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उपलब्धि - पूर्व विधायक भारती के सुपुत्र प्रतीक जर्मनी में करेंगे सिंथेटिक जीन पर शोध

  • मप्र से जर्मनी शोध के लिए पहले छात्र के रूप में चयनित होकर शिवपुरी सहित प्रदेश का नाम किया रोशन

शिवपुरी। सहज सरल स्वभाव के धनी पूर्व पोहरी विधायक प्रहलाद भारती और बाल कल्याण समिति की सदस्य श्रीमती सरला वर्मा के सुपुत्र प्रतीक वर्मा का जर्मनी में सिंथेटिक जीन ड्राइव तकनीकी पर शोध के लिये चयन हुआ है। प्रतीक वर्मा फ्रांस के एक अन्य छात्र के साथ वहां रहकर इस तकनीकी पर पूरे एक वर्ष के लिये शोध कार्य करेंगे। प्रतीक ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च कोलकाता (आईआईएसईआर) से इंटिग्रेटेड एम एस किया है और वह इन दिनों पीएचडी भी कर रहे है। इसी दौरान उन्हें जर्मनी के प्रतिष्ठित मैक्स प्लान्क इंस्टीट्यूट ऑफ इवुल्शनरी बायलॉजी से एक वर्षीय शोध के लिये चयनित किया कर लिया गया। प्रतीक शोध कार्य हेतु जर्मनी रवाना हो गए हैं। साल भर के इस विशिष्ट शोध का सभी व्यय जर्मनी सरकार द्वारा उठाया जाएगा। खासबात यह है कि प्रतीक मप्र से जर्मनी में शोध के लिए चयनित एकमात्र विद्यार्थी हैं। प्रतीक की इस उपलब्धि से न केवल मप्र, बल्कि शिवपुरी का भी गौरव बढ़ाया है। 

क्या है सिंथेटिक जीन ड्राइव तकनीकी
प्रतीक वर्मा के अनुसार जीन हमारी आनुवांशिक विशेषताओं की जानकारी रखने की मूलभूत शारीरिक इकाई है। आनुवांशिक विशेषताएं जैसे हमारे बालों का रंग कैसा होगा, आंखों का रंग क्या होगा, कद-काठी कैसी होगी या हमें कौन सी बीमारियां हो सकती हैं, इसकी जानकारी हमारे जींस में होती है। यह जींस हमें विरासत में अपने माता-पिता से मिलते है। जीन हमें अपनी माता से मिला है या पिता से इसकी संभावना साधारणत: 50-50  होती है। सिंथेटिक जीन ड्राइव तकनीकी के आविष्कार से इसे बदला जा सकता है। कुछ प्रजातियों पर किये गए प्रयोगों से यह पाया गया है कि किसी जीन के निर्धारण को अगली पीढ़ी में 100 प्रतिशत तक किया जा सकता है। कई वैज्ञानिक, इंडस्ट्रीज और कुछ देशों की सरकारें इस तकनीकी का प्रयोग कृषि क्षेत्र में नुकसान पहुंचाने वाली प्रजातियों एवं मलेरिया के मच्छरों के खात्मे के रूप में प्रयोग करने पर बल दे रहे है। पर अभी भी हम इस तकनीकी के दीर्घकालीन प्रभावों के बारे में सही से नहीं जानते है। मेरा शोध सिंथेटिक जीनड्राइव टेक्नोलोजी से उत्पन्न हो सकने वाली जोखिमों और प्रतिरोधों का आकलन करना करना है। यह काम में गणितीय एवं कंप्यूटर मॉडल के विश्लेषण को भी करता हूँ। प्रतीक इस तकनीकी पर जर्मनी में अध्ययन करने वाले मप्र के पहले शोधकर्ता हैं उनकी इस उपलब्धि पर शहर के तमाम लोगो ने उन्हें शुभकामनाएं दी है। 

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