11 अगस्त से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी, 2800 ग्रेड पे और अतिरिक्त केंद्र भत्ता बढ़ाने की भी मांग
शिवपुरी। मध्यप्रदेश कृषि विस्तार अधिकारी संघ जिला इकाई शिवपुरी ने कृषि विस्तार अधिकारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर शासन के समक्ष ज्ञापन प्रस्तुत किया है। संघ ने मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं होने पर 11 अगस्त 2026 से प्रदेश के समस्त कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा अनिश्चितकालीन कलमबंद कार्य बहिष्कार किए जाने की चेतावनी दी है।
संघ के जिला अध्यक्ष संदीप कुमार रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि कृषि विस्तार अधिकारियों का अधिकांश कार्य मैदानी एवं भ्रमण आधारित है। अधिकारी किसानों के खेतों, ग्रामों तथा विभिन्न शासकीय गतिविधियों में रहकर कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन और किसानों की समस्याओं के निराकरण का कार्य करते हैं। ऐसे में ईएचआरएमएस प्रणाली के माध्यम से ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता से अधिकारियों को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
संघ ने मांग की है कि कृषि विस्तार अधिकारियों के लिए ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त कर पूर्व व्यवस्था के अनुसार उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था लागू की जाए। ज्ञापन में ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ महिला कृषि विस्तार अधिकारियों की सुरक्षा सहित मूलभूत सुविधाओं की कमी का भी उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा संघ ने कृषि विस्तार अधिकारी संवर्ग को वर्तमान 2400 ग्रेड पे के स्थान पर 2800 ग्रेड पे प्रदान करने की मांग की है। वहीं अतिरिक्त केंद्रों का दायित्व संभालने वाले अधिकारियों को मिलने वाले अतिरिक्त केंद्र भत्ते को वर्तमान 500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग भी रखी गई है।
संदीप कुमार रावत ने बताया कि संगठन द्वारा 3 अगस्त 2026 से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया गया है तथा संदर्भित पत्रों के माध्यम से शासन एवं विभाग को मांगों से अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक मांगों पर कोई ठोस सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि शासन एवं विभाग द्वारा शीघ्र कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो कृषि विस्तार अधिकारी 11 अगस्त को संबंधित मंत्री के समक्ष उपस्थित होकर अपनी मांगों के निराकरण की मांग करेंगे। इसके साथ ही 11 अगस्त से प्रदेश के सभी कृषि विस्तार अधिकारी अनिश्चितकालीन कलमबंद कार्य बहिष्कार पर रहेंगे। संघ ने कहा है कि इससे किसान कल्याण वर्ष 2026 के निर्धारित लक्ष्यों में उत्पन्न होने वाले व्यवधान की जवाबदेही शासन-प्रशासन की होगी।







