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"नीली क्रांति सफल" देश में मत्स्य उत्पादन के निर्यात से मिले 50 हजार करोड़ -राजू बाथम

शिवपुरी-  भारतीय जनता पार्टी शिवपुरी के जिलाध्यक्ष राजू बाथम के द्वारा देशभर में मत्स्य पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि की जानकारी देते हुए बताया कि माननीय प्रधानमंत्री जी श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार गरीब मछुआरा वर्ग की प्रगति व रोजगार की दिशा में सदैव चिंतित रही है और इस समुदाय के विकास व रोजगार की बढ़ोतरी हो सके इस हेतु  उन्होंने पृथक से मत्स्य मंत्रालय देश में बनाया । देशभर के मछुआरों के लिए यह एक उल्लेखनीय पहल भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने की है बाथम ने बताया  कि यह उल्लेखनीय कार्य आजादी के बाद बनी किसी भी सरकार ने नहीं किया । मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के पूर्व मत्स्य आखेट व व्यापार संबंधी कार्यों व देखरेख कृषि मंत्रालय में ही समाहित था और देश का कृषि मंत्री ही मत्स्य उत्पादन, आखेटन, मत्स्य निर्यात संबंधी लेखा-जोखा रखते थे । हम समझ सकते हैं कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है और कृषि मंत्रालय अपने आप में विशालकाय मंत्रालय है, तो फिर मत्स्य व्यापार व मछुआरों का हित संवर्धन कैसे संभव होता होगा। मछुआरों का दर्द, उनकी गरीबी और विकास के लिए सदैव चिंतित रहने वाले मोदी जी ने  मछुआरा समुदाय पर ध्यान दिया।  इसीलिए उन्होंने निर्णय लेकर कृषि मंत्रालय से पृथक करके मछुआरों के कल्याण हेतु और मत्स्य आखेट मैं वृद्धि हो सके, मत्स्य निर्यात से विदेशी मुद्रा अधिक प्राप्त हो सके, इसके लिए पृथक से मत्स्य मंत्रालय बनाया और इस मंत्रालय के पहले मंत्री माननीय श्री गिरिराज किशोर को बनाया गया है। इससे इंगित होता है कि माननीय मोदी जी गरीब, बेरोजगार दलित व पीड़ित मछुआरों के वास्तविक हितैषी ही नहीं,  बल्कि ऐसे वर्गों के उत्थान और उनके विकास के लिए सदैव अथक परिश्रम करते रहते हैं । ऐसे वर्गों के विकास की गति कैसे बढे इसके लिए नये-नए आयाम सदैव खोजते हैं । ऐसे ही कार्य उन्हें देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों से और नेताओं से अलग उत्कृष्टता प्रदान करते हैं । इतना ही नहीं उन्होंने देश में पृथक से मत्स्य आयोग बनाए जाने की घोषणा भी की है, जो प्रक्रियाधीन है ।आयोग बनने से मछुआरों के विकास व उत्थान के साथ- साथ मत्स्य व्यापार से विदेशी मुद्रा भारत देश को अधिक मिले इसकी भी चिंता वह कर रहे हैं ।मत्स्य आयोग पर जो जिम्मेवारी रहेगी, उसमें प्रमुख रूप से मत्स्य उत्पादन, मत्स्य आखेट, के साथ-साथ मछुआरा वर्ग की मौलिक मांगो व समस्याओं के निदान, मछुआरों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व मत्स्य उत्पादन में आधुनिक तकनीक के उपयोग के नए-नए तरीके भी सुझाए जाएंगे ।इसीप्रकार राज्यों के भीतर भी मछुआरा समुदाय का विकास व उत्थान शीघ्रतम हो सके, इसके दिशानिर्देश भी जारी हो सकेंगे । मछुआरों के लिए उन्नत तकनीक के उपयोग से उनके विकास व उत्पादन और उनकी आय में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।
      नीली क्रांति के अंतर्गत माननीय मोदी जी के कार्यकाल में मत्स्य उत्पादन और व्यापार को रेखांकित किया जाए, तो वर्ष 2013-14 में देश में मत्स्य उत्पादन 95. 79 लाख टन था जो 2018- 19 में बढ़कर 134. 2 लाख टन हो गया। इन 5 वर्षों में 40% मत्स्य उत्पादन की वृद्धि हुई है । हमारा देश मत्स्य उत्पादन में पूरी दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। इसीप्रकार कोस्टल एरिया से मत्स्य निर्यात में 50% की वृद्धि मोदी जी के कार्यकाल के इन 5 वर्षों में हुई है। वर्ष 2013 -14 मैं जहां 30 . 21 हजार करोड़ रुपए का मत्स्य निर्यात था, जो 2018 -19 में बढ़कर 46.59 हजार करोड़ का मत्स्य निर्यात में वृद्धि हुई है। इससे स्पष्ट होता है कि अधिक उत्पादन से मछुआरों की आय में भी वृद्धि हुई है और उनके संसाधनों और सुविधाओं में भी मोदी जी के कार्यकाल में उल्लेखनीय वृद्धि रेखांकित है।
     जिलाध्यक्ष बाथम ने बताया कि देश के संपूर्ण मछुआरा वर्ग में मछुआरों के लिए मोदी जी के द्वारा पृथक मंत्रालय बनाए जाने से अत्यंत प्रसन्नता है व हर्ष व्याप्त है अब मछुआरों की मौलिक समस्याओं के निदान में विलंब नहीं होगा और उनके शिक्षा स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का भी निदान हो सकेगा, उनके जीवन स्तर में भी वृद्धि होगी ।भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा मछुआरों के उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों से यह समुदाय मोदी जी और भाजपा सरकार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है।

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