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प्रत्येक व्यक्ति अधूरा है, यह अधूरापन मित्रों की आत्मीयता से भरता है: मोहिते

  • साहित्यकारों ने मनाया अशोक मोहिते का जन्मदिवस मनाया

केदार सिंह गोलिया, शिवपुरी। संसार में प्रत्येक व्यक्ति अधूरा है। अपने अधूरेपन को पूरा करने के लिये व्यक्ति काम, धन अथवा ज्ञान का सहारा लेता है। मित्रों की आत्मीयता और स्नेह ही इस अधूरेपन को पूरा करता है। उपरोक्त विचार नगर के वरिष्ठ साहित्यकार, संगीतकार और छत्री अधिकारी अषोक मोहिते का 66 वां जन्मदिवस के अवसर पर व्यक्त किये। श्री मोहिते का जन्म दिवस धूमधाम से मनाने छत्री परिसर में स्थित उनके निवास पर नगर के तमाम साहित्यकार उपस्थित हुये थे। इस आयोजन की अध्यक्षता डॉ.लखनलाल खरे ने की और मुख्यअतिथि के रूप में इंजीनियर अवधेष कुमार सकसेना उपस्थित हुये। अन्य रचना कारों में अरुण अपेक्षित, दिनेश वशिष्ठ, इषरत ग्वालियरी, डॉ.महेन्द्र अग्रवाल, विनय प्रकाष नीरव, रामपंडित, आदित्य षिवपुरी, याकूब साबिर, आषुतोष षर्मा, शकील नस्तर, सत्तार षिवपुरी, राकेश कुमार सिंह राकेष, राजकुमार सिंह चौहान, विजय भार्गव, डॉ.मुकेश अनुरागी, रामकृष्ण मोर्य मयंक, उपस्थित हुये। संचालन दिनेश वशिष्ठ ने किया।
कार्यक्रम का आयोजन अशोक मोहिते के मधुर वांसुरी वादन से हुआ। सभी उपस्थित रचनाकारों ने अशोक मोहिते का पुष्पहारों से स्वागत किया और इसके बाद उनके व्यक्तित्व तथा विस्तृत कलात्माक तथा साहित्यिक कृतित्व पर चर्चा हुई। चर्चा का प्रारम्भ करते हुये अरुण अपेक्षित ने उन्हें बहु-आयामी व्यक्तित्व का धनी बताया। एक श्रेष्ठ संगीतज्ञ, विचारक, इतिहासकार, साहित्यकार और पर्यावरणविद निरूपित किया। उनकी सतत सक्रियता और उनकी लगनषीलता उनके व्यक्तित्व का उजला पक्ष हैं। दिनेष वषिष्ठ ने उन्हें एक अच्छा प्रबंधक बताया और पावस गोष्ठी में उनके सक्रिय योगदान का उल्लेख किया। डॉ.महेन्द्र अग्रवाल ने उनके व्यक्तित्व के अत्मीय पक्ष का उल्लेख किया। उनका स्नेह और मार्गदर्शन हमेशा उनके अनुजों को मिलता रहा है। आशुतोष शर्मा आषु ने उन्हें ज्ञान और विज्ञान का भंडार कहा। उन्होंने भारतीय दर्षन से जुड़े महानयकों की जिस तरह से व्याख्या की है वह उनके सोच के मौलिक पक्ष का प्रतीक है। राजकुमार चौहार ने कहा कि वे साहित्य के अलावा संगीत के सभी पक्षों का आधिकारिक ज्ञान रखते हैं। याकूब साबिर ने कहा कि वे समानता और सद्भाव के प्रतीक हैं। सबके प्रति समभाव उनके चरित्र की प्रमुख विषेषता है। आदित्य षिवपुरी ने उनके व्यक्तित्व में समाहित गुणों का उल्लेख करते हुये कहा- 
न ही शमषीर न हाथ में पत्थर रखिये,
अपने सीने में मोहब्बत का समन्दर रखिये।
रामपंडित ने कहा कि उनके व्यक्तित्व के सबसे बड़े गुण उनके नाम में ही है-वे अषोक अर्थाथ शोक का हरण बरने वाले तथा सबको मोहित करने वाले हैं। सभी को मोहित करने के लिये उनमें अनेक कलात्मक गुण हैं।
इशरत ग्वालियरी ने मोहितेजी को अपने दिल कि दुआयें कुछ इस तरह दी-
जाने अता, जाने चमन, 
तुझको रह रह कर दुआ देती है दिल की धड़कन।
हो मुबारक तुम्हें ये जष्न चिरांगा हमदम, 
बज्म की रौनके हर शाम रहें रौशन।
विजय भार्गव ने कहा कि जिस व्यक्ति में प्रत्येक चीज के प्रति जिज्ञासा और जिजीवषा होती है, वही अशोक मोहिते बन पाता है। मुख्य-अतिथि इं.अवधेश सक्सेना ने उनसे हुई उनकी अत्मीय भेंटों का स्मरण करते हुये-उन्हें ज्ञान का भंडार बताया। अंत में अध्यक्षता कर रहे डॉ.लखनलाल खरे ने कहा- जैसा कि सबने बताया कि अषोक मोहिते एक साहित्यकार है, संगीतकार हैं, इतिहासकार हैं, परयावरणविद हैं-मगर इन सबसे बढ़ कर एक अच्छे इंसान है। उन्होंने उनकी विश्लेषात्मक बुद्धि और सुक्ष्म निरीक्षण कर व्याख्या करने की क्षमता की प्रषंसा की। सबसे अंत में केक काटा गया और इस तरह अषोक मोहिते का 66 वां जन्मोत्सव अपनी पूर्णता तक पहुंचा। एक बार पुन: युवा कवि आशुतोष शर्मा आर्य को प्रत्येक रचनाकार के निवास पर पहुंचकर जन्मोत्सव मनाने की इस नवीन परम्परा के लिये उनकी भूरि भूरि प्रशंसा की गई। धन्यवाद दिनेश वशिष्ठ ने ज्ञापित किया।

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