क्या आज भी जिंदा हैं विष पुरुष
पहले के जमाने में विष पुरुष होते थे क्या वही विष पुरुष है कल्लू आदिवासी
मध्यप्रदेश खनियांधाना के ग्राम मुहांसा में रहने बाले कल्लू आदिवासी को पूरा गांव कालो के काल के नाम से जानता है।
कल्लू आदिवासी के हुनर का अंदाज़ा लगाना मुश्किल ही नही नामुमकिन है
कल्लू आदिवासी के पास कोई तांत्रिक विद्या नहीं है केवल कल्लू का हुनर है
कितना बड़ा ही जहरीला सांप हो चंद्र सेकंडो में अपने हाथों में पकड़ लेता हैं कल्लू आदिवासी
कल्लू आदिवासी को कई ऐसे जहरीले सांपों ने काटा पर जहरीले सांपों का कल्लू आदिवासी के ऊपर कोई असर नहीं हुआ
अभी तक ऐसे सांपों से खेलना केवल फिल्मों मैं देखा था अब कल्लू आदिवासी को देखा है
ज़हरीले से ज़हरीले सांपों को आसानी से पकड़ लेता है कल्लू
खनियाधाना तहसील के ग्राम मोहासा में कल्लू आदिवासी नाम का एक व्यक्ति ज़हरीले से ज़हरीले सांपों को आसानी से पकड़ लेत हैं
खनियांधाना ( शिवकांत सोनी ) :- कहा जाता है कि, 'जिसको काटे सांप पदम, नहीं चले वो दो कदम।' पदम सांप 'किंग कोबरा' को कहा जाता है। खनियाधाना के ग्राम मुहासा में अजीबो-गरीब तरह का एक आदिवासी व्यक्ति को सांपो को पकड़ते और खुद को कटवाते देखा है पर उसके ऊपर कोई जहर का प्रभाव नहीं होता यह व्यक्ति वह साधारण सांपों तो नहीं पकड़ता है जहरीले सांपों को यहां के घरों में घूमते देखा जाता है रोजमर्रा की बात है क्षेत्र में कई ऐसे जहरीले सांप जैसे काले वाईपर, घोड़ा पछाड़, काली नाग काली नागिन और कई प्रकार की प्रजाति के सांप इस क्षेत्र में देखने को मिलते हैं खनियाधाना के ग्राम मुहांसा में कई जहरीले प्रजाति के सांप पाए जाते हैं
कल्लू आदावासी अपना काम छोड़कर भी लोगों की मदद करने के लिए सांप पकड़ने लोगों के घर पहुंच जाते हैं।
कल्लू आदिवासी का शौक। खनियाधाना तहसील के ग्राम मोहासा निवासी कल्लू आदिवासी का शौक केवल सांप पकड़ना और शराब पीना है कल्लू आदिवासी बताते हैं कि अगर मैं शराब पी लूं तो सांप मुझे काट लेते हैं और मैं बेहोशी में आ जाता हूं वही कल्लू आदिवासी को केवल एक ही शौक है जहरीले से जहरीले सांपों को पकड़ना और खुद अपने शरीर के अंगों को सर्पों से कटवाना कल्लू आदिवासी
कल्लू आदिवासी सांपों को पकड़ने का यह खेल करीब 3 वर्षों से चल रहा है इसके देखने वाले गांव के प्रत्यक्षदर्शी है जिन्होंने हमारी टीम को अपने बयान कैमरे में कैद कराए हैं
किसी को भी अपनी पहली ही मुलाकात में अपना बना लेने की सम्मोहन शक्ति रखने वाले कल्लू आदिवासी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं इस सर्प विशेषज्ञ की ख्याति या दक्षता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव व आसपास के क्षेत्र में कहीं भी सांप निकल आए तो इस कल्लू आदिवासी को लोग ढूंढने गांव की गली ओर गलिहारो में निकल जाते हैं और कल्लू जैसे ही सांप को हाथ लगाता है वैसे ही सांप कल्लू के कब्जे में चंद सेकंडो में आ जाता है









