शिवपुरी। शहर में कहने को तो दर्जनों समाज सेवी संस्थाएं संचालित हो रही हैं। कई समाजसेवी संस्थाओं द्वारा निशुल्क विभिन्न रोगों के उपचार हेतु शिविरों का आयोजन कराया जाता है जिनमें बाहर से बड़े बड़े नामी गिरामी विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाया जाता है। शिविर से पूर्व मरीजों को निशुल्क उपचार के नाम पर आयोजकों द्वारा समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया के माध्यम से ढिंढोरा पीटा जाता है। यदि इन शिविरों की सच्चाई पर गौर करें तो इन कथित समाजसेवियों के शिविर सिर्फ और सिर्फ इन डॉक्टरों के संस्थानों के प्रचार प्रसार का माध्यम बनकर ही रह जाते हैं।
जिस रोग का उपचार संभव नहीं तो फिर शिविर में क्यों करते हैं शामिल
यहां बता दें कि शिविर में चर्म रोग, नि संतान जैसी विभिन्न बीमारियों के उपचार हेतु पर्चे और होडिंग बैनर लगाए जाते हैं जब मरीज इस शिविर में इलाज कराने जाता है तो शिविर में आए हुए बाहरी स्पेशलिस्ट सिर्फ और सिर्फ अपने संस्थान का परचा या फिर फ़ाइल पकड़ा देते हैं और यह कहकर मरीज को चलता कर देते हैं कि इसका इलाज बहुत लंबा है आपको सही होने के लिए हमारे संस्थान में आना पड़ेगा। अब सवाल यह उठता है कि जब इलाज लंबा है और शिविर में दिया नहीं जा सकता तो फिर निशुल्क इलाज का ढिंढोरा पीटा ही क्यों जाता है
चेहरा चमकाने के माध्यम बने संस्थान
आज के आधुनिक दौर में ऐसे संस्थान बहुत ही कम होंगे जो वास्तव में समाज सेवा के लिए अग्रसर रहते हो जिन्हें आसानी से उंगलियों पर गिना जा सकता है, लेकिन दर्जनों समाज सेवी संस्थाओं के कथित समाजसेवी समाजसेवा को सिर्फ चादर की तरह इस्तेमाल करती हैं। जब जरूरत होती है उसे ओढ़ लेते हैं और अपना चेहरा चमकाने के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद उतार कर रख देते हैं।






