शिवपुरी एसपी ने कहा-लॉ एण्ड ऑर्डर की ये स्थिति सेवाकाल की सबसे अलग, जनता को सजग करना और सुरक्षित रखना हमारी चुनौती
शिवपुरी पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल से केदार सिंह गोलिया की खास चर्चा
शिवपुरी। लॉकडाउन को करीब एक महीना हो चुका है और इस दौरान आप और हम घर में रहे हैं, लेकिन आपके लिए तेज धूप को भी सहन कर सड़कों पर मेराथन ड्यूटी देने वाले पुलिसकर्मी इस एक महीने की अवधि में अपने घर और परिवार के बीच जाने को तरस गए हैं। आज शिवपुरी में लॉकडाउन का अपेक्षाकृत अन्य जिलों से बेहतर पालन होने का नतीजा है कि शिवपुरी दो पॉजीटिव केस आने के बावजूद संक्रमण के गर्त में नहीं गया और कोरोना मुक्त जिलों की श्रेणी में आ गया है। इस पूरी कवायत में पुलिस की भूमिका की नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पुलिस की इस भूमिका का नेतृत्व शिवपुरी पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल ने किया है जिसे अब तक पूरी तरह सफल कहा जा सकता है। विशेष चर्चा में पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मैंने अपने सेवाकाल में लॉ एण्ड ऑर्डर की स्थिति देखी है, लेकिन इस तरह की महामारी में कानून व्यवस्था बनाए रखना है एक अलग तरह का अनुभव है। क्योंकि यहां सामने वो जनता है जिसे हमें यथासंभव समझाकर कानून का पालन कराना है कि ये लॉकडाउन आपकी और समाज की सुरक्षा के लिए है। कई बार कुछ लोग जब बार-बार कहने पर भी नहीं समझते तो कठोर भी होना पड़ता है। जहां तक अतिरिक्त ड्यूटी का सवाल है उसके लिए किसी भी कर्मचारी को अतिरिक्त राशि की अपेक्षा नहीं रहती है। लोग जो सम्मान दे रहे हैं, सहयोग कर रहे हैं और देश के लिए सेवा का मौका मिला है यही पारिश्रमिक है।
सबसे पहले राजस्थान, झांसी, फिर मैन रूट बॉर्डर पर नाकाबंदी की गई
लॉकडाउन के पालन कराने की रणनीति के बारे में बताया कि सबसे पहले राजस्थान में कोरोनाकी बात सामने आई, जहां काफी ज्यादा संक्रमण हो रहा है। जो बॉर्डर लगता है राजस्थान का उसके लिए बड़ी टीम बनाई गई जिसमें राजस्व, मेडीकल और हमारे पुलिस के अधिकारी भी थे ताकि कंट्रोल किया जाए। इस दौरान जो शिवपुरी जिले के लोग थे जिन्हें आवश्यक आना था, उनकी मेडीकल स्कैनिंग की गई इसके बाद ही प्रवेश दिया गया। इसके बाद यही प्रक्रिया झांसी बॉर्डर पर अपनाई क्योंकि यूपी में झांसी और आगरा में हमसे पहले संक्रमण शुरू हो गया था। फिर मैन रूट ग्वालियर, गुना व अशोकनगर पर नाकाबंदी कर सख्ती की गई। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि बीच में एक समस्या आई कि कई लोग पैदल, कोई टू व्हीलर पर, कुछ ऐसे ही घूम रहे हैं उनको रोका, मेडीकल करवाया, खाने की व्यवस्था की। चाहे तेंदुआ हो, कोलारस हो, प्रोपर शिवपुरी, लोगों ने खुलकर सपोर्ट किया है। इससे हम लोग कहीं न कहीं सक्षम हुए हैं। प्रशासन के अधिकारियों ने भी हमारी मदद की।
सुबह घर से निकलने पर रात में ही एक बार जाना हो पाता है
