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शिवपुरी में शिक्षा विभाग का कारनामा : नियमों को ताक पर रखकर कर रहे युक्ति-युक्तकरण

सुविधाजनक स्कूलों के लिए वसूली, वीयाबान जंगल के स्कूलों में भेज रहे महिलाओं को
 

केदार सिंह गोलिया शिवपुरी। जिला शिक्षा विभाग शिवपुरी इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है। विभाग आजकल में युक्ति-युक्तकरण और प्रशासनिक तबादलों की सूची करने जा रहा है जिसे मंत्री व कलेक्टर से अनुमोदित भी करा लिया गया है, लेकिन इस सूची में विभाग के अधिकारियों और बाबुओं ने तय गाइड लाइन को ही दरकिनार कर दिया है। सूची में कई ऐसे तबादले किए गए हैं जो विभाग के नियमों से परे हैं जबकि कुछ तबादले ऐसे भी हैं जो सुविधा शुल्क के बलबूते सुविधाजनक स्कूलों में किए जाने की बात सामने आ रही है। पूरा मामला चर्चाओं के केन्द्र में है और प्रक्रिया को लेकर बड़े पैमाने पर शिक्षकों से उगाही और उनका भयादोहन किए जाने के आरोप भी उछल रहे हैं। कई महिला शिक्षिकाओं को नियम विरूद्ध तरीके से वीयाबान जंगल के उन स्कूलों में भेजा रहा है जो वर्षों से खाली पड़े थे और विभाग अब तक वहां पुरुष शिक्षकों को तक नहीं भेज पाया था। वहीं कई शिक्षकों को शहर और उसके आसपास पदस्थ करने की बात भी सामने आई है।

होना था ऑनलाइन आखिरी तारीख निकली, अब ऑफलाइन की तैयारी
दरअसल इसी साल बड़ी संख्या में ऑनलाइन तबादले किए गए थे जिसके बाद पूरे जिले में सैंकड़ों स्कूलों में अतिशेष की स्थिति निर्मित हो गई। जबकि इस प्रक्रिया से पूर्व ही युक्ति-युक्तकरण किया जाना था, लेकिन यहां से शुरू हुई नियमों की अनदेखी अधिकारियों ने अब तक जारी रखी। अब जब परीक्षा में सिर्फ दो महीने बाकी हैं। 15 से 30 नवम्बर तक प्रशासनिक तबादले और युक्ति-युक्तकरण के आदेश दिए गए थे यहां भी लेनदेन के आरोपों के बीच प्रक्रिया पूरी न होने से विभाग समय रहते निर्धारित 23 तारीख तक आदेश जारी नहीं कर पाया, लेकिन अब इस सूची को निर्धारित तिथि के बाद ऑफलाइन जारी करने की तैयारी है। इस गुजरी अवधि में बड़े पैमाने पर शिक्षकों को भयभीत कर उगाही के आरोप सामने आ रहे हैं। निर्धारित तिथि के बाद यह सूची जारी होती है तो सीधेतौर पर यह प्रदेश स्तर से जारी गाइड लाइन का उल्लंघन होगा।

बाबू पर वसूली के आरोप, कीमत के आधार पर बंटे सुविधाजनक स्कूल
इस पूरी प्रक्रिया पर न केवल शिक्षक संघ, बल्कि सत्ताधारी कांग्रेस के कई स्थानीय नेता भी नाराज हैं और मामले की शिकायत उच्च स्तर तक किए जाने की तैयारी कर ली गई है। सूत्रों की मानें तो सूची में दर्जनभर से अधिक महिला शिक्षिकाओं को उनके संकुल और ब्लॉक से दूर वीयाबान और सुदूर इलाकों में मौजूद उन स्कूलों में पदस्थ किया जा रहा है जहां अब तक विभाग पुरुष शिक्षकों को तक नहीं भेज पाया। इनमें से अधिकांश वे महिलाएं हैं जो प्रक्रिया के दौरान लेनदेन के खेल में सुविधा शुल्क नहीं दे पाईं जबकि इसी सूची में कई पुरुष और महिला शिक्षिकाओं को उनके आसपास यहां तक कि शहर व उससे सटे स्कूलों में मोटी कीमत लेकर पदस्थ किया जा रहा है। नियमों की बात करें तो इस प्रक्रिया में काउंसिलिंग के आधार पर पदस्थापना की जानी थी। सबसे पहले अतिशेष शिक्षकों को उनके वर्तमान संकुल में रिक्त पदों वाले स्कूल में या फिर उसी विकासखण्ड के अन्य स्कूलों में पदस्थ किया जाना था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। इतना ही नहीं मिडिल स्कूलों में अतिशेष शिक्षकों को इस प्रक्रिया में छोड़ दिया गया। कई सुविधाजनक स्कूलों में पद रिक्त होने के बावजूद वहां अतिशेष शिक्षकों को नहीं भेजा गया क्योंकि इन पदों पर तबादले के जरिए मोटी रकम वसूलने की नीयत अधिकारियों की थी।

विभाग के रैकेट पर उगाही के आरोप
इस पूरे मामले में भले ही अभी सूची सार्वजनिक नहीं हुई है और हंगामे के कारण सूची की बजाय व्यक्तिगत तौर पर आदेश जारी करने की बात कही जा रही है, लेकिन पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर लेनदेन को लेकर आरोप निराधार नहीं है। तबादलों में सुविधाजनक स्कूलों के लिए लेनदेन की बातचीत को लेकर कुछ ऑडियो भी बाजार में सामने आए हैं जिन्हें लेकर भी कई नेता प्रदेश स्तर पर शिकायत की तैयारी भी कर चुके हैं। लेनदेन के इस खेल में विभाग के एक बाबू सहित कुछ शिक्षकों की भूमिका सामने आ रही है। फिलहाल यह पूरा मामला गंभीर जांच का विषय बना हुआ है।

मामले ने तूल पकड़ा तो कलेक्टर पहुंची बैकफुट पर
इस पूरे मामले में कई बातों को लेकर कलेक्टर अनुग्रह पी. को भी विभागीय अधिकारी और बाबुओं द्वारा अंधेरे में रखने की बात सामने आ रही है। मामले के तूल पकडऩे के बाद कलेक्टर भी बैकफुट पर नजर आ रही हैं। प्रारंभ में जहां कलेक्टर इस पूरी प्रक्रिया को आवश्यक बताते हुए इसे खुद के द्वारा उठाया गया आवश्यक कदम बता रहीं थीं, वहीं जब उनके सामने यह बात लाई गई कि इसमें अधिकारियों ने कई महिला शिक्षिकाओं को ऐसे स्कूलों में पदस्थ कर दिया है, जहां पिछले कई वर्षों से पुरुष शिक्षक तक जाने का साहस नहीं जुटा पाए और सूची में कई शिक्षकों को नियम विरूद्ध शहर और आसपास पदस्थ कर दिया गया। इसके बाद कलेक्टर के सुर बदल गए और वे मामले में सभी प्रस्ताव डीईओ द्वारा प्रस्तावित करने की बात कहने लगीं और यह भी आश्वासन दिया कि यदि कुछ गलत होता है तो संबंधित शिक्षक आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। फिलहाल यदि यह सूची जारी होती है तो मामला प्रदेश स्तर पर उठना तय है। यहां तक कि विधानसभा सत्र में भी बेहद महत्वपूर्ण बन सकता है और इस खेल में लिप्त कई अधिकारी और बाबू नप सकते हैं।

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