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इस सत्र से मध्य प्रदेश के विद्यार्थी भी ले सकेंगे विश्वरूप ओलंपियाड में हिस्सा

भारत के संविधान के भाग 3 को मूल अधिकारों के लिए जाना जाता है नागरिक को अपने जीवन में विकास करने के लिए सरकारों के द्वारा कुछ अधिकार दिए गए उन्हें मूल अधिकार के नाम से जाना जाता है और इस भाग पर भगवान राम का लंका विजय होने के बाद वाला फोटो दर्शाया गया है त्रेता युग में भगवान राम को मानव अधिकारों के संरक्षक के रूप में जाना जाता है उन्होंने हमेशा सबके अधिकारों को इस भाव से संरक्षित किया कि वह अपने जीवन में अपना संपूर्ण विकास कर सके भगवान राम से परिणाम लेकर हर नागरिक इस देश के विकास के साथ-साथ अपने परिवार और समाज का कल्याण करते हुए और एक दूसरे के अधिकार और कर्तव्यों का संरक्षण करते हुए आगे बढ़े इस भाव से यह फोटो लगाया गया है। 

विश्वरूप ओलंपियाड के माध्यम से जानेंगे भारतीय संविधान के आवश्यक ज्ञान के साथ उसमे छपे हुए चित्रों में निहित मानव मूल्य और भारतीय संस्कृति पर आधारित महाग्रंथ को  

शिवपुरी। भारतीय संविधान पर आधारित विश्व रूप ओलंपियाड में इस सत्र से मध्य प्रदेश के विद्यार्थीयों को भी भाग लेने का मौका मिलेगा। मध्य प्रदेश के जो इच्छुक स्कूल या विद्यार्थी हैं वे अपना पंजीकरण 30 सितंबर 2024 तक करवा सकेंगे। जिसका ज्ञान हर वर्ग को होना चाहिए। इसके बारे में बताते हुए विश्वरूप के डायरेक्टर मुकेश भारद्वाज ने कहा है कि हमारा संविधान दो हिस्सों में है एक हिस्सा वह है जिसे हम पढ़ते हैं और उसका दूसरा हिस्सा उस पर छपे हुए चित्र हैं। लेकिन समाज में उन चित्रों के ऊपर कोई चर्चा होती नहीं है। हमारा जो ओलंपियाड है यह पूरे तरीकों से उन चित्रों पर आधारित है। ये चित्र कहां से आए, उनका ऐतिहासिक महत्व क्या है, वह हमारे देश के नागरिकों को किस प्रकार के गुणों को धारण करने की प्रेरणा देते हैं।

हमारा मुख्य हेतु है भारत की प्राचीन संस्कृति, सभ्यता, ज्ञान, संस्कार और विचारों का भारत के बच्चे बच्चे को पता लगे। इस उद्देश्य से हमने इस ओलंपियाड की रचना की है। उन्होंने यह भी बताया कि मैथ्स, साइंस व अन्य विषयों के ओलिंपियाड भी होते हैं, वे बच्चे की विषय की समझ बढ़ाते हैं। हमारा ओलंपियाड विषय आधारित नहीं है बल्कि मानव मूल्य आधारित है। इस ओलंपियाड के माध्यम से हम सत्य, ईमानदारी, समर्पण, त्याग, देशभक्ति जैसे संस्कारों को बच्चों को बताना और अपने अंदर धारण करने के लिए  प्रेरित करने का प्रयास करते हैं। हम बच्चों को देश और समाज के साथ जोडऩे का प्रयास करते हैं। अब तक छह राज्य सरकारें इसे अधिग्रहित कर चुकीं हैं और अपने-अपने शिक्षा विभाग के माध्यम से अपने-अपने राज्यों में पढऩे वाले विद्यार्थियों को इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित कर चुकी हैं। इस ओलंपियाड में तीन चरण हैं । पहला चरण 26 नवंबर को होगा। हम 26 नवंबर संविधान दिवस के रूप में मनाते हैं। जब बच्चा बच्चा इसमें भाग लेगा उन्हें संविधान, संविधान में दिए मूल्य, इस देश की भावी पीढ़ी से हमारे संविधान निर्माता किस प्रकार का व्यवहार चाहते थे उनके बारे में ध्यान कराना है। दूसरा चरण 25 दिसंबर से 31 दिसंबर के बीच में होगा। 26 दिसंबर माननीय प्रधानमंत्री जी ने गुरु गोविंद सिंह जी के साहबजादों  की याद में शहीदी दिवस मनाने का फैसला किया है। इस देश के हर बच्चे बच्चे को इस देश के शहीदों के बारे में जानकारी होना, गुरु गोविंद सिंह जी के साहबजादों की शहीदी हर बच्चा जानें व उसे महसूस करें। इस देश में देश भक्ति का एक पर्यायवाची स्वामी विवेकानंद भी हैं अत: उनके जन्मदिन के अवसर पर 11 जनवरी को तीसरा चरण संपन्न होगा। सत्य, ईमानदारी, त्याग, समर्पण, देश भक्ति बच्चों में इन भावों को जगाने हेतु ऐतिहासिक दिनों को लिया गया है।  देश के संविधान निर्माता बाबासाहेब अंबेडकर के जन्म दिवस 14 अप्रैल को पुरस्कारों का वितरण किया जाएगा। देश में संविधान सर्वोपरि है। अत: संविधान दिवस को भी उसी तरह त्यौहार की तरह मनाया जाए जैसे हम बाकी त्यौहार मनाते है और संविधान में छपे चित्रों के आधार पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए।




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