-समापन समारोह में मध्यप्रदेश योग आयोग अध्यक्ष राघवेन्द्र शर्मा ने वितरित किए प्रमाण पत्र
शिवपुरी। मध्य प्रदेश शासन के आनंद विभाग द्वारा हैदराबाद स्थित कान्हा शांति वनम मेडिटेशन सेंटर में राज्य आनंद संस्थान के 40 मास्टर ट्रेनर्स के चार दिवसीय ‘हार्टफुलनेस कम्युनिकेशन हृदय से संवाद’ कार्यशाला आयोजित हुई जिसमें शिवपुरी से भी संस्थान के मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित और रिजवाना खान शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य संवाद को अधिक संवेदनशील, प्रभावी और आत्मीय बनाना रहा। प्रशिक्षण के दौरान गहराई से सुनने, समानुभूति, भावनाओं, जरूरतों और प्रामाणिक अभिव्यक्ति जैसे विषयों पर विभिन्न गतिविधियों एवं अभ्यासों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। जिला शिवपुरी के आनंदम सहयोगी नीरज सरैया ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यशाला राज्य आनंद संस्थान के कोऑर्डिनेटर देवाशीष के नेतृत्व में मास्टर ट्रेनर्स ने प्रशिक्षण में सहभागिता की। प्रशिक्षण में बिना निर्णय किए सुनना, सामने वाले की भावनाओं एवं जरूरतों को समझना और सकारात्मक अनुरोध के माध्यम से संवाद को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने मौन के साथ सुनने, पूर्वाग्रहों से मुक्त होने तथा विवादों को नए दृष्टिकोण से देखने का भी अभ्यास किया।
कार्यशाला के दौरान हार्टफुलनेस संस्थान के प्रमुख एवं आध्यात्मिक गुरु कमलेश पटेल ‘दाजी’ महाराज ने राज्य आनंद संस्थान के दल को विशेष रूप से संबोधित किया। उन्होंने प्रतिभागियों को आध्यात्मिक दर्शन और हार्टफुलनेस की चेतना के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया तथा प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
प्रशिक्षण में बताया गया कि आलोचना, तुलना, आरोप, लेबल और बिना मांगी गई सलाह संवाद में दूरी पैदा करते हैं, जबकि तटस्थ अवलोकन, भावनाओं की पहचान, जरूरतों की समझ और सकारात्मक अनुरोध आपसी जुड़ाव को मजबूत करते हैं। ‘जैकाल लैंग्वेज’ और ‘जिराफ लैंग्वेज’ के माध्यम से भी संवाद की विभिन्न शैलियों को समझाया गया। निर्णयात्मक एवं आलोचनात्मक भाषा जहां अलगाव पैदा करती है, वहीं समानुभूति और मानवीय जरूरतों से जुड़ी भाषा संवाद को गहरा करती है।
जिला शिवपुरी के मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने कार्यशाला का फीडबैक देते हुए बताया कि संवाद केवल अपनी बात कहने का माध्यम नहीं, बल्कि दूसरे को गहराई से सुनने, समझने और हृदय से जुड़ने की प्रक्रिया है। आत्मीय संवाद की शुरुआत दूसरे व्यक्ति को बदलने से नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर ठहरने, अपनी भावनाओं और जरूरतों को समझने तथा सामने वाले को स्वीकार करने से होती है।
कार्यशाला के समापन अवसर पर मध्य प्रदेश योग आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। उन्होंने योग, आनंद और अन्य सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर मध्य प्रदेश में एक नई समन्वित व्यवस्था विकसित करने की दिशा में प्रस्ताव भी रखा। जिला शिवपुरी से मास्टर ट्रेनर रिजवाना खान ने भी कार्यशाला में सहभागिता की।








