत प्रान्त ने मुख्य अतिथि की आसन्दी से सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय में आयोजित विभाग स्तरीय तीन दिवसीय घोष वर्ग के उद्घाटन समारोह में सदन को सम्बोधित करते हुए कही।

इस अवसर पर श्री गुरुचरण गौड़ विभाग समन्वयक शिवपुरी विभाग, श्री सतीश जी अग्रवाल मध्यभारत प्रांत घोष प्रमुख, श्री पवन शर्मा प्रबंधक सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय, श्री उमाशंकर भार्गव प्राचार्य सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय रहे ।

विभाग स्तरीय तीन दिवसीय घोष वर्ग का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया । अतिथियों का परिचय एवं स्वागत हरपाल सिंह सोलंकी एवं कमल किशोर कोली द्वारा तिलक लगाकर एवं श्रीफल भेंट कर किया गया । इस वर्ग में विद्या भारती के शिवपुरी विभाग के अंतर्गत शिवपुरी, श्योपुर, दतिया एवं अशोकनगर जिलों के सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालयों के घोषवादक मास्टर ट्रेनर्स, प्रशिक्षार्थी एवं संरक्षक आचार्य सम्मिलित हुए कार्यक्रम का संचालन जगदीश कुशवाह वर्ग के मुख्य शिक्षक द्वारा किया गया । उक्त जानकारी शिवपुरी विभाग के विभाग प्रचार प्रमुख अरविन्द सविता द्वारा प्रदान की गई ।


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