Breaking Ticker

बिना डायवर्सन के गोलमाल कर सैंकड़ों बीघा जमीन पर हो रहा प्लांट का निर्माण कार्य

  • मप्र सीलिंग अधिनियम से लेकर भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों की खुलेआम उड़ाई धज्जियां मामला बिनेगा के पास साढ़े आठ सौ बीघा जमीन के गोलमाल का


शिवपुरी। शहर से चंद किमी की दूरी पर सटे गांव चंदनपुरा और बिनेगा क्षेत्र में करीब साढ़े आठ सौ बीघा भूमि का गड़बड़झाला सामने आया है। जिसमें मप्र सीलिंग अधिनियम से लेकर भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों की खुलेआम धज्जियां बिखेरी गई। शिवपुरी जिले में भूमि का गोलमाल इस हद तक बढ़ गया है कि प्रशासन के अधिकारी भी इस गोलबंदी मेें शामिल हो गए हैं ऐसे में कानून के पालन की अपेक्षा किससे की जाए। ग्राम विनेगा के पटवारी हल्का क्रमांक 37 में सर्वे नम्बर 1225 रकबा करीब 500 बीघा पर व्यावसायिक प्रयोजन से बिना किसी वैध डायवर्सन के काम कराया जा रहा है यहां इस भूमि की खरीद फरोख्त बिना सीलिंग के प्रावधानों का ध्यान रखे की गई। इसी गांव में सर्वे नम्बर 12 की भूमि जो कि आदिवासी लक्ष्मी पत्नि जसराम की थी जिसे विक्रय की अनुमति तत्कालीन कलेक्टर द्वारा प्रकरण क्रमांक 54-55 2009-10 अ 21 1 दिनांक 6 अप्रेल 2011 द्वारा दे डाली गई। इस भूमि को क्रेता परमिदर कौर ने खरीदा। इसी ग्राम की सर्वे नम्बर 14 की भूमि प्रक 53-56 2009-10 अ 21, 1 आदेश दिनांक 6 अप्रेल 11 एवं आदेश दिनांक 28 मार्च 11 को भी विक्रय की अनुमति तत्कालीन कलेक्टर ने दी जबकि यह भूमि पहले रामदयाल सिंकन्दर के नाम थी और विक्रय से वर्जित थी। इस भूमि का रकबा साढे नौ बीघा था इसे जलंधर के प्रभजीत सिंह ने खरीदा, बाद में बिनेगा चंदनपुरा क्षेत्र में यह तमाम भूमि जिसका रकबा करीब 63.34 हेक्टेयर यानि 328 बीघा है। 
प्रशासनिक की लापरवाही आई खुलकर सामने
यहां गरीब आदिवासियों की विक्रय से बर्जित जमीनों के क्रय की अनुमति देकर उन्हें प्रभावशाली लोगों के हाथों बेचने का खेल खेला गया उसमें पूर्व के तहसीलदार,एसडीओ से लेकर कलेक्टर की अदूरदॢशता खुल कर सामने आ रही है। इस भूमि पर एक बड़े प्रोजेक्ट का निर्माण किया जा रहा है जमीनों के इस खरीदफरोख्त में नियमों की खुलेआम धज्जियां बिखेरी जा रही है। यहां फारेस्ट क्षेत्र में आने वाली भूमि पर भी निर्माण किया जा रहा है जबकि ऐसा किया जाना गलत है। 

शिवयोग इंफ्रा संचालक सेंगर सहित कई बड़े नाम

यह भूमि एक के बाद एक करके चंद लोगों के पास जा पहुंची जिनमें शिव योग इंफ्रा टेक प्रालि के संचालक सतेन्द्र सिंह सेंगर निवासी शिवपुरी, बसंती बेबा हरप्रसाद धाकड़, अशोक पुत्र हरप्रसाद धाकड़, विनोद पुत्र हरप्रसाद धाकड़, रानी पुत्री हरप्रसाद धाकड़, रामकली पुत्री हरप्रसाद धाकड़ आदि शामिल हैं। जबकि सर्वे क्रमांक 1225 रकबा करीब 500 बीघा यह भूमि भी इन्हीं लोगों के नाम नामांतरित कर दी गई। अब ये क्रेता इस भूमि को एक प्राइवेट कम्पनी को बेच चुके हैं, इस खरीद फरोख्त में म.प्र. सिलिंग अधिनियम के प्रावधानों का खुला उल्लंघन हुआ है। 

