केदार सिंह गोलिया
प्रधानमंत्री की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में एक स्वच्छ भारत मिशन के तहत युद्धस्तर पर गांवों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा रहा लेकिन अनुपयोगी शौचालय, आंकड़ों की बाजीगरी और घोटाले कह रहे हैं कुछ और कहानी
शिवपुरी। जानकारों की मानें तो शिवपुरी जिले में स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर लाखों का घोटाला हुआ है। जिले में स्वच्छ भारत अभियान के तहत बनाए गए शौचालय लापरवाही एवं निज स्वार्थ के चलते स्वच्छता को मुँह चिढ़ा रहे हैं। इसी तरह का मामला पोहरी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत कनाखेड़ी में देखने को मिल रहा है। ग्राम पंचायत में हालात यह हैं कि कहीं-कहीं तो शौचालय बना दिए गए हैं, लेकिन उनके ऊपर छत तक नहीं है और अधिकांश ग्रामीणों के शौचालय नहीं बने हुए हैं। स्वच्छता की पोल तब खुलती है जब सुबह-शाम ग्रामीण अपने हाथ में लोटा पकड़कर खुले में शौच के लिए जाते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं। हद तब हो जाती है जबकि प्रशासन से ग्राम पंचायत को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। इससे ऐसा लगता है कि सिर्फ और सिर्फ कागजी घोड़े दौड़कर आंकड़ों को सुधारने के लिए शिवपुरी जिले की ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। ग्राम पंचायत में कुछेक ग्रामीणों के यहां बने शौचालयों की गुणवत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर चार साल में बने लाखों के शौचालय आज खडंहर हो गए हैं। हाल ही में इसकी नजीर पोहरी के ग्राम राठखेड़ा में देखने को मिली थी जहां लापरवाही और कमीशनखोरी के चलते मासूमों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। तत्समय प्रशासन कुंभकर्णी निंद्रा से जागा था, लेकिन जैसे ही मामला ठंडे बस्ते में गया फिर से प्रशासन सो गया।
सचिव पर भ्रष्टाचार के आरोप
ग्राम पंचायत कनाखेड़ी के सचिव सहित अन्य जिम्मेदारों की बात करें तो यहां पर सचिव द्वारा जमकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है, यह बात हम नहीं, बल्कि स्वयं ग्रामीण कह रहे हैं। सचिव द्वारा जालसाजी कर शासन की लाखों रुपए की राशि को खुर्दबुर्द किया गया है। सचिव द्वारा हैंड़पंप ठीक कराने, खरंजा निर्माण सहित अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर जमकर शासन की राशि को खुर्दबुर्द किया गया है। अगर इसकी निष्पक्षता से जांच की जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। इसके बाद सचिव सहित अन्य जिम्मेदारों पर कार्यवाही की गाज गिरना लाजमी है।
जानें ओडीएफ की अनिवार्य शर्त
केंद्रीय पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के मुताबिक, ओडीएफ की अनिवार्य शर्त शौचालय का इस्तेमाल है. यानी जब तक किसी गांव के सभी घरों के सभी सदस्य शौचालय का इस्तेमाल नहीं करते, तब तक उस गांव को ओडीएफ घोषित नहीं किया जा सकता।







