-मूल स्कूल छोड़कर शहर के नजदीक छात्रावास में कर रहे कार्य, जबाव में विभाग ने लिखा कार्यमुक्त करना संभव नहीं
-शिक्षक संघ के नेता हैं अवस्थी, अधिकारी डरते हैं कार्यवाही से
केदार करामाती
शिवपुरी। 14 जुलाई 2026 को शिवपुरी कलेक्टर ने आदेश जारी किया कि स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत समस्त शिक्षकों की ऑनलाईन उपस्थिति पदांकित संस्था से ही दर्ज होगी और उसी से वेतन आहरित होगा। पत्र में 13 जुलाई को आयुक्त लोकशिक्षण की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का हवाला देते हुए कहा गया कि आसंजन, अटैचमेंट, कार्यानुमति या फिर किसी भी नाम से शिक्षक यदि मूल संस्था से अलग कार्यरत है तो उस आदेश को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है। कलेक्टर के पत्र के ठीक बाद शिवपुरी डीईओ आकाश सिंह यादव ने भी 14 जुलाई को ही सभी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारियों ने 15 जुलाई को प्रमाण पत्र मांगा कि शैक्षणिक संवर्ग का कोई भी लोकसेवक अपनी मूल पदांकित संस्था से अन्यत्र कार्यरत नहीं है। यहां तक कि निर्वाचन, जनगणना जैसे कार्यों में भी आसंजन क्यों न हो उन्हें भी मूल संस्था में लौटा दिया गया लेकिन कलेक्टर का आदेश शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्यविभाग ने एक शिक्षक नेता के लिए त्याग दिया। शिक्षक नेता पवन अवस्थी जो मूलत: कोलारस विकासखण्ड के प्राथमिक विद्यालय सरजापुर में पदस्थ हैं और उनका वेतन भी कोलारस बीईओ कार्यालय से ही हर महीने भुगतान किया जा रहा है, वह भी तब जब कलेक्टर कह रहे हैं कि ई अटेंडेंस मूल संस्था से ही लगेगी, पर शिक्षक नेता 4 जुलाई 2025 से शिवपुरी विकासखण्ड के अंतर्गत जिला मुख्यालय से महज चंद किमी दूर बड़ौदी के एक छात्रावास में नियम विरूद्ध अधीक्षक के पद पर अटैच बने हुए हैं। यह सब भी ठीक है इस मामले की शिकायत जब मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली सीएम हेल्पलाईन पर की गई तो यहां भी शिकायकर्ता पर शिकायत वापस लेने के दबाव के बावजूद जब दाल नहीं गली तो शिक्षक नेता के दबाव में आकर जिम्मेदार अधिकारियों ने कलेक्टर और आयुक्त के आदेश को मुंह चिड़ाकर ऐसा जबाव दिया है जो अपने आप में जांच का विषय है। जबाव में अधिकारियों ने लिखा है कि जनजातीय विभाग के इस छात्रावास में विभागीय अधीक्षक की व्यवस्था होने तक पवन अवस्थी को कार्यमुक्त नहीं किया जा सकता। यह जबाव अपने आप में कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखा रहा है। जिसमें उन्होंने निर्वाचन तक में आसंजित शिक्षकों को मूल संस्था में भेजने की सख्त हिदायत दी थी।
डीईओ ने कैसे दे दी सहमति...?
मामलो में सीएम हेल्पलाईन के उत्तर में लिखा गया है कि कार्यालय कलेक्टर पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के 5 अगस्त 2026 को दिए गए पत्र के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी शिवपुरी की एनओसी के आधार पर तत्कालीन कलेक्टर द्वारा 4 जुलाई 2025 को विभागीय अधीक्षक की व्यवस्था होने तक पवन अवस्थी को कोलारस के सरजापुर से इस छात्रावास के अधीक्षक का प्रभार सौंपा गया है। यहां फिर सवाल यह है कि जब शिक्षा विभाग में सभी अटैचमेंट प्रतिबंधित हैं तो डीईओ ने शिक्षक नेता के लिए नियमों को शिथिल कर यह एनओसी कैसे दे दी।
...तो कहां से लग रही है कि अवस्थी की ई अटेंडेंस
शिक्षा विभाग के आयुक्त अभिषेक सिंह साफ कह चुके हैं कि शिक्षक को उसी स्कूल से ई अटेंडेंस लगानी होगी जहां से उसको वेतन का भुगतान हो रहा है। तो फिर कोलारस विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी और संबंधित संकुल केन्द्र शिक्षक नेता अवस्थी का पिछले एक साल से हर माह वेतन भुगतान किस आधार पर कर रहे हैं। यदि शिक्षक की ई अटेंडेंस उसकी मूल पदस्थापना वाले सरजापुर स्कूल पर नहीं लग रही है तो कोलारस विकासखण्ड से वेतन कैसे जारी हो रहा है। यदि अवस्थी प्रतिनियुक्ति पर हैं तो फिर उनका वेतन छात्रावास वाले विभाग से जारी क्यों नहीं हो रहा है ? बताया जाता है कि शिक्षक नेता के नजदीकी रिश्तेदार शिक्षा विभाग में बड़े पद पर हैं इसीलिए कोई भी इस मामले में कार्यवाही करने से पीछे हट रहा है।










