केदार सिंह गोलिया
शिवपुरी। शिवपुरी के शिक्षा विभाग में आजकल एक मुद्दा गरमाया हुआ है किड्जी स्कूल (संचालक कंचन बुगरा) खिन्नी नाका का जिसमें शिक्षा विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारियों को मोटे लिफाफे से दबाया गया है ।
जब शिक्षा विभाग की नाक के नीचे, जहां जिला शिक्षा अधिकारी का बैठते हो और वहाँ ये खेल जारी है कि बिना मान्यता स्कूल पाँच साल से चल रहा है। जो स्कूल वर्ष 2016 में स्कूल को खोला गया और आज दिनांक तक स्कूल को मान्यता नही और जब ये मामला बार-बार उठाया जा रहा है तब भी स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख से ये बात की गई तो उनका कहना था कि मैं दिखवाता हूं कि उनको कहाँ तक मान्यता है। इस पूरे घटनाक्रम में गौर करने वाली बात तो ये है कि हमारे शिवपुरी जिले के शिक्षा विभाग के मुखिया को ये भी नहीं पता कि उनके अधीनस्थ कौन से स्कूल आते हैं और किसको मान्यता है और किसको नहीं...?
विश्वस्त सूत्रों की माने तो कुछ समय पूर्व तक ऐसे स्कूलों पर एफआईआर करवाने की बात करने वाले शिक्षा विभाग के मुखिया से आज जब दुबारा इस विषय पर बात की गई तो उनका गोल मोल रवैया सामने आया कि मैं दिखवाता हूं उसको मान्यता कहाँ तक है लेकिन शायद ये शिक्षा विभाग के मुखिया ये भूल गये कि एजुकेशन पोर्टल पर सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची अपलोड होती है जो इनके द्वारा ही डाली जाती है।
बड़े और मोटे लिफाफे बने कार्यवाही न होने का कारण
विभाग में बैठे एक बाबू सचिन तेंदुलकर जी ने उठाया लिफाफे का वजन और कार्यवाही न होने की गारंटी। शायद यही कारण बन रहा है जिम्मेदारों के सुर समय के साथ बदल रहे हैं।
शिवपुरी। शिवपुरी के शिक्षा विभाग में आजकल एक मुद्दा गरमाया हुआ है किड्जी स्कूल (संचालक कंचन बुगरा) खिन्नी नाका का जिसमें शिक्षा विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारियों को मोटे लिफाफे से दबाया गया है ।
जब शिक्षा विभाग की नाक के नीचे, जहां जिला शिक्षा अधिकारी का बैठते हो और वहाँ ये खेल जारी है कि बिना मान्यता स्कूल पाँच साल से चल रहा है। जो स्कूल वर्ष 2016 में स्कूल को खोला गया और आज दिनांक तक स्कूल को मान्यता नही और जब ये मामला बार-बार उठाया जा रहा है तब भी स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख से ये बात की गई तो उनका कहना था कि मैं दिखवाता हूं कि उनको कहाँ तक मान्यता है। इस पूरे घटनाक्रम में गौर करने वाली बात तो ये है कि हमारे शिवपुरी जिले के शिक्षा विभाग के मुखिया को ये भी नहीं पता कि उनके अधीनस्थ कौन से स्कूल आते हैं और किसको मान्यता है और किसको नहीं...?
विश्वस्त सूत्रों की माने तो कुछ समय पूर्व तक ऐसे स्कूलों पर एफआईआर करवाने की बात करने वाले शिक्षा विभाग के मुखिया से आज जब दुबारा इस विषय पर बात की गई तो उनका गोल मोल रवैया सामने आया कि मैं दिखवाता हूं उसको मान्यता कहाँ तक है लेकिन शायद ये शिक्षा विभाग के मुखिया ये भूल गये कि एजुकेशन पोर्टल पर सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची अपलोड होती है जो इनके द्वारा ही डाली जाती है।
बड़े और मोटे लिफाफे बने कार्यवाही न होने का कारण
विभाग में बैठे एक बाबू सचिन तेंदुलकर जी ने उठाया लिफाफे का वजन और कार्यवाही न होने की गारंटी। शायद यही कारण बन रहा है जिम्मेदारों के सुर समय के साथ बदल रहे हैं।







