कोलारस। शादी की फिजूलखर्ची से बचने के लिए ही सामूहिक सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है सामूहिक विवाह सम्मेलन का होना जागृत समाज की पहचान है हमें बहू को बहू नहीं बेटी बनाकर कर ले जाना चाहिए जिससे समाज में बहू को सम्मान और अधिक मिल सके बहू भी किसी की बेटी होती है और बेटी भी बहू के समान होती है यह बात जाटव समाज सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ भगवान लाल सोलंकी द्वारा मंच से कहीं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हम बेटी को 18 वर्ष तक पढ़ाते हैं उसका पालन-पोषण करते हैं उसी प्रकार हम बहू को भी शिक्षा प्रदान करते हैं इस सामूहिक विवाह सम्मेलन में 4 जोड़ों के साथ वर एवं वधु का नव दंपति जीवन का रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न किया और इस जाटव समाज के सामूहिक सम्मेलन में अध्यक्षडॉ भगवान लाल सोलंकी ने बताया है कि कार्यक्रम में उपाध्यक्ष मोनू सगर, राकेश मोहनिया कोषाध्यक्ष, मंच संचालक सोमनाथ शर्मा (दाऊ) उमेद सगर ,पवन गोयल, मनीष मोहनिया, काजी शकील अहमद ,कार्य कर्ता गण और समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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