तयशुदा रणनीति के तहत दिया गोरखधंधे को अंजाम

नियमानुसार किसी भी कृषि भूमि का स्वरूप परिवर्तित तब तक नहीं किया जा सकता जब तक उसका डायवर्सन न करा लिया जाए। इस प्रकरण में बिनेगा क्षेत्र में जो कृषि भूमि की खरीद फरोख्त एक तयशुदा रणनीति के तहत हुई है, उसमें बिना डायवर्सन कराए भूमि को व्यवसायिक प्रयोजन में लिया जा रहा है। मौके पर यहाँ एक बड़ा प्लाण्ट लगाने की तैयारी चल रही है जिसकी अधोसंरचना यहाँ तैयार हो चुकी है। सिलिंग का परीक्षण नामांतरण से पूर्व किया जाना चाहिए था मगर इस नियम की भी परवाह अधिकारियों ने नहीं की। 

वन सीमा में बिना अनुमति प्लांट निर्माण की सुगबुगाहट

सूत्रों की मानें तो चिटौरा स्थित 1225 सर्वे नम्बर की भूमि पर प्लाण्ट निर्माण का काम किया जा रहा है वह भूमि वन क्षेत्र में आती है और वन सीमा में आने वाली भूमि पर बिना किसी वैध अनुमति के इस तरह का निर्माण वैध नहीं कहा जा सकता। इस भूमि पर एक आलीशान कोठी भी बनी है जिस भूमि पर यह कोठी बनी है उसकी रजिस्ट्रिी कृषि भूमि की कराई जाकर मकानात को दस्तावेजों में नहीं दर्शाया गया जो अपने आप में शासन को स्टाम्प ड्यूटी की चपत लगाने वाला कदम है। यहाँ मौके पर दस्तावेजों को देखें तो खैर व अन्य औषधिय प्रजाति के तमाम वृक्ष मौजूद थे, जो अब मौके पर नहीं हैं और इनकी कीमत भी अदा नहीं की गई।

आयकर विवरणी भी जाँच के घेरे में

जिन चंद लोगों ने इस भूमि की खरीद फरोख्त की है उनकी आयकर विवरणी भी जाँच के घेरे में है क्योंकि करीब 828 बीघा भूमि के क्रेताओं की आय क्या कुछ है और वे कितना आयकर चुकता कर रहे हैं, उनकी आय के स्त्रोत क्या हैं, जिसके चलते वे इतने बड़े पैमाने पर भूमि की खरीद फरोख्त कर रहे हैं। ये तमाम सवाल यहाँ रह रहकर खड़े हो रहे हैं। राजस्व विभाग के आला अधिकारी इस पूरे मामले में चुप्पी ओढ़े हुए हैं जबकि यहाँ करोड़ों का खेल खेला जा रहा है। 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट 

किसी भी कृषि भूमि का स्वरूप बिना डायवर्सन कराए परिवर्तित नहीं किया जा सकता, यह कानूनन अवैध है। म.प्र. सीलिंग अधिनियम 1960 की धारा 7 में स्पष्ट वर्णित है कि क्रेता यदि किसी कुटुम्भ का सदस्य नहीं है और भूमि दो फसली है तो 10 एकड़ से ज्यादा और एक फसली होने पर 15 एकड़ तथा सूखी भूमि 30 एकड़ से अधिक  रखने का अधिकारी नहीं है। वन सीमा की भूमि पर बिना फॉरेस्ट की एनओसी के किसी प्रकार गैर वानकीय कार्य किया जाना सर्वथा प्रतिबंधित है। प्रकरण में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उन्हें देखते हुए मामला गम्भीर जाँच की आवश्यकता प्रतिपादित कर रहा है।
अनिल व्याघ्र
एडव्होकेट शिवपुरी

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
Kedar Singh Goliya, Mo.- 7999366077
school add  1



......

......

------------

-------------


-------
---------






Page settings Search Description Options Changes savedPage: Edit