दलबदलू प्रवृत्ति के रहे कुशवाह की दावेदारी नहीं पचा पा रहे "पंजादारी"
केदार 'करामाती' 7999366077
शिवपुरी। जिले की पोहरी विधानसभा सीट हमेशा से तात्कालिक परिस्थितियों और जातिगत समीकरणों के ईर्द-गिर्द घूमती रही है। यहां समय-समय पर दल बदलकर किस्मत आजमाने वाले प्रत्याशियों की भी कमी नहीं रही। हरिबल्लभ शुक्ला इसका उदाहरण है। कुछ इसी तरह की स्थिति आगामी विधानसभा चुनाव में भी बनती नजर आ रही है। पिछले दो चुनावों में कड़ी टक्कर देकर निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे कैलाश कुशवाह इस बार नाथ के साथ चुनाव में ताल टोकने जा रहे हैं। खुद कमलनाथ आज शुक्रवार को बैराड़ में सभा के दौरान कैलाश पर हाथ रखकर उन्हें चुनावी रण में अपनी पार्टी से उतारने की अधिकृत घोषणा कर सकते हैं। कैलाश का कैरियर देखें तो शुरूआती दौर में वे वर्तमान सत्ताधारी पार्टी भाजपा के कमल के साथ थे तो बाद में उन्होंने जातिगत समीकरण साधने हाथी की सवारी की और बसपा से चुनाव लड़ेे। इस बार उन्हें इस बीच से हाथ के साथ जीत की उम्मीद नजर आ रही है तो उन्होंने कांग्रेस से चुनाव लडऩे की पूरी तैयारी कर ली है। इन्हीं सब परिस्थितियों के बीच अंचल में पहले ही संगठनात्मक तौर पर छिन्न-भिन्न पड़ी कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेताओं को "कैलाश को नाथ का साथ" रास नहीं आ रहा। बड़ी संख्या में पोहरी अंचल में ऐसे कांग्रेसी नेता हैं जो कहीं न कहीं इस बार पार्टी से टिकिट की आस पाले बैठे थे ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि यदि आज कमलनाथ कैलाश को अपना अधिकृत उम्मीदवार यहां से घोषित कर दते हैं तो उसके बाद पोहरी में कांग्रेस में भिरतघात सामने आएगा या नहीं....?










