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विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर ऑटिज्म फैमिली के साथ कार्यशाला आयोजित

  • ऑटिज्म पीड़ित बच्चो को विशेष देखरेख की जरूरत डॉक्टर अर्पित बंसल
  • भारत में ऑटिज्म पीड़ितों की संख्या 10 लाख- रवि गोयल 


शिवपुरी।  समाज में घुलने-मिलने से कतराते हैं ऑटिज्म पीड़ित बच्चे 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर  साएकाइटिस्ट डॉ. डॉक्टर अर्पित बंसल ने बताया कि शोर शराबे के शौकीन लोगों को चौकन्ना होने की जरूरत है क्योंकि अधिक हो-हल्ले के बीच रहने वालों के बच्चों में ऑटिज्म होने का खतरा दो गुना तक बढ़ सकता है। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। आज वर्ल्ड ऑटिज्म डे पर ऐसे परिवारों जिनमे ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे है के साथ वर्कशॉप का आयोजन शक्ति शाली महिला संगठन द्वारा मन कक्ष के साथ मिलकर डॉक्टर अर्पित बंसल एवम ऑटिज्म पर रिसर्च फेलो डाक्टर सम्भवि जैन के मुख्य आतिथ्य में शक्ति शाली महिला संगठन के बाण गंगा परिसर पर किया। प्रोग्राम में अधिक जानकारी देते हुए कार्यक्रम संयोजक रवि गोयल ने कहा की 

ऑटिज्म एक ऐसी समस्या है, जिससे ग्रस्त लोगों में व्यवहार से लेकर कई तरह की दिक्कतें होती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लोगों की स्थिति में सामाजिक स्वीकार्यता से सुधार लाया जा सकता है। ऑटिज्म के शुरुआती लक्षण 1-3 साल के बच्चों में नजर आ जाते हैं। मगर शिवपुरी में सबसे बड़ी चुनौती ऐसे बच्चो के शिक्षा को लेकर है क्योंकि अधिक ऑटिज्म पीड़ित बच्चो की पढ़ाई कोविड के बाद लगभग छूट चुकी है एवम स्पेशल चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट शिवपुरी में कोई नहीं है वर्कशॉप में ऑटिज्म से पीड़ित चैतन्य की माता श्रीमती सोनिया ने अपनी पीड़ा व्यक्त की कहा की बच्चे को प्राइवेट स्कूल में लेकर जाते है तो वहा हजारों में फीस मांगते है सरकारी स्कूल ऐसे बच्चो को न तो प्रवेश देते और न मना करते जिससे ऑटिज्म से पीड़ित बच्चो का शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है  प्रोग्राम में रिसर्च फेलो संभवी जैन ने कहा की 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर  बताया कि इस समस्या का इलाज भी जितनी जल्दी शुरू हो जाए उतने अच्छे परिणाम मिलते हैं। इस समस्या के लिए आनुवांशिक और पर्यावरण संबंधी कई कारण जिम्मेदार होते हैं। डॉ. अर्पित बंसल ने बताया की शोर  शराबे के शौकीन लोग अक्सर सड़क के आसपास अपना घर बनाते हैं। लेकिन ऐसे लोगों को चौकन्ना होने की जरूरत है क्योंकि ऐसी जगहों पर रहने वालों के बच्चों में ऑटिज्म होने का खतरा दो गुना तक बढ़ सकता है। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है।

जिम जाने वालों के लिए असली खजाना है कपिवा का यह उत्पाद, एक साथ बढ़ाएगा बॉडी स्ट्रेंथ और स्टैमिना | प्रोग्राम में ऑटिज्म पर कर कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता कर्ण लक्ष्यकार ने कहा की ऑटिज्म जिसे स्वलीनता भी कहते हैं एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसके शिकार बच्चे अपने आप में खोए से रहते हैं। वह सामाजिक रूप से अलग थलग रहते हैं, किसी से घुलते मिलते नहीं हैं और दूसरों से बात करने से भी हिचकते हैं। इस बीमारी के लक्षण बचपन से ही नजर आने लगते हैं। हालांकि कई वैज्ञानिक इसे बीमारी नहीं कहते। इसमें पीड़ित बच्चों का विकास धीरे होता है। यह रोग बच्चे के मानसिक विकास को रोक देता है। सामान्य तौर पर ऐसे बच्चों को उदासीन माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में ये लोग अद्भुत प्रतिभा वाले होते हैं। माना जाता है कि सेंट्रल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचने से यह दिक्कत होती है। कई बार गर्भावस्था के दौरान खानपान सही न होने से भी बच्चे को ऑटिज्म का खतरा हो सकता है। वर्कशॉप में बताया की  ऑटिज्म पीड़ित बच्चों को चाहिए परिवार का प्यार जिसके लिए आज इनको दो वीडियो फिल्म दिखाई गई। डाक्टर अर्पित ने अंत में  बताया कि आधुनिक जीवनशैली की वजह से परिवारों में एकजुटता का भाव बहुत कम हो गया है। बच्चों में असुरक्षा का एहसास बढ़ रहा है। एक ऑटिज्म प्रभावित बच्चे को कई सारी चीजों की खुराक चाहिए होती है। इसमें ऐसी चिकित्सकीय क्रियाएं शामिल हैं, जो उसे स्कूल, परिवार और दोस्तों के बीच मेलजोल में मदद करेंगी इसके लिए टेली मानस की आप।मदद ले सकते है । प्रोग्राम में लव कुमार ने बताया कि एक बच्चे को अपने माता-पिता का समय और परिवार के बुजुर्गों का ध्यान और प्यार चाहिए होता है। इससे वह सुरक्षित और आत्मनिर्भर महसूस करता है। बच्चों को जितना हो सके टीवी, मोबाइल और टैब से दूर रखना चाहिए। इसकी जगह बच्चों में खिलौने, किताबें और घर में कुछ रोचक खेल खेलने की आदत डालनी चाहिए। मोबाइल और दूसरे गैजट्स बच्चों में एक तरह का वर्चुअल ऑटिज्म पैदा कर रहे हैं। अंत में रवि गोयल ने बताया की 2017 में भारत में 10 लाख लोग ऑटिज्म से प्रभावित थे। भारत में हर 68 में से 1 बच्चा ऑटिज्म से प्रभावित है। 20 फीसदी ऑटिज्म के मामलों के लिए आनुवांशिक कारण जिम्मेदार होते हैं।

 80 फीसदी मामलों के लिए पर्यावरण वंशानुगत कारण जिम्मेदार होते हैं।

- 12 से 13 माह के बच्चों में ऑटिज्म के लक्षण नजर आने लगते हैं। प्रोग्राम में ऑटिज्म फैमिली से सोनिया, कपिल, आकृति लोधी, जानकी महेश, राहुल शर्मा, सुनीता, पूरण, प्रियंका कुशवाहा, अनिता संजय, निकिता सेन एवम शारदा सैन के साथ शक्ति शाली महिला संगठन की टीम से करन, रवि, लव कुमार, विनोद पूरी एवम राहुल ने सक्रीय सहभागिता की।

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