परिवार के साथ समय और सुरक्षा को मैनेज करने के सवाल पर पुलिस अधीक्षक बोले, इस समय तो परिवार ही हमारी सुरक्षा कर रहा है। जब मैं घर से निकलते हूं तो एक बार ही रात में घर जाना होता है। अपने हाथों को सेनेटाइज करके, नहाकर ही घर में प्रवेश करता हूं। जो दूसरों को बोलते हैं वहीं घर पर बोलते हैं। घर से बाहर नहीं निकला है, किसी को नहीं बुलाना है किसी को आने नहीं देना है। पुलिस परिवार में यह खासियत होती है वह समझ जाते हैं कि अब हमको ध्यान रखना है इनका। वह ध्यान रखते हैं क्या खिलाना है। गनमैन भी रहता है तो वह देख लेता है सेनेटाइजर रखा है या नहीं है, मास्क पहन रखे हैं कि नहीं। इन सब चीजों का सारा ध्यान रखते हैं।
कलेक्टर मैडम बहुत पॉजीटिव हैं, समन्वय अच्छा है इसलिए मिलकर करते हैं काम
अधिकतर सभी कार्यों में कलेक्टर के साथ मिलकर काम करने के सवाल के जबाव में पुलिस अधीक्षक ने बड़े ही स्पष्ट शब्दों में कहा कि कहीं अव्यवस्था फैलती है तो लॉ एण्ड ऑर्डर पुलिस के ऊपर ही आता है और कर्तव्य बोध भी है। चूंकि हमारा समन्वय अच्छा है तो सब चीजों को साथ मिलकर करने से कई समस्याओं का समाधान हो जाता है। कई बार गैप होने से नीचे के कर्मचारियों को झंझट होता है वह नहीं होता है। मैडम बहुत पॉजीटिव है उनका बहुत साफ सुथरा काम है। उनको लगता है कि यह बात सही है तो बिलकुल करती है।
पुलिसकर्मियों की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण, डीजीपी साहब के निर्देशों को करा रहे फॉलो
पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के सवाल पर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिसकर्मियों की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है ऐसा सरकार ने भी समझाया था हमारे जो मुखिया है डीजीपी साहब, उनके दिशा निर्देश लगातार आते रहते हैं। पुलिसकर्मियों को भी बोला गया है कि वह अपने साथ सेनेटाइजर, साबुन रखें और दिशा निर्देशों का पालन करे। हमने पर्सनल तीन-तीन मास्क दिए हैं, सेनेटाइजर दिए हैं, हर थाने में पीपीई किट उपलब्ध कराई गई हैं। सभी को निर्देश हैं कि कहीं भी कोरोना संदिग्ध व्यक्ति के पास आप किट पहनकर ही जाएं जिससे कहीं न कहीं सुरक्षित रह सके कोरोना के संक्रमण से। जो गाइड लाइन है गर्म पानी पीना उसके लिए केटली देना, गर्म पानी देना, हीटिंग रोड देना, होम्योपैथी की जो इम्यूनिटी बढ़ाने की दवाएं हैं, वह दवाएं बताई भी गई हैं और उपलब्ध भी कराई गई हैं। यह कोशिश की जाती है कि यदि हमारे स्टाफ में कोई व्यक्ति बीमार है तो मेडीकल अटेंडेंस उसको दी जाए। यदि उसको जरूरत है तो रेस्ट दिया जाए। जिनकी उम्र 50 या 55 वर्ष के आसपास है यदि उनको कुछ भी गड़बड़ है तो उनकी ड्यूटी ऐसी जगह नहीं लगा रहे जिससे वह जनता के संपर्क में आएं। डीजीपी महोदय के निर्देशों को फॉलो करा रहे हैं।
जनता का जो स्नेह और सम्मान मिलता है उससे ड्यूटी पर कॉन्फीडेंस मिलता है
