शिवपुरी। आबकारी विभाग न केवल शराब ठेकेदारों पर मेहरबान है बल्कि उसकी रहम और दरियादिली होटल और ढाबा संचालकों पर बखूबी देखने को मिल रही है। यही वजह है कि हाइवे किनारे के कई होटल और ढ़ाबों पर भी खुलेआम देशी-विदेशी शराब की विक्री हो रही है। बस फर्क सिर्फ इतना हैं कि चिन्हित ढाबों बिकने वाली शराब के लिए शौकीनों को अपनी जेब कुछ ज्यादा ही हल्की करनी पड़ती है, क्योकि यहां पर जो निर्धारित रेट है उससे 30 से 40 परसेंट एक्सट्रा चार्ज देना पड़ता है। खास बात यह है कि होटल और ढाबों पर न केवल देशी-विदेशी शराब की बिक्री हो रही है, बल्कि उन पर बैठकर पीने की सुविधा भी मुहैया कराई जा रही है। हाइवे किनारे चिन्हित और चुनिदा ढाबों पर बिकने वाली अवैध शराब से महकमा बखूबी वाकिफ है, लेकिन अभी तक किसी भी होटल और ढ़ाबा संचालक को ठोस कार्रवाई के दायरे में नहीं लिया गया है, जिससे होटल और ढ़ाबो पर अवैध शराब बेचने वालों के हौंसले बुलंद हैं या फिर यूं कहें कि खुलेआम संरक्षण प्राप्त है।
शिवपुरी जिले की सीमा से आगरा-मुम्बई और कानपुर जयपुर हाइवे गुजरते हैं। इन दोनों हाइवे के दोनों ओर जिले की सीमा में पचासों होटल और ढाबे हैं। फोरलेन के चलते कुछ होटल और ढ़ाबे शाही अंदाज में खुले हुए है। सूत्रों के मुताबिक इन दोनों हाइवे के किनारे कुछ चुनिंदा ढाबों पर अंग्रेजी और देशी शराब की बिक्री की जा रही है। इन हाइवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को भी यह अच्छे से पता होता है कि किसी होटल पर और ढ़ाबे पर उनका पीने का शौक पूरा हो सकता है और रात के समय पीने वाले चालक इन्ही होटल और ढ़ाबों पर अपने वाहन खड़े करते हैं। वजह साफ ऐसे होटल और ढ़ाबों पर उनके खाने और पीने के दोनों की व्यवस्था हो जाती हैं। अवैध रूप से शराब की विक्री करने वाले होटल और ढ़ाबों में वाहन चालकों के अलावा गांवों के वो स्थानीय लोग भी ग्राहक होते हैं जो अंग्रेजी शराब पीने का शौक तो रखते हैं, लेकिन उनके आसपास कोई अंग्रेजी शराब की दुकान नहीं होती है।
बढ़ रही है सड़क दुर्घटनाएं
स्थानीय लोग भी अपने अंग्रेजी शराब के शौक को हाइवे किनारे के चिन्हित होटल और ढ़ाबो पर पूरा कर लेते हैं। वैसे तो शहर में नियमों के विपरीत आधी रात मदिरा की दुकानें खुल रही है, लेकिन इसके बाद भी रात को किसी को शराब की जरूरत पड़ती है तो ऐसे लोग शहर की सीमा से सटे हाइवे के होटल और ढ़ाबों की ओर ही रूख करते हैं। हाइवे के किनारे के चुनिंदा होटल और ढ़ाबों पर न केवल रात बल्कि दिन के उजाले में भी आसानी से मनमाफिक ब्रांड की शराब मिल जाती है। हाइवे किनारे होने वाली अवैध शराब की ब्रिकी से एक ओर जहां सड़क हादसों की आशंका बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर अपराधिक गतिविधियों को बल मिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
ड्राई-डे का सबसे बड़ा सहारा
गांधी जयंती, 15 अगस्त, 26 जनवरी सहित शासन द्वारा निर्धारित अन्य शुष्कदिवस(ड्राई-डे) के दिन जब शराब की दुकानों को बंद किया जाता है। तब हाइवे किनारे के चिन्हित और चुनिंदा होटल ही पीने के शौकीन लोगों का सबसे बड़ा सहारा बनते हैं। पीने वालों को यह बखूबी मालूम होता है कि ड्राई-डे के दिन किस होटल पर और ढ़ाबे पर शराब मिलेगी तो वह उसकी ओर ही रूख करते हैं। अब यह दीगर बात है कि शुष्क दिवस के दिन इन होटल पर ढ़ाबों पर पीने वालों को अपना शौक पूरा करने के दो गुना तक पैसा देना पड़ते है। क्योंकि बंद शराब की दुकानों का पूरा-पूरा लाभ उठाने से ये होटल और ढ़ाबा संचालक नहीं चूकते हैं।







