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सामूहिक विवाह आयोजक बगैर उम्र के प्रमाण पंजीयन न करें

  • प्रशासन की चेतावनी अगर बाल विवाह हुआ तो पूरी समिति होगी दोषी


शिवपुरी। जागरूकता के तमाम प्रयासों के बावजूद भी प्रशासन को सामुहिक आयोजनों में अवयस्क बर-बधू के पंजीयन की शिकायतें मिल रहीं है।गत दिवस सामूहिक आयोजन में होने वाले बाल विवाह की सूचना पर महिला एवं बाल विकास के जिला कार्यक्रम अधिकारी ओपी पांडेय ने सभी परियोजना अधिकारियों को कलेक्टर के आदेश का हवाला देते हुए सामूहिक विवाह आयोजनों की निगरानी करने के निर्देश दिये है।आदेश में कहा है कि यदि आयोजन समिति द्वारा बिना उम्र के प्रमाण लिये पंजीयन किया है अथवा वैध प्रमाण नहीं लिया है तो उन्हें पंजीयन निरस्त करने हेतु निर्देशित करें।
अवयस्क बालक-बालिका (बर- बधू) का विवाह के लिये पंजीयन करने पर सम्बंधित आयोजन समिति के विरूद्ध बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 एवं किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के प्रावधानों के अनुसार आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कराने की कार्यवाही करें। उल्लेखनीय है कि प्रशासन द्वारा बिना उम्र के वैध प्रमाण के विवाह आयोजन हेतु पंजीयन नहीं करने के आदेश पूर्व में ही जारी किये जा चुके है।

आयोजकों की कमाई का जरिया बना कानून
एक आयोजन समिति के पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कम उम्र के लड़के लड़कियों के पंजीयन के लिये समिति अलग से 10 से 25 हजार रुपये तक ले रहीं है तथा ऐसे अवयस्क जोड़ों के आयोजक उम्र के प्रमाण में आधार कार्ड या पंचायत का प्रमाणीकरण ले रहे है। जबकि आधार कार्ड उम्र के प्रमाण हेतु बैध दस्तावेज नहीं है। शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार जन्म प्रमाण पत्र,अंकसूची या स्कूल का प्रमाणीकरण ही मान्य है।यदि सम्बंधित लड़का या लड़की अनपढ़ है तो उसके निवास स्थान के स्कूल के प्रधान अध्यापक का अनपढ़ होने का प्रमाणीकरण देना होगा। उसके बाद ही चिकित्सा बोर्ड का प्रमाणपत्र मान्य होगा।

बाल विवाह से बढ़ती है मातृ-शिशु मृत्यु दर
महिला एवं बाल विकास विभाग के सहायक संचालक आकाश अग्रवाल ने बताया कि बाल विवाह के अनेकों दुष्प्रभाव समाज को झेलने पड़ते है। मातृ शिशु मृत्यु दर बढऩे का सबसे बड़ा कारण बाल विवाह है। बाल विवाह बच्चों को शिक्षा के अधिकार से बंचित करने का काम करता है। माता पिता को निर्धारित आयु से पहले विवाह नहीं करना चाहिये। 
बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि बाल विवाह निषेध कानून में परिजनों के साथ ही आयोजन में सहयोग करने वाले, किसी भी रूप में सेवाएं देने वाले सभी को दोषी माना गया है।कानून में सभी के लिये सजा के प्रावधान भी समान किये गए है। बाल विवाह बच्चों के साथ क्रुरता है तथा इस क्रुरता में सहयोगियों पंडित,मौलवी,लाइट,टैंट, बैंड बाजा,पत्रिका प्रकाशक,हलवाई-केटरिंग वालों के साथ साथ आयोजन में शामिल होने वालों तक पर कार्यवाही का प्रावधान है।

बाल विवाह की सजा में हुई है बृद्धि
बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा के अनुसार बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 में आयोजक एवं सहयोगियों को 2 वर्ष की सजा एवं एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान था,अब संसोधित किशोर न्याय अधिनियम 2015 में इसे बच्चों के साथ क्रुरता मानते हुए 3 वर्ष की सजा एवं एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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