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शुरूआती कठिनाइयों के बाद कोरोना फाइट में सफल प्रशासनिक अधिकारी बनकर उभरीं "शिवपुरी कलेक्टर"

कलेक्टर अनुग्रह पी. से विशेष बातचीत
कलेक्टर ने सभी के सहयोग को बताया अब तक की सफलता का मूलमंत्र
केदार सिंह गोलिया, 7999366077 शिवपुरी। कोरोना का कहर अभी देश तो छोडि़ए प्रदेश में भी शुरूआती दौर में था, रणनीति न राज्य स्तर से तैयार हो पाई थी और उस बीच शिवपुरी जिले में पहला कोरोना पॉजीटिव मरीज दीपक के रूप में सामने आया तो यकायक असुरक्षा और खौफ का माहौल बन गया। प्रदेश में शिवपुरी उन शुरूआती जिलों में शामिल था जहां कोरोना पॉजीटिव मरीज सामने आए थे यह जनता कफ्र्यू के ठीक पहले का समय था। जिले की जिम्मेदारी महिला आईएएस अधिकारी श्रीमती अनुग्रह पी. पर थी। अपने स्तर पर उन्होंने कोरोना से लडऩे के लिए रणनीति के तहत निर्णय लेना शुरू किया तो शुरूआती दौर में उनकी प्रशासनिक क्षमता पर भी सवाल उठाए। सोशल साइड पर उन्हें अपने कुछ आदेशों को लेकर ट्रोल भी होना पड़ा, लेकिन शिवपुरी की यह महिला कलेक्टर आज कोरोना से लड़ाई में सुपर वूमेन बनकर उभरी हैं। जनता कफ्र्यू के ठीक बाद दो दिन उन्होंने धारा 144 के तहत लॉकडाउन लागू किया। तो फिर कोरोना पॉजीटिव मरीज समीर का मामला और सामने आते ही कफ्र्यू लागू कर दिया। हर दिन अपने आदेशों में जरूरत के मुताबिक संशोधन किए। पुलिस, नगरपालिका और स्वास्थ्य विभाग के साथ सामंजस्य बिठाया और एक- एक कदम कोरोना से इस लड़ाई में सावधानी के साथ बढ़ाती चली गईं। नतीजे में आज शिवपुरी जिला कोरोना मुक्त जिलों में शामिल है। कलेक्टर की रणनीति जो शुरूआती दौर में आलोचना का कारण बन रही थी आज यही रणनीति अब उनकी सराहना का आधार बन रही है। हमने कलेक्टर से इस पूरे कोरोना युद्ध की शुरूआत से लेकर अब तक रणनीति और सफलता को लेकर विशेष बातचीत की तो कलेक्टर ने इसका श्रेय पुलिस, प्रशासनिक, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य अमले व आवाम को दिया।

कलेक्टर की इस रणनीति से आज शिवपुरी बना कोरोना मुक्त
शिवपुरी को कोरोना मुक्त होने पर कलेक्टर से उनकी रणनीति के बारे पूछा तो उन्होंने बताया कि जितनी जल्दी सूचना मिले उतनी ही जल्दी कोरोना मरीज की पहचान हो जाए तो अच्छा है क्योंकि वह ज्यादा लोगों को संक्रमित नहीं कर पाते हैं। अच्छी चीज यह रही कि शिवपुरी के कोरोना पॉजीटिव मरीज किसी को संक्रमित कर पाते उससे पहले ही हमने इन्हें पकड़कर आईसोलेशन में भर्ती करा दिया था। इनका जो भी संपर्क क्षेत्र था जैसे परिवार, मोहल्ला को कंटेनमेंट एरिया घोषित कराके सील कर दिया था। इसके बाद पूरे एरिया का सर्वे किया था कहीं कोई व्यक्ति संक्रमित तो नहीं है, किसी में कोई लक्षण तो नहीं दिख रहे। इनके सामने वाले परिवारों का तो हमने पूरा टेस्ट किया था, सभी नेगेटिव आए। इस दौरान करीब हजार परिवार का परीक्षण किया गया था। दीपक शर्मा और समीर के भी लगातार टेस्ट किए गए, उनका संक्रमण समाप्त हो गया है। बाकि शासन के लॉकडाउन के जो निर्देश है उनका कडाई से पालन कराया गया, साथ ही साथ जो आवश्यक वस्तुएं थीं उसकी उपयोगिता सुनिश्चित की गई।

