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साइबर ठगी से अब लूट तक पहुंचे शातिर...महिला शिक्षिका का एटीएम कार्ड लूटकर कार से भागे, 12 मिनिट में उड़ा दिए 38 हजार रुपए

शिक्षिका आशा जैन जिनके साथ हुई एटीएम लूट व ठगी की वारदात

लूट के बाद महिला शिक्षिका को मिले कार्ड से भुगतान और प्रयास के मैसेज



शिवपुरी। यूं तो पिछले एक दशक से साइबर ठगी और एटीएम बदलकर रुपए उड़ाने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं, लेकिन रविवार को शहर ही नहीं शायद प्रदेश में एटीएम कार्ड लूट का पहला सनसनीखेज मामला शिवपुरी में सामने आया है, जहां एक अधेड़ महिला शिक्षिका से एसबीआई के एटीएम में कार्ड लूट की वारदात को अंजाम दिया गया। दरअसल कोलारस के हायर सेकेण्डरी स्कूल सेसई सड़क में पदस्थ महिला शिक्षिका जो शिवपुरी की वर्मा कॉलोनी में निवास करती हैं, रविवार की सुबह 9 बजे गुरूद्वारा चौराहे के समीप कल्ला पान भण्डार से सटे एसबीआई के एटीएम पर पहुंची तो यहां स्थापित दो एटीएम मशीन में से एक पर एक युवक ट्रांजेक्शन कर रहा था, महिला शिक्षिका कुछ देर इंतजार करती रही उसके बाद युवक को टोका तो उसने कहा कि मैं पिन जनरेट कर रहा हूं समय लगेगा आप दूसरी मशीन से पैसे निकाल लो। महिला शिक्षिका ने 8 बाय 8 के एटीएम कक्ष में लगी दूसरी मशीन से ट्रांजेक्शन किया तो उक्त युवक ने झांककर महिला के एटीएम का पासवर्ड जान लिया। इस दौरान शिक्षिका आशा जैन ने तीन हजार रुपए का ट्रांजेक्शन किया और एटीएम कार्ड जैसे ही मशीन से बाहर निकाला तो पहले से खड़े इस अज्ञात युवक ने महिला के हाथ से एटीएम छीना और बाहर की तरफ दौड़ लगा दी। एटीएम सेंटर के बाहर खड़े दो युवकों को मदद के लिए पुकारते हुए शिक्षिका ने आवाज लगाई तो ये दोनों युवक उस युवक के पीछे दौड़े भी। नजदीक स्थित क्वालिटी रेस्टोरेंट के बाहर खड़ी एक अज्ञात कार पर एटीएम का लुटेरा युवक पहुंचा तो पीछे से दौड़े दोनों युवक भी उसी कार में सवार होकर रफूचक्कर होने लगे और जाते-जाते एक एटीएम कार्ड बाहर फेंक गए। पलभर के लिए महिला शिक्षिका को राहत मिली, लेकिन फेंका कार्ड देखा तो वह किसी डॉक्टर प्रदीप कुमार का था। इसके बाद महिला पर अपना मोबाइल न होने के कारण उसने परिजनों को इत्ताला दी तो पता चला कि एटीएम लुटेरा और उसका गिरोह ठगी को अंजाम दे चुका है। महिला शिक्षिका ने मामले की शिकायत कोतवाली पुलिस को की है। पुलिस ने मौके पर जाकर नजदीकी होटल सहित एटीएम के सीसीटीव्ही फुटेज खंगाले हैं, लेकिन फिलहाल लुटेरे पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। 

पहले 38 हजार रुपए एटीएम से निकाले, फिर 60 हजार के ट्रांजेक्शन का प्रयास

एटीएम लुटेरों की तत्परता देखिए कि सुबह 9 बजे घटना को अंजाम देने के बाद कार में फरार हुए इन अपराधियों ने महज 12 मिनिट बाद घटनास्थल से करीब 1 किमी दूर आईटीबीपी कैम्पस के बाहर स्थित एटीएम से 9 हजार 500 रुपए नगद आहरित कर लिए। इसके बाद महिला शिक्षिका के मोबाइल पर 9 बजकर 15 मिनिट पर ऑनलाइन ट्र्रांजेक्शन को लेकर पहले 20 हजार फिर कुछ देर बाद 40 हजार के ट्रांजेक्शन का फेल्ड मैसेज आया। आनन-फानन में शिक्षिका ने कोतवाली पुलिस को जानकारी दे दी है और अपना एटीएम कार्ड ब्लॉक करवा दिया, लेकिन फिलहाल पुलिस के हाथ खाली हैं। वहीं महिला शिक्षिका ने जब देर शाम बैंक के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क साधा तो बकौल आशा जैन उन्हें बताया गया कि ठगों ने 9 हजार 500 रुपए का सिर्फ एक ही नहीं, बल्कि चार ट्रांजेक्शन किए हैं यानि ठगों ने 38 हजार रुपए उनके खाते से नगद निकाल लिए। चौकाने वाली बात यह है कि बैंक की तरफ से सिर्फ एक ही मैसेज 9 हजार 500 रुपए के एटीएम आहरण का उन्हें मिला। बता दें कि एटीएम की लिमिट प्रतिदिन 40 हजार रुपए है यानि ठगों ने लगभग अधिकतम आहरण चार ट्रांजेक्शन के जरिए निकाल लिया। बकौल आशा जैन उनके खाते में ठगी से पहले 1 लाख 30 हजार रुपए से अधिक थे।  

ओटीपी के फेर में बचे शेष रुपए

एटीएम लूट और ठगी के इस मामले में बैंक प्रणाली की ओटीपी व्यवस्था काफी हद तक ठगी की बड़ी वारदात पर अंकुश लगाने में सार्थक साबित हुई है। बता दें कि एटीएम से 10 हजार या अधिक की राशि आहरित करने या नए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन रजिस्ट्रेशन के लिए ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) की आवश्यकता होती है जो खाताधारक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजी जाती है बस यहीं व्यवस्था शिक्षिका को जिससे खाते में करीब एक लाख 30 हजार से अधिक रुपए थे। उसके साथ 38 हजार रुपए की ठगी हो पाई क्योंकि 40 हजार रुपए की लिमिट के चलते ठग ऑनलाईन ट्रांजेक्शन के जरिए 20 और 40 हजार रुपए के दो अतिरिक्त प्रयासों में सफल नहीं हो पाए। 

एटीएम सेंटर में दो मशीनों पर सवाल

एसबीआई सहित अन्य प्रमुख बैंकों के उपभोक्ता हर साल एटीएम सुविधा के ऐवज में 150 रुपए से लेकर 250 रुपए तक व्यवस्था शुल्क बैंकों को अदा करते हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में बैंकों की बड़ी लापरवाही शहर सहित अंचल में सामने आई है। हालात यह हैं कि अधिकांश एटीएम सेंटर पर सुरक्षा गार्ड अब हटा दिए गए हैं और छोटे से चैम्बर में एक की बजाय दो-दो एटीएम मशीनें स्थापित कर दी गई हैं। नतीजे में मजबूरीवश इस चैम्बर में एक साथ दो एटीएम उपभोक्ता बिलकुल सटकर भुगतान या ट्र्रांजेक्शन करते हैं जबकि आरबीआई के नियमों की बात करें तो एक समय में एटीएम सेंटर के अंदर एक ही उपभोक्ता होना चाहिए। 



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