शिवपुरी। कोलारस विकासखण्ड के ग्राम पचावला में संकुल अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन दलहन (मसूर) अंतर्गत प्रक्षेत्र दिवस सह कृषक संगोष्ठी का आयोजन बुधवार को किया गया। इस दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा उपलब्ध कराये गये बीजों से उगी मसूर और किसान द्वारा खुद की पसंद से बोई गई मसूर के बीच का अंतर समझाया।
भारतीय कृषि अनुसंधान केन्द्र, जबलपुर के निर्देशानुसार संकुल अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन अंतर्गत जिले में मसूर का क्षेत्रफल एवं उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ दलहन में आत्मनिर्भर बनने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र के द्वारा क्लस्टर का चयन कर विभिन्न ग्रामों में मसूर की उन्नत किस्मप्रजाति आईपीएल-316 के बीज किसानों के खेतों में प्रदर्शन डाले गए थे। इसी क्रम में मसूर की फसल के प्रदर्शनों को लेकर बुधवार को पचावला में मसूर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन कर कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा डाले गए बीज प्रदर्शन और किसान द्वारा बाजार से खरीद कर डाले गए बीज के बीच उत्पादन का अंतर बताया गया। इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र की टीम ने संकुल अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के अंतर्गत मसूर (प्रजाति आईपीएल 316) के प्रदर्शनों का अवलोकन कर प्रदर्शनों का महत्व विस्तार से समझाया।
कृषि विज्ञान केन्द्र के जे. सी. गुप्ता वैज्ञानिक (पौध संरक्षण) एवं प्रभारी अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन दलहन ने किसानों को मसूर की उन्नत तकनीकी खेती एवं सामयिक सलाह के साथ अन्य फसलों में रोग कीट आदि की जानकारी किसानों को दी गई। कार्यक्रम में किसानों ने मसूर से संबंधित तकनीकी जानकारी का लाभ लेते हुए रबी फसल में अन्य तकनीकी संबंधी जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में 50 से अधिक किसानों की भागीदारी रही। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार डॉ. ए. एल. बसेडिया, वैज्ञानिक (कृषि अभियांत्रिकी) ने किया एवं मसूर की उन्नत प्रजाति का प्रचार-प्रसार हेतु प्रोत्साहित किया। साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्र के शोध सहायक (दामू) विजय प्रताप सिंह द्वारा जिला कृषि मौसम विज्ञान इकाई अंतर्गत मेघदूत एप के बारे में किसान भाइयों को जानकारी देते हुए एप से जोडा तथा किस प्रकार मौसम में बदलाव के पूर्वानुमान की जानकारी कर किसान भाई अपनी फसल का बचाव कर सकते हैं, से अवगत कराया। कार्यक्रम में पूर्व सरपंच गोविन्द दांगी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम को संपन्न कराने में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एम. के. भार्गव, वैज्ञानिक डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. एन.के. कुशवाहा,वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी योगेन्द्र चंद्र रिखाड़ी, कार्यालय अधीक्षक सह लेखपाल सतेन्द्र गुप्ता, स्टेनो श्रीमती आरती बंसल का सहयोग रहा।