हमने ग्राम रक्षा समिति, नगर रक्षा समिति की मदद ली है इससे हमारा फोर्स बढ़ा है, फोरेस्ट का भी सहयोग मिला है। वैसे जहां ज्यादा आवश्यकता होती है वहां प्रदेश स्तर से अतिरिक्त बल लिया जाता है, अभी हमारे यहां यह चिंताजनक बात नहीं है कि फोर्स कम है। हमारे पास संसाधन भी काफी पर्याप्त हैं। सबका ध्यान और फोकस सिर्फ कोरोना है। रुटेशन बनाया गया है, कोशिश की जाती है कि शिफ्टों में काम करें, जिनकी ड्यूटी 10 से 12 घंटें की होती है उनको वहीं खाना उपलब्ध कराया जाता है। काफी लोगों ने व्यक्तिगत तौर पर सहायता मुहैया कराई कि हमको पुलिस को सहायता करनी है। बदरवास के रमेश अग्रवाल जी ने हमको 300 पीपीई किट उपलब्ध कराई हैं, जो हमारे लिए बड़ा गिफ्ट, स्नेह और सम्मान है, जो जनता की तरफ से मिल रहा है। इससे कहीं न कहीं ड्यूटी के दौरान कॉन्फीडेंस मिलता है।
कर्तव्य की पुकार है ज्यादा से ज्यादा काम करो
विभिन्न मौकों पर अन्य कर्मचारियों की भांति क्या पुलिस को ओवरटाइम पारिश्रमिक मिलेगा?, इस सवाल के जबाव में पुलिस अधीक्षक श्री चंदेल ने कहा कि जनता आपके लिए अच्छा कहती है, उससे बड़ा कोई इनाम नहीं होता है। हर कर्मचारी जब यूनिफार्म पहनता है तो वह समझता है कि उसे अपने कर्तव्य पर सतर्क रहना चाहिए। हम लोग इस चीज पर विश्वास नहीं करते हैं कि घंटा काउंट करें और घंटों के हिसाब से पैसे मांगें। हमारा कर्तव्य है कि उसे यथांसभव सम्मान मिले और जो यशस्वी होते हैं उनके इनाम का पूरा ध्यान रखते हैं। हमें ड्यूटी के हिसाब से वेतन भी मिल रहा है। कर्तव्य की पुकार है कि ज्यादा से ज्यादा काम करो। किसी को कोई समस्या होती है तो हम लोग उसको छुट्टी भी देते हैं, रेस्ट भी। ऐसी कोई परेशानी विभाग में नहीं है। यह हम सबके लिए अपनी कर्तव्यनिष्ठा दिखाने और चुनौतियों से निपटने के लिए बड़ा मौका है। मुझे लगता है कि ज्यादातर लोग पूरी ताकत से अपने काम में जुटे हुए हैं। कहीं न कहीं हम भी समाज का हिस्सा हैं। यह मौका आया है, एग्जाम आया है कुछ अच्छा करके दिखाना है।
आप क्रिमिनल से नहीं, बल्कि आम पब्लिक से डील कर रहे हो, बार-बार सेट से बोला जाता है
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि कई बार लोग जो परमिशन रहती हैं, उनका दुरुपयोग करने लगते हैं। कभी-कभार हेरीटेशन में छोटा मोटा बल प्रयोग हो जाता है। हम लगातार सेट पर बोलते हैं कि आपको मारपीट नहीं करना है, आप क्रिमिनल से नहीं, बल्कि आम पब्लिक से डील कर रहे, उनका लेवल ऑफ अवेयरनेस कम है। जिस पर कार्यवाही करते हैं तो ऐसा नहीं कर सकते है कि केस रजिस्टर्ड करके उसको बंद कर दें, बल्कि उसे चेतावनी, समझाकर छोड़ दिया जाता है। यदि कोई बार बार ऐसा कर रहता है तो उसका रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज देखकर बनाने की बात कही जाती है। यदि कोई व्यक्ति विशेष को जान पहचान कर उसके साथ कोई हरकत की गई है, एक लिमिट से ज्यादा मारपीट की बात सामने आई है या दुव्र्यवहार की बात आई तो हम कार्यवाही भी करते हैं। इस तरह से एक बेलेंस बनाने की कोशिश करते हैं ताकि फोर्स में भी एक मैसेज जाए। शिवपुरी में इस तरह की स्थिति नहीं है।
