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अब ऑनलाइन भी दर्ज कराई जा सकती है बाल विवाह की शिकायत

बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल का हुआ शुभारंभ

बाल विवाह की खिलाफत का संकल्प लें और ई- सर्टिफिकेट पाएं

 विवाह के लिए किशोर- किशोरियों का शारीरिक और मानसिक तौर पर मजबूत होना बहुत जरूरी होता है। बाल विवाह सिर्फ एक बुराई ही नहीं,बल्कि एक सामाजिक अपराध है। इसे मिटाना हम सभी की जिम्मेदारी है। कम उम्र में विवाह होना किशोर- किशोरियों के स्वास्थ्य और शिक्षा को प्रभावित करता है। यह उनके शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है। बाल विवाह से जब किशोरियां कम उम्र में गर्भवती होती है,तो मातृ- शिशु मृत्यु तथा कुपोषण और एनीमिया के मामलों में बृद्धि होती है। यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती है।

बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि शासन- प्रशासन द्वारा बाल विवाहों की रोकथाम के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे है। भारत सरकार द्वारा 27 नवंबर को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की है। अभियान के दौरान 10 दिसंबर तक ग्राम पंचायतों, स्कूलों, छात्रावासों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। लोगों को बाल विवाह की खिलाफत करने के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया जा रहा है। 

बाल विवाह रोकथाम की शपथ लें,सर्टिफिकेट पाएं

भारत सरकार द्वारा तैयार बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के पोर्टल पर जाकर कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन शपथ लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के हस्ताक्षर युक्त ई सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकता है।

सूचनातंत्रों का विकास

बाल विवाह की सूचनाएं प्रशासन तक पहुंचाने के लिए गांव- वार्डो में सूचनातंत्रों को सक्रिय किया गया है। इसके अलावा कोई भी व्यक्ति चाइल्ड लाइन नंबर 1098 , डायल 100, महिला हेल्पलाइन नंबर 181 पर सूचना दे सकता है। अब कोई भी सूचनादाता बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के पोर्टल पर शिकायत मीनू में संपूर्ण विवरण के साथ ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकता है।

- आयोजन के लिए कानून में सजा

बाल विवाह गैर जमानती अपराध है,किशोर न्याय कानून में इसे बच्चों के साथ क्रूरता मानते हुए 3 साल की सजा तथा एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। बाल विवाह निषेध कानून में इसके आयोजनकर्ता के साथ सेवा प्रदाताओं तथा सहभागिता करने वालों को भी दोषी माना गया है। कानून में दुष्प्रेरण तथा संवर्धनकर्ताओं के लिए भी 2 साल की सजा तथा एक लाख रुपये जुर्माना प्रावधानित है।

- बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों की संख्या में बृद्धि की गई है, जहां पहले जिले में कलेक्टर ही बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी हुआ करते थे,वहीं अब हर जिले में कलेक्टर के अलावा जिला पंचायत सीईओ को तहसील स्तर पर एसडीएम को तथा विकासखंड स्तरों पर सीईओ जनपद पंचायत एवं महिला बाल विकास के परियोजना अधिकारियों को भी बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नामांकित किया गया है।

- प्रदेश में बाल विवाहों की स्थिति

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वेक्षण- 3 (वर्ष 2005- 06) की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 66.03 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्रों में 34.39 प्रतिशत (कुल 57.3 प्रतिशत) बाल विवाह होते थे, जो सर्वेक्षण- 5 (वर्ष 2019- 21) में घटकर ग्रामीण क्षेत्रों में 26.06 प्रतिशत एवं शहरी क्षेत्रों में 13.0 प्रतिशत (कुल 23.1 प्रतिशत) हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत वर्ष में 23.03 प्रतिशत महिलाओं एवं 17.07 प्रतिशत पुरुषों का बाल विवाह होता है।

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