शिवपुरी। चेक बाउंस के एक मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रूपम तोमर के न्यायालय ने मुकेश रावत को दोषी मानते हुए तीन माह के कारावास की सजा से दण्डित किया, साथ ही 2,33,900 रुपए प्रतिकर अदा करने का आदेश दिया। प्रतिकर अदा न करने की दशा में एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। परिवादी संजय कुशवाह ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शिवपुरी में वाद दाखिल किया था।
पीडि़त संजय कुशवाह निवासी झींगुरा शिवपुरी ने आरोप लगाया था कि मुकेश रावत पुत्र मुंशी रावत उम्र 38 वर्ष निवासी शिवराज सिंह पटेल के पास बोडाफोन टॉवर के पास बड़ागांव विद्युत विभाग में ठेकेदारी का काम करता है और मैं भी विद्युत विभाग में ठेकेदार का व्यवसाय करता हूं इसलिए दोनों एक-दूसरे को पहचानते हैं। अभियुक्त मुकेश रावत को जुलाई 2018 में पैसों की जरूरत पडऩे पर 1,80,000 रुपए नगद उधार दिए थे जो तीन माह में वापस करने का मौखिक रूप से तय हुआ था। अभियुक्त ने परिवादी को उक्त राशि का चेक क्रमांक 380670 दिनांक 2.12.2018 भारतीय स्टेट बैंक का दिया था। समय पूरा होने के बाद जब पीडि़त ने पैसे वापस मांगे तो वह बहानेबाजी करने लगा। इसके बाद परेशान होकर संजय कुशवाह ने उक्त चैक को अपने एचडीएफसी बैंक शाखा शिवपुरी के बचत खाते में जमा किया, किंतु अभियुक्त ने उक्त चैक के भुगतान पर रोक लगवा दी गई उक्त टीप के साथ बैंक द्वारा चैक को वापस परिवादी को कर दिया गया। इसके बाद संजय कुशवाह ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अभियुक्त को नोटिस भेजा, लेकिन उसका कोई जबाव नहीं दिया गया। अभियुक्त द्वारा दिए गए चैक के अनादरित होने पर परिवादी को भारी मानसिक संताप हुआ और आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ी। इस आधार पर मुकेश रावत को मामले में दोषी करार देते हुए परक्राम्य लिखित अधिनियम 1881 की धारा 138 के तहत तीन माह के कारावास की सजा से दण्डित करते हुए प्रतिकर वापस करने का आदेश दिया। परिवादी की ओर से पैरवी अधिवक्ता सूर्यप्रताप सिंह द्वारा की गई।







