इस अवैध रूप से संचालित स्कूल को अभयदान देने और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कराने में दलाल की भूमिका में एक कथित पत्रकार का भी नाम सामने आ रहा है। यूं तो यह पत्रकार है ही नहीं, बल्कि एक बड़े अखबार में विज्ञापन उगाने का काम करता है जिसे पत्रकारिता की भाषा में विज्ञापन प्रतिनिधि कहते हैं, लेकिन अधिकारियों के सामने खुद को बड़े अखबार का पत्रकार बताकर अपने स्वार्थ गांठने और दलाली करने का सिलसिला वर्षों से चला रहा है। इस मामले में भी इस विज्ञापन प्रतिनिधि की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है। बताया जाता है कि पूरे मामले के सेटलमेंट के लिए स्कूल संचालक से मोटी राशि इसके माध्यम से ली गई और आश्वास्त किया गया है कि वह अधिकारियों को सेटल कर देगा। इस राशि में आधी राशि यह कथित पत्रकार हड़प गया जबकि आधी राशि में बटोना विभागीय अधिकारियों को कर दिया गया जिसके चलते आंखों पर इसी सुविधा शुल्क की पट्टी बंध गई और वे जांच-जांच का खेल खेल रहे हैं।
विज्ञापन प्रतिनिधि होने के बावजूद पत्रकार बताने वाले इस शक्स की शिकायत अखबार के संभागीय कार्यालय सहित अखबार के मालिक तक भी हो चुकी है। ऐसे में अखबार के नाम पर अधिकारियों के लिए दलाली करने वाले इस विज्ञापन प्रतिनिधि पर अखबार भी जल्द ही बड़ी कार्यवाही कर सकता है।