शिवपुरी पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल से केदार सिंह गोलिया की खास चर्चा
शिवपुरी। लॉकडाउन को करीब एक महीना हो चुका है और इस दौरान आप और हम घर में रहे हैं, लेकिन आपके लिए तेज धूप को भी सहन कर सड़कों पर मेराथन ड्यूटी देने वाले पुलिसकर्मी इस एक महीने की अवधि में अपने घर और परिवार के बीच जाने को तरस गए हैं। आज शिवपुरी में लॉकडाउन का अपेक्षाकृत अन्य जिलों से बेहतर पालन होने का नतीजा है कि शिवपुरी दो पॉजीटिव केस आने के बावजूद संक्रमण के गर्त में नहीं गया और कोरोना मुक्त जिलों की श्रेणी में आ गया है। इस पूरी कवायत में पुलिस की भूमिका की नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पुलिस की इस भूमिका का नेतृत्व शिवपुरी पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल ने किया है जिसे अब तक पूरी तरह सफल कहा जा सकता है। विशेष चर्चा में पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मैंने अपने सेवाकाल में लॉ एण्ड ऑर्डर की स्थिति देखी है, लेकिन इस तरह की महामारी में कानून व्यवस्था बनाए रखना है एक अलग तरह का अनुभव है। क्योंकि यहां सामने वो जनता है जिसे हमें यथासंभव समझाकर कानून का पालन कराना है कि ये लॉकडाउन आपकी और समाज की सुरक्षा के लिए है। कई बार कुछ लोग जब बार-बार कहने पर भी नहीं समझते तो कठोर भी होना पड़ता है। जहां तक अतिरिक्त ड्यूटी का सवाल है उसके लिए किसी भी कर्मचारी को अतिरिक्त राशि की अपेक्षा नहीं रहती है। लोग जो सम्मान दे रहे हैं, सहयोग कर रहे हैं और देश के लिए सेवा का मौका मिला है यही पारिश्रमिक है।
सबसे पहले राजस्थान, झांसी, फिर मैन रूट बॉर्डर पर नाकाबंदी की गई
लॉकडाउन के पालन कराने की रणनीति के बारे में बताया कि सबसे पहले राजस्थान में कोरोनाकी बात सामने आई, जहां काफी ज्यादा संक्रमण हो रहा है। जो बॉर्डर लगता है राजस्थान का उसके लिए बड़ी टीम बनाई गई जिसमें राजस्व, मेडीकल और हमारे पुलिस के अधिकारी भी थे ताकि कंट्रोल किया जाए। इस दौरान जो शिवपुरी जिले के लोग थे जिन्हें आवश्यक आना था, उनकी मेडीकल स्कैनिंग की गई इसके बाद ही प्रवेश दिया गया। इसके बाद यही प्रक्रिया झांसी बॉर्डर पर अपनाई क्योंकि यूपी में झांसी और आगरा में हमसे पहले संक्रमण शुरू हो गया था। फिर मैन रूट ग्वालियर, गुना व अशोकनगर पर नाकाबंदी कर सख्ती की गई। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि बीच में एक समस्या आई कि कई लोग पैदल, कोई टू व्हीलर पर, कुछ ऐसे ही घूम रहे हैं उनको रोका, मेडीकल करवाया, खाने की व्यवस्था की। चाहे तेंदुआ हो, कोलारस हो, प्रोपर शिवपुरी, लोगों ने खुलकर सपोर्ट किया है। इससे हम लोग कहीं न कहीं सक्षम हुए हैं। प्रशासन के अधिकारियों ने भी हमारी मदद की।
सुबह घर से निकलने पर रात में ही एक बार जाना हो पाता है