चार दिन बंद करने का ही था अधिकार इसलिए खोलनी पड़ीं थी शराब दुकानें
शुरूआती चरण में कफ्र्यू के दौरान जब पाँचवे दिन कलेक्टर ने अचानक शराब दुकानों को निर्धारित नियमों के तहत खोलने का आदेश दिया था तो उनका यह फैसला अचानक सोशल साइड पर उनके विरोध का कारण बन गया। सोशल साइड पर उन्हें ट्रोल भी होना पड़ा, लेकिन विशेष बातचीत में कलेक्टर ने इस फैसले को लेकर सच्चाई स्पष्ट की और बताया कि आबकारी दुकानों को लगातार चार दिन तक ही बंद करने का अधिकार अपने स्तर पर कलेक्टर को है। तत्समय राज्य शासन से दुकानें बंद करने का कोई आदेश नहीं था इसलिए निर्धारित अवधि पूरे होने के कारण दुकानें खोलने का आदेश जारी किया था, हालांकि इसके तत्काल बाद राज्य शासन ने शराब दुकानें 14 अप्रैल तक बंद करने का आदेश जारी कर दिया जिसका पालन सुनिश्चित कराया गया।

पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य का रहा विशेष सहयोग
लॉकडाउन कोसफल बनाने में विशेष रणनीति में सहयोग करने वाले अधिकारियों के सवाल पर कलेक्टर ने बताया कि वास्तव में पुलिस प्रशासन का बहुत सहयोग है। पुलिस अधीक्षक के कार्य की तारीफ करते हुए कहा कि एसपी साहब का तो बहुत अच्छा कंट्रोल है। हमने भ्रमण कर सभी एसडीएम और एसडीओपी के कार्यों का जायजा लिया, सभी तैयारी एसडीएम और एसडीओपी द्वारा बहुत अच्छे से की थीं। एडिशनल एसपी और सीईओ जिला पंचायत शिवपुरी ने बहुत अच्छी टीम बनकर काम किया है। स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ, डीन और सिविल सर्जन तीनों का अच्छा योगदान रहा है। इसके अलावा अन्य स्टाफ का भी सहयोग मिला।

घर से सपोर्ट मिला इसलिए नहीं आईं पारिवारिक परेशानी
पूरे संकट की घड़ी में हर-छोटे बड़े आदमी की पारिवारिक दिनचर्या प्रभावित हुई। जबकि कलेक्टर जिले की सबसे बड़ी नेतृत्वकर्ता हैं ऐसे में आपने पारिवारिक जिम्मेदारियों को कैसे निभाया और कैसा शेड्यूल रहा परिवार को लेके? कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुझे घर से सपोर्ट है इसलिए ज्यादा पारिवारिक परेशानी नहीं आईं। बिटिया शिशु कुंज में पढ़ती है, लेकिन सभी स्कूल बंद हैं जिससे वह पूरे समय घर पर रहती है। परिवार के साथ एक-दो घंटे ही समय दे सकती हूं, लेकिन बिटिया को सासु माँ संभाल लेती हैं इसलिए कोई दिक्कत नहीं है।

शासन को जो निर्देश मिलेगा उसका करेंगे पालन
लॉक डाउन की अवधि समाप्त होने वाली इसके बाद क्या रणनीति रहेगी ? इसके जबाव में कलेक्टर ने कहा कि शासन का जो भी निर्देश आएगा उसके हिसाब से लॉक डाउन का पालन करेंगे। अभी तो कुछ अलग नहीं है जो शासन के निर्देश है उसी हिसाब से सभी दुकान खोली जा रही हैं। जो निर्देश आएंगे उसका पालन करेंगे।

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