शिवपुरी। न्यायालय सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश शिवपुरी की अदालत ने चैक बाउंस के मामले में नगर की प्रतिष्ठित फर्म निगोती ब्रदर्स के मालिक को एक वर्ष की जेल व जुर्माना की सजा सुनाने के साथ 35 लाख 40 हजार रूपया प्रतिकर अधिरोपित करने का आदेश सुनाया। जिसके पालन में आरोपी को शिवपुरी जेल भेजा गया। अधिवक्ता हाईकोर्ट विजयदत्त शर्मा एवं अधिवक्ता अनिल सक्सैना ने पैरवी की।
अभियोजन के अनुसार शहर के व्यापारी जयप्रकाश चौधरी ने वर्ष 2012 को हनुमानगली स्थित मेसर्स निगोती ब्रदर्स के मालिक रामकृष्ण निगोती को शक्कर व तेल का विक्रय किया था। इसके बदले चौधरी को निगोती से 23लाख 34 हजार 553 रूपया का भुगतान लेना था। भुगतान के बदले निगौती ने चौधरी को एक चेक दिया जो कि बाउंस हो गया। इसकी सूचना जयप्रकाश चौधरी ने विधिवत रूप से ब्यापारी निगौती को दी थी। लेकिन उन्होंने इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया। बाद में मामला कोर्ट में चला गया जहां पर न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अभिषेक सक्सैना ने मामले की सुनवाई करते हुये ब्यापारिक फर्म निगेाती ब्रदर्स को दोषी मानते हुये चेक की राशि 23 लाख 34 हजार 553 व उस अवधि का ब्याज 9 प्रतिशत की दर से 1153107 रूपये व प्रकरण व्यय 32340 रूपये मिलाकर 35 लाख 40 हजार रूपये प्रतिकर देने व एक साल के काराबास की सजा सुनाई। इसके उपरान्त भी निगौती ब्रदर्स के मालिक राशि देने को तैयार नहीं हुये और उन्हेांने न्यायालय के आदेश के विरूद्ध सप्तम अपर सत्र न्यायालय में अपील दायर की। जिस पर से पुन: माननीय सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने निगौती की अपील को निरस्त करते हुये पूर्व में पारित सजा को कायम रखा और अपीलार्थी / अभियुक्त को धारा 138 परकाम्य लिखित अधिनियम के अंतर्गत 01 वर्ष के सश्रम कारावास और द0प्र0सं0की धारा 357(3)के अंतर्गत 35 लाख 40 हजार रूपया प्रतिकर अधिरोपित कर दण्डित करने का आदेश पारित किया साथ ही प्रतिकर की राशि अदा ना करने पर अभियुक्त को 06 माह का सश्रम कारावास प्रथक से भुगताये जाने का आदेश दिया। पालन में निगौती ब्रदर्स के मालिक को तुरंत ही शिवपुरी जेल भेजा गया। वर्तमान में आरोपी जेल में हैं। बताया यह भी जाता है कि आरोपी निगौती ब्रदर्स के मालिक एवं जयप्रकाश चौधरी आपस में रिश्तेदार हैं। इसके बाबजूद भी चौधरी की रकम को वापस ना करना व चेक बाउंस होना आखिर में निगोती ब्रदर्स पर भारी पडा और उन्हें न्यायालय के आदेश के तहत दण्ड पारित कर शिवपुरी जेल जाना पडा।