परिवार के साथ समय और सुरक्षा को मैनेज करने के सवाल पर पुलिस अधीक्षक बोले, इस समय तो परिवार ही हमारी सुरक्षा कर रहा है। जब मैं घर से निकलते हूं तो एक बार ही रात में घर जाना होता है। अपने हाथों को सेनेटाइज करके, नहाकर ही घर में प्रवेश करता हूं। जो दूसरों को बोलते हैं वहीं घर पर बोलते हैं। घर से बाहर नहीं निकला है, किसी को नहीं बुलाना है किसी को आने नहीं देना है। पुलिस परिवार में यह खासियत होती है वह समझ जाते हैं कि अब हमको ध्यान रखना है इनका। वह ध्यान रखते हैं क्या खिलाना है। गनमैन भी रहता है तो वह देख लेता है सेनेटाइजर रखा है या नहीं है, मास्क पहन रखे हैं कि नहीं। इन सब चीजों का सारा ध्यान रखते हैं।
कलेक्टर मैडम बहुत पॉजीटिव हैं, समन्वय अच्छा है इसलिए मिलकर करते हैं काम
अधिकतर सभी कार्यों में कलेक्टर के साथ मिलकर काम करने के सवाल के जबाव में पुलिस अधीक्षक ने बड़े ही स्पष्ट शब्दों में कहा कि कहीं अव्यवस्था फैलती है तो लॉ एण्ड ऑर्डर पुलिस के ऊपर ही आता है और कर्तव्य बोध भी है। चूंकि हमारा समन्वय अच्छा है तो सब चीजों को साथ मिलकर करने से कई समस्याओं का समाधान हो जाता है। कई बार गैप होने से नीचे के कर्मचारियों को झंझट होता है वह नहीं होता है। मैडम बहुत पॉजीटिव है उनका बहुत साफ सुथरा काम है। उनको लगता है कि यह बात सही है तो बिलकुल करती है।
पुलिसकर्मियों की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण, डीजीपी साहब के निर्देशों को करा रहे फॉलो
पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के सवाल पर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिसकर्मियों की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है ऐसा सरकार ने भी समझाया था हमारे जो मुखिया है डीजीपी साहब, उनके दिशा निर्देश लगातार आते रहते हैं। पुलिसकर्मियों को भी बोला गया है कि वह अपने साथ सेनेटाइजर, साबुन रखें और दिशा निर्देशों का पालन करे। हमने पर्सनल तीन-तीन मास्क दिए हैं, सेनेटाइजर दिए हैं, हर थाने में पीपीई किट उपलब्ध कराई गई हैं। सभी को निर्देश हैं कि कहीं भी कोरोना संदिग्ध व्यक्ति के पास आप किट पहनकर ही जाएं जिससे कहीं न कहीं सुरक्षित रह सके कोरोना के संक्रमण से। जो गाइड लाइन है गर्म पानी पीना उसके लिए केटली देना, गर्म पानी देना, हीटिंग रोड देना, होम्योपैथी की जो इम्यूनिटी बढ़ाने की दवाएं हैं, वह दवाएं बताई भी गई हैं और उपलब्ध भी कराई गई हैं। यह कोशिश की जाती है कि यदि हमारे स्टाफ में कोई व्यक्ति बीमार है तो मेडीकल अटेंडेंस उसको दी जाए। यदि उसको जरूरत है तो रेस्ट दिया जाए। जिनकी उम्र 50 या 55 वर्ष के आसपास है यदि उनको कुछ भी गड़बड़ है तो उनकी ड्यूटी ऐसी जगह नहीं लगा रहे जिससे वह जनता के संपर्क में आएं। डीजीपी महोदय के निर्देशों को फॉलो करा रहे हैं।
जनता का जो स्नेह और सम्मान मिलता है उससे ड्यूटी पर कॉन्फीडेंस मिलता है
