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15 चुनावों में पहली बार सिंधिया परिवार को हार का सामना करना पड़ा

शिवपुरी -गुना। सिंधिया राजघराने का गढ़ माने जाने वाली मध्य प्रदेश की गुना-शिवपुरी संसदीय सीट पर 15 चुनावों में पहली बार सिंधिया परिवार को हार का सामना करना पड़ा है। यहां 'महाराज" के नाम से विख्यात कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया पर उनके ही पुराने 'दरबारी' भाजपा प्रत्याशी डॉ. केपी यादव भारी पड़ गए। यादव ने सिंधिया पर सवा लाख से अधिक मतों की निर्णायक बढ़त बना ली थी।

मालूम हो, इस सीट पर सिंधिया राजपरिवार की तीन पीढ़ियां लोकसभा चुनाव जीतती आ रही थीं। इसकी शुरुआत राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने की थी। यह सिलसिला उनके बेटे माधवराव सिंधिया और फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिछले चुनाव तक कायम रखा था। ज्योतिरादित्य के सामने भाजपा के कद्दावर नेता पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, जयभान सिंह पवैया तक चुनाव हार चुके थे।

इस लिहाज से माना जा रहा था कि इस बार भी सिंधिया की ही जीत होगी। उनके सामने जब भाजपा ने उनके ही पुराने सिपहसालार डॉ. केपी यादव को उतारा तो राजनीतिक पंडितों ने यादव को कमजोर प्रत्याशी मानकर सिंधिया का जीतना तय मान लिया था, लेकिन मोदी फैक्टर के कारण सिंधिया हार गए। 

दो साल पहले आए थे भाजपा में
डॉ. केपी यादव का परिवार शुरू से ही कांग्रेस खासकर सिंधिया परिवार के प्रति समर्पित रहा है। खुद यादव भी ज्योतिरादित्य के सांसद प्रतिनिधि रहे थे। करीब दो साल पहले मुंगावली विधानसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान वे कांग्रेस से टिकट मांग रहे थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर भाजपा में शामिल हो गए थे। इसका लाभ उन्हें लोकसभा चुनाव में मिला। जब भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया। 

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