केदार सिंह गोलिया/7999366077
शिवपुरी। देश में लोकतंत्र लागू होने के बाद शिवपुरी-गुना संसदीय सीट एक ऐसी सीट रही जो कभी किसी राजनैतिक दल की बपौती नहीं बन पाई। इस सीट पर सल्तनत सिर्फ और सिर्फ सिंधिया परिवार की रही। फिर चाहे यहां भाजपा से स्व. अम्मा महाराज सांसद रहीं हों या फिर उनके बेटे कै. माधवराव सिंधिया कांग्रेस से या फिर सिंधिया परिवार से आशीर्वाद हासिल कोई सामान्य सा प्रत्याशी ही क्यों न जीता हो। माधवराव सिंधिया के निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया इस सीट के उत्तराधिकारी की तौर पर लगातार जीतते रहे। 2014 में जबर्दस्त मोदी लहर के बावजूद उनकी इस पुश्तैनी सीट पर कब्जा बरकरार रहा, लेकिन इस बार आखिर ऐसा क्या हुआ कि महाराज को चुनाव में शख्सियत, काबिलियत और राजनैतिक दृष्टि से बेहद बौने एक सामान्य से कांग्रेस से आयातित्य सामान्य से कार्यकर्ता ने भाजपा से चुनाव लड़कर उन्हें हरा दिया। राजनैतिक विश्लेषक भी इस हार को अब तक समझ नहीं पाए, लेकिन 6 माह बाद अब कुहासा धीरे-धीरे छंटने लगा है। महाराज की इस हार में प्रतिद्वंद्वियों से ज्यादा उनके मोहरे ही प्रमुख कारण रहे हैं। महाराज के ऐसे ही एक मोहरे के दामाद मोह ने उनकी इस हार की इबारत लिखी और इसका इल्म भी नहीं होने दिया। महाराज ये आपका वही मोहरा है जिसे अयोग्य, गैर अनुभवी होने के बावजूद आपने अपने बलबूते विधानसभा के द्वार पहुंचाया, लेकिन चुनाव में इस मोहरे ने आपके लिए विभीषण का काम किया और अपने दामाद के मोह में सजातीय प्रतिद्वंद्वी के साथ अप्रत्यक्ष तौर पर आपके वोट बैंक में सेंध लगा दी। ऐसे ही कुछ और मोहरे आपकी इस हार का कारण बने हैं। अब जरूरत इस बात की है कि आप समय रहते इन घर में छुपे भेदियों को चीन लें ताकि आगे के लिए ऐसे हालात फिर न बन पाएं।