हमने ग्राम रक्षा समिति, नगर रक्षा समिति की मदद ली है इससे हमारा फोर्स बढ़ा है, फोरेस्ट का भी सहयोग मिला है। वैसे जहां ज्यादा आवश्यकता होती है वहां प्रदेश स्तर से अतिरिक्त बल लिया जाता है, अभी हमारे यहां यह चिंताजनक बात नहीं है कि फोर्स कम है। हमारे पास संसाधन भी काफी पर्याप्त हैं। सबका ध्यान और फोकस सिर्फ कोरोना है। रुटेशन बनाया गया है, कोशिश की जाती है कि शिफ्टों में काम करें, जिनकी ड्यूटी 10 से 12 घंटें की होती है उनको वहीं खाना उपलब्ध कराया जाता है। काफी लोगों ने व्यक्तिगत तौर पर सहायता मुहैया कराई कि हमको पुलिस को सहायता करनी है। बदरवास के रमेश अग्रवाल जी ने हमको 300 पीपीई किट उपलब्ध कराई हैं, जो हमारे लिए बड़ा गिफ्ट, स्नेह और सम्मान है, जो जनता की तरफ से मिल रहा है। इससे कहीं न कहीं ड्यूटी के दौरान कॉन्फीडेंस मिलता है।
कर्तव्य की पुकार है ज्यादा से ज्यादा काम करो
विभिन्न मौकों पर अन्य कर्मचारियों की भांति क्या पुलिस को ओवरटाइम पारिश्रमिक मिलेगा?, इस सवाल के जबाव में पुलिस अधीक्षक श्री चंदेल ने कहा कि जनता आपके लिए अच्छा कहती है, उससे बड़ा कोई इनाम नहीं होता है। हर कर्मचारी जब यूनिफार्म पहनता है तो वह समझता है कि उसे अपने कर्तव्य पर सतर्क रहना चाहिए। हम लोग इस चीज पर विश्वास नहीं करते हैं कि घंटा काउंट करें और घंटों के हिसाब से पैसे मांगें। हमारा कर्तव्य है कि उसे यथांसभव सम्मान मिले और जो यशस्वी होते हैं उनके इनाम का पूरा ध्यान रखते हैं। हमें ड्यूटी के हिसाब से वेतन भी मिल रहा है। कर्तव्य की पुकार है कि ज्यादा से ज्यादा काम करो। किसी को कोई समस्या होती है तो हम लोग उसको छुट्टी भी देते हैं, रेस्ट भी। ऐसी कोई परेशानी विभाग में नहीं है। यह हम सबके लिए अपनी कर्तव्यनिष्ठा दिखाने और चुनौतियों से निपटने के लिए बड़ा मौका है। मुझे लगता है कि ज्यादातर लोग पूरी ताकत से अपने काम में जुटे हुए हैं। कहीं न कहीं हम भी समाज का हिस्सा हैं। यह मौका आया है, एग्जाम आया है कुछ अच्छा करके दिखाना है।
आप क्रिमिनल से नहीं, बल्कि आम पब्लिक से डील कर रहे हो, बार-बार सेट से बोला जाता है
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि कई बार लोग जो परमिशन रहती हैं, उनका दुरुपयोग करने लगते हैं। कभी-कभार हेरीटेशन में छोटा मोटा बल प्रयोग हो जाता है। हम लगातार सेट पर बोलते हैं कि आपको मारपीट नहीं करना है, आप क्रिमिनल से नहीं, बल्कि आम पब्लिक से डील कर रहे, उनका लेवल ऑफ अवेयरनेस कम है। जिस पर कार्यवाही करते हैं तो ऐसा नहीं कर सकते है कि केस रजिस्टर्ड करके उसको बंद कर दें, बल्कि उसे चेतावनी, समझाकर छोड़ दिया जाता है। यदि कोई बार बार ऐसा कर रहता है तो उसका रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज देखकर बनाने की बात कही जाती है। यदि कोई व्यक्ति विशेष को जान पहचान कर उसके साथ कोई हरकत की गई है, एक लिमिट से ज्यादा मारपीट की बात सामने आई है या दुव्र्यवहार की बात आई तो हम कार्यवाही भी करते हैं। इस तरह से एक बेलेंस बनाने की कोशिश करते हैं ताकि फोर्स में भी एक मैसेज जाए। शिवपुरी में इस तरह की स्थिति नहीं है।







