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गुना लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस जीत के अंतर को बढ़ाने और भाजपा चमत्कार की तलाश में

शिवपुरी। गुना शिवपुरी लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस की पूरी कवायद जहां पिछले चुनाव में मिली जीत के अंतर को बढ़ाने की ओर है वहीं भाजपा को चमत्कार की तलाश है। भाजपा प्रत्याशी केपी यादव का दावा है कि इस बार संसदीय क्षेत्र में चमत्कार और परिवर्तन की आहट देखने को मिलेगी और पहली बार इस संसदीय क्षेत्र में मोदी लहर के सहारे भाजपा चुनाव जीतेगी। 
आंकड़ों की दृष्टि से देखें तो गुना संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस की विजय काफी आसान नजर आ रही है। यह इसलिए क्योंकि अभी तक संसदीय क्षेत्र में सिंधिया परिवार के प्रतिनिधि को कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा है। 1956 के बाद इस संसदीय क्षेत्र में सिंधिया परिवार की तीन पीढिय़ों के सदस्य 14 चुनाव जीत चुके हैं। चाहे वह किसी भी दल अथवा निर्दलीय रूप से क्यों न खड़े हों। कांग्रेस की ओर से सिंधिया परिवार के ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव मैदान में हैं जो इससे पहले चार बार लगातार यहां से चुनाव जीत चुके हैं और उनकी जीत का अंतर 77 हजार से लेकर साढ़े 4 लाख मतों तक रहा है। पिछले चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया जहां 1 लाख 21 हजार मतों से जीते थे वहीं 2009 में उनकी जीत का अंतर लगभग ढाई लाख मतों का था। 2004 के लोकसभा चुनाव में अवश्य भाजपा प्रत्याशी हरिवल्लभ शुक्ला ने उनके दांत खट्टे  कर दिए थे और वह महज 77 हजार मतों से ही चुनाव जीत पाए थे। इससे पहले स्व. माधवराव सिंधिया के निधन के बाद हुए उपचुनाव में सहानुभूति लहर के सहारे पहली बार ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा प्रत्याशी स्व. देशराज सिंह यादव से साढ़े चार लाख से अधिक मतों से विजयी हुए थे। पिछले चुनाव में भले ही सिंधिया की जीत का अंतर एक लाख 21 हजार मतों का रहा हो, लेकिन जिला मुख्यालय की शिवपुरी और गुना विधानसभा क्षेत्रों में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था। यह कांग्रेस प्रत्याशी सिंधिया के लिए अभी तक चिंता का विषय बना हुआ है और इसकी पीड़ा वह कई बार व्यक्त कर चुके हैं। इस चुनाव में निश्चित तौर पर भाजपा ने प्रथम दृष्टि में ऐसा कोई प्रत्याशी सिंधिया के खिलाफ चुनाव मैदान में नहीं उतारा जिससे मुकाबला बराबरी का लगे। भाजपा ने टिकट भी अपने किसी प्रतिबद्ध कार्यकर्ता को देने के स्थान पर कांग्रेस में सिंधिया खेमे से आए केपी यादव को दिया है। भाजपा के प्रचार और प्रसार में भी अभी उतनी गर्माहट नहीं दिख रही जबकि कांग्रेस तमाम अनुकूलताओं के बावजूद किसी प्रकार की कसर नहीं छोड़ रही। सिंधिया को जब पश्चिमी उत्तरप्रदेश का प्रभारी बनाया गया था तो ऐसा लगा था कि अपने संसदीय क्षेत्र में प्रचार करने या तो वह आएंगे नहीं अथवा बहुत कम समय देंगे। इसी कारण सांसद सिंधिया ने अपनी धर्मपत्नि प्रियदर्शनी राजे को सक्रिय कर दिया था और वह लगभग 2 माह से संसदीय क्षेत्र का चप्पा चप्पा छान रही हैं। सिंधिया भी संसदीय क्षेत्र में लगातार सक्रिय बने हुए हैं। यहीं नहीं सांसद सिंधिया ने अपने खेमे के सभी मंत्रियों को यहां झोंक दिया है। संभाग भर में फैले सिंधिया समर्थक कार्यकर्ता भी गली गली में घूम रहे हैं। बसपा प्रत्याशी लोकेंद्र सिंह धाकड़ भी सिंधिया के समर्थन चुनाव मैदान से हट चुके हैं और वह सिंधिया के साथ इलाके में प्रचार कर रहे हंै। कई भाजपा नेता भैया साहब लोधी, पूर्व मंत्री केएल अग्रवाल, डॉ. महेश आदिवासी आदि भी कांग्रेस में आ चुके हैं। यह कवायद किसलिए इसका जवाब देते हुए एक कांग्रेस नेता ने बताया कि ताकि सिंधिया प्रदेश में सबसे अधिक मतों से जीत का रिकॉर्ड बना सके। कांग्रेस की तुलना में भाजपा की सक्रियता कम देखने को मिल रही है, लकिन भाजपा प्रत्याशी केपी यादव आत्मविश्वास से भरे हुए हैं और उनका कहना है कि इस चुनाव में भाजपा का एक एक कार्यकर्ता मोदी बना हुआ है और इस बार निश्चित रूप से चमत्कारिक परिणाम देखने को मिलेंगे जो कभी नहीं हुआ वह इस बार होगा और नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए इस क्षेत्र का मतदाता उन्हें वोट देगा। देखना यह है कि क्या कांग्रेस जीत का एक नया रिकॉर्ड बनाएगी अथवा भाजपा संसदीय क्षेत्र में चमत्कार करने में सफल रहेगी। 

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